महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर का टाटा ट्रस्ट्स को आदेश: बोर्ड बैठक स्थगित करें, ट्रस्टी संरचना पर जाँच जारी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर अमोघ एस. कालोटी ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) को 16 मई 2026 को निर्धारित बोर्ड बैठक तत्काल स्थगित करने का आदेश दिया है। यह निर्देश ट्रस्टी बोर्ड की संरचना में कथित नियम उल्लंघन को लेकर दर्ज शिकायतों के बाद जारी किया गया, जिसके चलते एक इंस्पेक्टर द्वारा औपचारिक जाँच शुरू की गई है। टाटा ट्रस्ट्स ने इस आदेश को एकतरफा (एक्स-पार्टी) बताया है और कहा है कि यह केवल SRTT पर लागू होता है।
मुख्य घटनाक्रम
यह बैठक पहले 8 मई को प्रस्तावित थी, जिसे बाद में 16 मई तक के लिए टाला गया था। बैठक में टाटा संस की संभावित लिस्टिंग, चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और अन्य नॉमिनी डायरेक्टरों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी थी। चैरिटी कमिश्नर के आदेश के अनुसार, जब तक इंस्पेक्टर की जाँच रिपोर्ट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक ट्रस्ट कोई भी बोर्ड बैठक आयोजित नहीं कर सकता।
शिकायत की पृष्ठभूमि
वकील कात्यायनी अग्रवाल ने 18 अप्रैल को चैरिटी कमिश्नर से हस्तक्षेप की माँग की थी। उनकी शिकायत के अनुसार, SRTT में फिलहाल छह ट्रस्टी हैं, जिनमें जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा आजीवन ट्रस्टी हैं — यानी कुल बोर्ड में उनकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत बनती है। गौरतलब है कि सितंबर 2025 में लागू किए गए संशोधित प्रावधान के तहत किसी ट्रस्ट के बोर्ड में स्थायी या आजीवन ट्रस्टियों की संख्या 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
टाटा ट्रस्ट्स की प्रतिक्रिया
टाटा ट्रस्ट्स ने एक बयान में कहा, "चैरिटी कमिश्नर कार्यालय से मिले निर्देशों की सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा जाँच की जा रही है।" ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश बिना किसी पूर्व सूचना या SRTT को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जारी किया गया।
दाँव पर क्या है
सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है — यह वही होल्डिंग कंपनी है जिसका कुल मूल्य 180 अरब डॉलर से अधिक आँका जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब टाटा संस की संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर बाज़ार में अटकलें तेज़ हैं। बोर्ड बैठक पर रोक से इन निर्णयों में देरी हो सकती है।
आगे क्या होगा
नियुक्त इंस्पेक्टर जाँच पूरी कर अपनी रिपोर्ट चैरिटी कमिश्नर को सौंपेगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। तब तक SRTT की सभी बोर्ड बैठकें स्थगित रहेंगी। यह मामला देश के सबसे बड़े परोपकारी ट्रस्टों में से एक के प्रशासनिक ढाँचे पर नज़र रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।