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एलपीजी संकट: विपक्ष ने केंद्र सरकार पर उठाए गंभीर सवाल, संसद में चर्चा की मांग

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एलपीजी संकट: विपक्ष ने केंद्र सरकार पर उठाए गंभीर सवाल, संसद में चर्चा की मांग

सारांश

भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा की मांग की गई है। जानें विपक्षी नेताओं के बयान और स्थिति की गंभीरता।

मुख्य बातें

एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
विपक्ष ने संसद में चर्चा की मांग की है।
सरकार को स्पष्ट नीतियों की आवश्यकता है।
ब्लैक मार्केटिंग की आशंका बढ़ रही है।

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के मद्देनजर, भारत के कई शहरों में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी और कीमतों में वृद्धि को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है और इस मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है। उनकी माने तो एलपीजी की उपलब्धता में कमी आ रही है और कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। यदि समय पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल हो सकती है।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की लड़ाई को इस संकट की मुख्य वजह बताया। उनका कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के चलते अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार ने हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि की है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में गैस की कमी की खबरें आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्ष ने संसद में स्थगन प्रस्ताव पेश किया था ताकि इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की जा सके। उनका कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला, तो इसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई के होटल मालिकों ने बताया है कि एलपीजी की कमी के चलते उन्हें अपने होटल को बंद करने की नौबत आ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार के सामान्य बयानों के बजाय संसद में ठोस चर्चा और स्पष्ट योजना की आवश्यकता है।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में गरीब परिवारों के लिए गैस के बिना जीवन यापन करना कठिन हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर ब्लैक मार्केटिंग कर सकते हैं। इसके अलावा, छोटे होटल और रोज होटल में भोजन करने वाले गरीब लोगों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि रांची में भी एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार का कहना है कि देश में लगभग एक महीने का गैस स्टॉक है, लेकिन युद्ध कब तक चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में सरकार को अपनी नीतियों और रणनीतियों को स्पष्ट करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस पर संसद में गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। यह महत्वपूर्ण है कि सरकार स्पष्ट नीतियों के साथ इस संकट का समाधान करे।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी का मुख्य कारण क्या है?
एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी का मुख्य कारण अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध और उसके परिणामस्वरूप ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता है।
क्या इस स्थिति का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई असर होगा?
हां, यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
सरकार ने गैस की कीमतों में वृद्धि की है?
जी हां, हाल ही में सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि की है।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए हैं?
विपक्ष ने संसद में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है ताकि इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा की जा सके।
क्या लोग इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं?
हां, इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग ब्लैक मार्केटिंग कर सकते हैं, जिससे गरीब परिवारों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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