मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मिथुन चक्रवर्ती के आवास पर की मुलाकात, भेंट की मां काली की प्रतिमा

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मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मिथुन चक्रवर्ती के आवास पर की मुलाकात, भेंट की मां काली की प्रतिमा

सारांश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से उनके कोलकाता आवास पर मुलाकात की और मां काली की प्रतिमा भेंट की — यह मेल राज्य में नई भाजपा सरकार और पार्टी के स्टार चेहरे के बीच समन्वय का संकेत देता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 17 मई 2025 को कोलकाता में मिथुन चक्रवर्ती के आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की।
अधिकारी ने अभिनेता को मां काली की प्रतिमा भेंट की; जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ने दी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं।
मिथुन चक्रवर्ती 7 मार्च 2021 को PM मोदी की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए थे और पार्टी के प्रमुख स्टार प्रचारक रहे हैं।
मिथुन ने 2016 में शारदा चिट फंड घोटाले में नाम आने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दिया था।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शनिवार, 17 मई 2025 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के कोलकाता स्थित आवास पर उनसे मिलने पहुँचे। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान अधिकारी ने अभिनेता का हालचाल जाना और उन्हें मां काली की प्रतिमा भेंट की।

मुलाकात का संदर्भ

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। दोनों नेताओं की पश्चिम बंगाल में व्यापक लोकप्रियता है और दोनों भाजपा के प्रमुख बंगाली चेहरों में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस भेंट को शिष्टाचार मुलाकात बताया।

सुवेंदु अधिकारी: राजनीतिक सफर

सुवेंदु अधिकारी ने 1995 में कांथी नगरपालिका के पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है और जनसेवा को ही अपना परिवार मानते हुए आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उन्होंने 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मतभेदों के चलते सितंबर 2020 में उन्होंने TMC छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

मिथुन चक्रवर्ती का राजनीतिक उतार-चढ़ाव

फिल्म जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले मिथुन चक्रवर्ती का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आमंत्रण पर वे 2014 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। हालांकि, शारदा चिट फंड घोटाले में नाम आने के बाद उन्होंने 2016 के अंत में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।

7 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मिथुन चक्रवर्ती भाजपा में शामिल हुए। पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल में अपना प्रमुख बंगाली चेहरा और स्टार प्रचारक बनाया, जिनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती रही। गौरतलब है कि उन्होंने चुनावी राजनीति में कोई प्रशासनिक पद लेने या चुनाव लड़ने के बजाय स्वयं को पार्टी विचारधारा के प्रचार और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने तक सीमित रखा है।

आगे क्या

यह मुलाकात राज्य में भाजपा के नए प्रशासन और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय के संकेत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में मिथुन चक्रवर्ती की भाजपा सरकार में भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नई भाजपा सरकार द्वारा अपने सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रतीकों को साधने की रणनीति का हिस्सा लगती है। मिथुन चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े बंगाली चेहरे रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी भूमिका अभी अस्पष्ट है। यह भी उल्लेखनीय है कि शारदा घोटाले की छाया और TMC से भाजपा तक की यात्रा के बाद मिथुन की राजनीतिक विश्वसनीयता एक जटिल विरासत है। नई सरकार उन्हें किस भूमिका में रखती है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुवेंदु अधिकारी और मिथुन चक्रवर्ती की मुलाकात क्यों हुई?
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी ने मिथुन चक्रवर्ती का हालचाल जाना और उन्हें मां काली की प्रतिमा भेंट की। दोनों नेता भाजपा के प्रमुख बंगाली चेहरे हैं।
सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री कब बने?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री बने। वे 1995 से राजनीति में सक्रिय हैं और 2020 में TMC छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
मिथुन चक्रवर्ती भाजपा में कब शामिल हुए?
मिथुन चक्रवर्ती 7 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। इससे पहले वे 2014 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर राज्यसभा सदस्य बने थे।
मिथुन चक्रवर्ती ने राज्यसभा से इस्तीफा क्यों दिया था?
शारदा चिट फंड घोटाले में नाम आने के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने 2016 के अंत में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। बाद में 2021 में वे भाजपा में शामिल हुए।
मिथुन चक्रवर्ती की भाजपा में क्या भूमिका है?
भाजपा ने मिथुन चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल में अपना प्रमुख बंगाली चेहरा और स्टार प्रचारक बनाया है। उन्होंने चुनावी राजनीति में कोई प्रशासनिक पद लेने या चुनाव लड़ने के बजाय स्वयं को पार्टी विचारधारा के प्रचार तक सीमित रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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