26 जुलाई 2026
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रिकॉर्ड मतदान पर संजय राउत का बड़ा बयान — बंगाल 92%, तमिलनाडु 85% वोटिंग मौजूदा नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश

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रिकॉर्ड मतदान पर संजय राउत का बड़ा बयान — बंगाल 92%, तमिलनाडु 85% वोटिंग मौजूदा नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने बंगाल में 92% और तमिलनाडु में 85% रिकॉर्ड मतदान को मौजूदा नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश करार दिया। एसआईआर की खामियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सही प्रक्रिया होती तो मतदान और अधिक होता।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल में लगभग 92 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84-85 प्रतिशत ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस रिकॉर्ड मतदान को मौजूदा केंद्रीय नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश करार दिया।
राउत ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए कहा कि सही प्रक्रिया होती तो मतदान और अधिक होता।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने 'मातोश्री' में उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर विधान परिषद चुनाव रणनीति पर चर्चा की।
उद्धव ठाकरे को एक बार फिर विधान परिषद में भेजने की संभावना पर महाविकास अघाड़ी में विचार-विमर्श जारी है।
राउत ने महाराष्ट्र में मराठी भाषा के सम्मान को अनिवार्य बताते हुए कहा कि इसे लेकर बनाए जाने वाले किसी भी कानून का पालन सभी को करना होगा।

रिकॉर्ड मतदान: राउत ने बताई असली वजह

मुंबई, 24 अप्रैलशिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने पश्चिम बंगाल में लगभग 92 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84 से 85 प्रतिशत मतदान होने को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड भागीदारी मौजूदा केंद्रीय नीतियों के खिलाफ आम जनता के गहरे असंतोष की अभिव्यक्ति है। उन्होंने यह बात 24 अप्रैल 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

राउत ने कहा कि तूफान जैसी विपरीत मौसमी परिस्थितियों के बावजूद लाखों मतदाताओं का घर से निकलकर वोट डालना लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सामान्य चुनावी उत्साह नहीं, बल्कि एक सुविचारित जनादेश है।

एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

संजय राउत ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एसआईआर में कई खामियां रहीं, जिसके कारण बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए। बावजूद इसके इतना अधिक मतदान हुआ — यदि प्रक्रिया सही ढंग से संपन्न होती, तो मतदान प्रतिशत और भी ऊंचा हो सकता था।

राउत के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कुछ नीतियों को लागू करने के तरीके ने भी लोगों को बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। यह सत्ताधारी दल के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।

महाविकास अघाड़ी की आंतरिक रणनीति

महाराष्ट्र की राजनीति पर बोलते हुए संजय राउत ने बताया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने 'मातोश्री' पहुंचकर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। इस बैठक में आगामी विधान परिषद चुनाव सहित गठबंधन की भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।

राउत ने संकेत दिया कि उद्धव ठाकरे को एक बार फिर विधान परिषद में भेजने की संभावना पर भी विचार-विमर्श हो रहा है। गठबंधन के भीतर समन्वय मजबूत करना और साझा रणनीति तय करना इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था।

मराठी भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा

भाषा विवाद पर संजय राउत ने स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह तमिलनाडु में तमिल और पश्चिम बंगाल में बंगाली भाषा को सम्मान मिलता है, उसी तरह महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान होना अनिवार्य है।

राउत ने कहा कि यदि राज्य में मराठी भाषा को लेकर कोई कानून बनाया जाता है, तो उसका पालन बिना किसी अपवाद के सभी को करना होगा। जो लोग महाराष्ट्र में रहकर रोजगार और सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान करें।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है — इसे सम्मान और सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने पहले भी आपत्तियां जताई हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। ऐसे में बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान का राजनीतिक संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

आने वाले दिनों में महाविकास अघाड़ी की विधान परिषद चुनाव रणनीति और उद्धव ठाकरे की उम्मीदवारी पर अंतिम निर्णय होना बाकी है, जो महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी वह तूफान में घर से निकली। विडंबना यह है कि जिस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को 'शुद्ध' करना था, उसी ने लाखों वैध मतदाताओं के नाम काटे — और जनता ने इसका जवाब मतपेटी से दिया। संजय राउत का यह बयान विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है जो आगामी चुनावों से पहले जनभावना को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। मुख्यधारा की मीडिया जहां सिर्फ आंकड़े गिन रही है, असली सवाल यह है कि एसआईआर की जवाबदेही कब तय होगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने बंगाल और तमिलनाडु के रिकॉर्ड मतदान पर क्या कहा?
संजय राउत ने बंगाल में 92% और तमिलनाडु में 85% मतदान को मौजूदा केंद्रीय नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद इतना अधिक मतदान लोकतंत्र के प्रति जनता की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
एसआईआर प्रक्रिया पर राउत ने क्या आपत्ति जताई?
राउत ने कहा कि एसआईआर में गड़बड़ियों के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उनके अनुसार यदि यह प्रक्रिया सही तरीके से होती तो मतदान प्रतिशत और भी अधिक हो सकता था।
महाविकास अघाड़ी की बैठक में क्या चर्चा हुई?
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने 'मातोश्री' में उद्धव ठाकरे से मुलाकात की, जिसमें विधान परिषद चुनाव और गठबंधन की आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। उद्धव ठाकरे को विधान परिषद भेजने की संभावना पर भी चर्चा हुई।
मराठी भाषा पर संजय राउत का क्या रुख है?
राउत ने कहा कि जैसे तमिलनाडु में तमिल और बंगाल में बंगाली का सम्मान होता है, वैसे ही महाराष्ट्र में मराठी का सम्मान अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में रहकर सुविधाएं लेने वालों को राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना होगा।
बंगाल और तमिलनाडु में इतना अधिक मतदान क्यों हुआ?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया की खामियों और कुछ नीतियों के क्रियान्वयन के तरीके से उपजे जनाक्रोश ने लोगों को बड़ी संख्या में मतदान के लिए प्रेरित किया। तूफान जैसी परिस्थितियों में भी मतदाताओं का घर से निकलना इस असंतोष की गहराई को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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