ईंधन ₹3/लीटर महंगा: शिवसेना (यूबीटी) का केंद्र पर हमला, 'चुनाव बाद महंगाई का रिटर्न गिफ्ट'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 16 मई 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर जनता को महंगाई की आग में झोंक दिया गया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में यह दावा किया गया कि यह मूल्य वृद्धि पाँच राज्यों के चुनाव समाप्त होते ही लागू की गई, जो सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करती है।
चुनाव के बाद लागू हुई बढ़ोतरी
ठाकरे गुट के अनुसार, केंद्र सरकार ने पाँच राज्यों में मतदान पूरा होने तक ईंधन की कीमतों पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि चुनावी जीत के जश्न में सैकड़ों वाहनों के विशाल रोड शो हुए और लाखों लीटर ईंधन खर्च हुआ। इसके ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से ईंधन बचाने की अपील की और उसके तीन दिन के भीतर ही कीमतें बढ़ा दी गईं।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि यह मूल्य वृद्धि प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यमंत्रियों द्वारा ईंधन बचत के गुणगान करने के महज दो दिन बाद लागू हुई। पार्टी ने इसे जनता को मिला 'रिटर्न गिफ्ट' करार दिया।
खाड़ी युद्ध और आर्थिक दबाव का हवाला
संपादकीय में कहा गया कि खाड़ी में युद्ध लगभग तीन महीनों से जारी है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, सत्ताधारी दल पहले यह दावा करता रहा कि पीएम मोदी की वजह से भारत पर ईरान युद्ध के प्रभाव का कोई असर नहीं पड़ा। आलोचकों का कहना है कि ईंधन मूल्य वृद्धि ने इस दावे को स्वयं सरकार ने ही खारिज कर दिया है।
पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार को अचानक देश पर मंडराते ईंधन संकट, सोने के आयात के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे बोझ और रुपये के अवमूल्यन का एहसास हुआ — और यह एहसास चुनावों के बाद ही क्यों हुआ, यह सवाल उठाया गया।
आम जनता पर असर
संपादकीय के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतें पहले से ही आम आदमी की पहुँच से बाहर हैं और दूध भी ₹2 प्रति लीटर महंगा हो चुका है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने से सब्जियों, फलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि खाड़ी में युद्ध की स्थिति नहीं सुधरी, तो ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
विपक्ष के आरोपों को मिली 'पुष्टि'
शिवसेना (यूबीटी) ने तर्क दिया कि ईंधन की कीमतें बढ़ाकर और सोने पर आयात शुल्क में वृद्धि कर सरकार ने स्वयं विपक्ष के उन आरोपों को सही साबित कर दिया है, जिन्हें पहले खारिज किया जा रहा था। जब विपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे, तो BJP नेताओं ने विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में महंगाई को लेकर राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा है। गौरतलब है कि ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे दौर में हुई है जब आम उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती लागत से जूझ रहा है।