एलपीजी आपूर्ति में कमी की आशंका: गृह सचिव ने राज्यों के अधिकारियों के साथ की बैठक
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षा उपाय: एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- जागरूकता अभियान: जनता में जानकारी फैलाना महत्वपूर्ण है।
- सोशल मीडिया निगरानी: फर्जी खबरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हाल के पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के चलते घरेलू बाजार में एलपीजी की आपूर्ति में कमी आने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव भी शामिल थे।
बैठक में बताया गया कि 8 मार्च को जारी एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर के अनुसार, रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, होटलों और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी वितरण पर कुछ प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जबकि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को यह छूट दी गई है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करें, इसके लिए सुरक्षा उपाय और कर्मचारियों का ध्यान रखा जाए। स्थानीय स्तर पर एलपीजी आपूर्ति की नियमित निगरानी, नियमों के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए।
राज्यों को यह भी कहा गया कि वे जनता में जागरूकता अभियान चलाएं ताकि एलपीजी की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों और गलत जानकारी को रोका जा सके। इस प्रक्रिया में तेल विपणन कंपनियों की सहायता भी ली जा सकती है। सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखने और फर्जी समाचार या पुरानी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने कंट्रोल रूम को और मजबूत किया है, जो 24 घंटे काम कर रहा है। इसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नोडल अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित तथ्य जांच और सही जानकारी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को उपलब्ध कराई जा सके।