PM मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित, बोले — कर्मशील और ऊर्जावान देशवासी ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति

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PM मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित, बोले — कर्मशील और ऊर्जावान देशवासी ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति

सारांश

PM मोदी ने 30 अप्रैल को 'एक्स' पर संस्कृत सुभाषित साझा कर कर्मशील और ऊर्जावान नागरिकों को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया। यह उनकी लगातार चार दिनों की सुभाषित श्रृंखला का हिस्सा है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक राष्ट्र-निर्माण से जोड़ती है।

Key Takeaways

PM मोदी ने 30 अप्रैल 2026 को 'एक्स' पर संस्कृत सुभाषित शेयर कर कर्मशील और ऊर्जावान देशवासियों को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया। श्लोक "अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः..." के माध्यम से निरंतर उत्साह और परिश्रम का संदेश दिया गया। 29 अप्रैल को सजग नागरिक और रिकॉर्ड मतदान को लेकर सुभाषित पोस्ट किया गया था। 28 अप्रैल को संयम और समर्पण, तथा 27 अप्रैल को निःस्वार्थ सेवा भावना पर सुभाषित साझा किए गए। यह श्रृंखला प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन नागरिक कर्तव्य और राष्ट्र-निर्माण से जोड़ने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि कर्मशील और ऊर्जावान देशवासी ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उनके अनुसार, इन्हीं नागरिकों के परिश्रम से विकास की नई राहें तय होती हैं और देश समृद्धि, आत्मनिर्भरता तथा उन्नति के शिखर को छूता है।

आज का सुभाषित और उसका संदेश

मोदी ने 30 अप्रैल को अपनी पोस्ट में संस्कृत श्लोक उद्धृत किया — "अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः। करोति सफलं जन्तोः कर्म यच्च करोति सः॥" — जिसका आशय है कि निरंतर उत्साह और अखंड प्रयास ही मनुष्य के हर कार्य को सफल बनाता है। प्रधानमंत्री ने इस श्लोक को राष्ट्र-निर्माण में नागरिकों की भूमिका से जोड़ते हुए कहा कि इनके प्रयासों से ही एक समर्थ और समृद्ध भारत का स्वप्न साकार होता है।

पिछले कुछ दिनों की सुभाषित श्रृंखला

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले कई दिनों से लगातार संस्कृत सुभाषितों की एक श्रृंखला साझा की है। 29 अप्रैल को उन्होंने सजग नागरिक के कर्तव्य को रेखांकित करते हुए लिखा था — "राज्ञो हि व्रतमुत्थानं यज्ञः कार्यानुशासनम्। दक्षिणा वृत्तिसाम्यं च दीक्षितस्याभिषेचनम्॥" — और इसे लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित करने के आह्वान से जोड़ा था।

28 अप्रैल को उन्होंने संयम और समर्पण पर केंद्रित सुभाषित — "उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृतिः स्मृतिः। समीक्ष्य च समारम्भो विद्धिमूलं भवस्य तु॥" — साझा करते हुए कहा था कि संयम और समर्पण के साथ किया गया परिश्रम अद्भुत सफलता दे सकता है और राष्ट्र की समृद्धि को नई ऊर्जा मिलती है।

27 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा भावना पर प्रकाश डालते हुए वृक्ष की उपमा वाला सुभाषित — "छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे। फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव॥" — पोस्ट किया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्र की असली शक्ति उसके नागरिकों की निःस्वार्थ सेवा भावना में निहित है।

सुभाषित श्रृंखला का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में नागरिक भागीदारी और राष्ट्र-निर्माण को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज़ है। प्रधानमंत्री का यह कदम प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शासन और नागरिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की सांस्कृतिक संवाद-शैली नागरिकों में कर्तव्यबोध और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहित करती है।

आगे क्या

प्रधानमंत्री की यह सुभाषित श्रृंखला सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया पा रही है और नागरिकों को प्राचीन भारतीय साहित्य की ओर आकर्षित कर रही है। आने वाले दिनों में भी इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है, जो राष्ट्र-निर्माण के विभिन्न आयामों को उजागर करती रहेगी।

Point of View

जो शासन को प्राचीन भारतीय मूल्यों से जोड़ती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि श्लोकों के माध्यम से नागरिक कर्तव्य और मतदान का आह्वान नीतिगत संवाद से अधिक प्रतीकात्मक है। असली परीक्षा यह है कि क्या ये संदेश ज़मीनी स्तर पर नागरिक भागीदारी को वास्तविक रूप से बढ़ाते हैं। फिर भी, संस्कृत साहित्य को मुख्यधारा के सार्वजनिक विमर्श में लाने का यह प्रयास सांस्कृतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

PM मोदी ने 30 अप्रैल को कौन-सा सुभाषित शेयर किया?
PM मोदी ने 30 अप्रैल 2026 को 'एक्स' पर "अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः। करोति सफलं जन्तोः कर्म यच्च करोति सः॥" श्लोक साझा किया। इसके माध्यम से उन्होंने कर्मशील और ऊर्जावान नागरिकों को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
PM मोदी की सुभाषित श्रृंखला कब से चल रही है?
प्रधानमंत्री मोदी ने कम से कम 27 अप्रैल 2026 से लगातार संस्कृत सुभाषित पोस्ट करने की श्रृंखला शुरू की है। 27, 28, 29 और 30 अप्रैल को क्रमशः निःस्वार्थ सेवा, संयम-समर्पण, सजग नागरिक कर्तव्य और कर्मशीलता पर सुभाषित साझा किए गए।
29 अप्रैल के सुभाषित में PM मोदी ने क्या संदेश दिया था?
29 अप्रैल को मोदी ने सजग नागरिक के कर्तव्य को रेखांकित करते हुए रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि इससे न केवल लोकतंत्र सशक्त होगा, बल्कि भारतवर्ष के नवनिर्माण में सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।
PM मोदी के सुभाषित पोस्ट का उद्देश्य क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी के ये सुभाषित पोस्ट प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक राष्ट्र-निर्माण, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सांस्कृतिक संवाद-शैली नागरिकों में कर्तव्यबोध और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहित करती है।
27 अप्रैल के सुभाषित में किस विषय पर प्रकाश डाला गया था?
27 अप्रैल को PM मोदी ने निःस्वार्थ सेवा भावना पर केंद्रित सुभाषित "छायामन्यस्य कुर्वन्ति..." साझा किया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्र की असली शक्ति उसके नागरिकों की निःस्वार्थ सेवा भावना में निहित है और इससे समाज और समृद्ध होता है।
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