बड़ा फैसला: सोमनाथ भारती बरी, अफ्रीकी महिला मारपीट केस में 12 साल बाद मिली राहत

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बड़ा फैसला: सोमनाथ भारती बरी, अफ्रीकी महिला मारपीट केस में 12 साल बाद मिली राहत

सारांश

राउज एवेन्यू कोर्ट ने AAP नेता सोमनाथ भारती और 16 अन्य को 2014 के खिड़की एक्सटेंशन अफ्रीकी महिला मारपीट मामले में बरी कर दिया। 12 साल बाद आए इस फैसले में कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी और एफआईआर में देरी को प्रमुख आधार बनाया।

Key Takeaways

  • राउज एवेन्यू कोर्ट ने 24 अप्रैल 2025 को सोमनाथ भारती और 16 अन्य को 2014 के अफ्रीकी महिला मारपीट मामले में बरी किया।
  • फैसला ACJM नेहा मित्तल ने सुनाया; कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी और गवाहों की अनुपस्थिति को प्रमुख आधार बनाया।
  • 15-16 जनवरी 2014 की रात खिड़की एक्सटेंशन, दक्षिण दिल्ली में हुई कथित छापेमारी से यह मामला शुरू हुआ था।
  • 12 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद भारती को राहत मिली; AAP ने इसे राजनीतिक साजिश की हार बताया।
  • भारती के खिलाफ एम्स मारपीट मामले में 2021 में मिली दो साल की सजा पर उच्च न्यायालय में अपील अभी लंबित है।
  • अभियोजन पक्ष FIR दर्ज करने में हुई देरी का तर्कसंगत कारण कोर्ट को नहीं दे सका, जो फैसले का निर्णायक बिंदु बना।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता एवं पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती को 2014 के खिड़की एक्सटेंशन मामले में बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारती सहित 17 आरोपियों को अफ्रीकी मूल की महिलाओं के साथ कथित मारपीट के मामले में दोषमुक्त घोषित किया।

क्या था खिड़की एक्सटेंशन मामला?

15-16 जनवरी 2014 की मध्यरात्रि को तत्कालीन दिल्ली कानून मंत्री सोमनाथ भारती अपने समर्थकों के साथ दक्षिण दिल्ली के खिड़की एक्सटेंशन इलाके में एक मकान पर पहुंचे थे। उनका दावा था कि स्थानीय निवासियों ने उन्हें सूचित किया था कि उस इलाके में ड्रग्स और वेश्यावृत्ति का रैकेट संचालित हो रहा है और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

इस छापेमारी के दौरान युगांडा और अन्य अफ्रीकी देशों की महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट का आरोप लगा। मामले में सोमनाथ भारती और खिड़की, जहांपनाह व हौजरानी इलाके के 16 अन्य निवासियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी।

कोर्ट ने बरी करने के क्या दिए कारण?

अदालत ने स्पष्ट किया कि अफ्रीकी महिलाओं के बयान साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकते, क्योंकि वे गवाही देने के लिए अदालत में कभी उपस्थित नहीं हुईं। कोर्ट ने यह भी पाया कि भीड़ द्वारा 'गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने' का कोई ठोस साक्ष्य अभियोजन पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका।

इसके अतिरिक्त, पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को भी अभियोजन पक्ष तार्किक रूप से न्यायालय के समक्ष स्पष्ट नहीं कर पाया। इन तीनों आधारों पर कोर्ट ने सभी 17 आरोपियों को सम्मानपूर्वक बरी कर दिया।

सोमनाथ भारती और AAP की प्रतिक्रिया

सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा — "12 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद, वर्ष 2014 के प्रसिद्ध खिरकी मामले में, जिसमें मैं और खिरकी, जहांपनाह और हौजरानी के 17 अन्य निवासी शामिल थे, सभी आरोपियों को सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया है।"

आम आदमी पार्टी ने इस फैसले को राजनीतिक साजिश की हार बताते हुए स्वागत किया। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि भारती एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में स्थानीय लोगों की समस्याएं सुलझाने गए थे और उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते झूठे मामले में फंसाया गया।

सोमनाथ भारती के अन्य विवाद और कानूनी मामले

यह मामला भारती के लिए राहत का पल जरूर है, लेकिन उनका कानूनी इतिहास जटिल रहा है। 2015 में उनकी पत्नी लिपिका मित्रा ने उन पर घरेलू हिंसा, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और गर्भावस्था के दौरान कुत्ता छोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

2018 में नोएडा के एक न्यूज चैनल की एंकर ने लाइव शो के दौरान अभद्र भाषा और धमकी देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अलावा, 2016 में एम्स के सुरक्षा कर्मचारियों से मारपीट और बाड़ तोड़ने के मामले में 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दो वर्ष की सजा सुनाई थी।

व्यापक संदर्भ और राजनीतिक निहितार्थ

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अपनी राजनीतिक जमीन पुनः प्राप्त करने की कोशिश में है। 2014 का खिड़की मामला उस दौर में राष्ट्रीय सुर्खियों में छाया था जब AAP की पहली सरकार महज 49 दिन में गिरी थी और यह प्रकरण पार्टी की छवि पर बड़ा धब्बा बना था।

गौरतलब है कि भारत में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में साक्षियों का अदालत में उपस्थित न होना एक बड़ी चुनौती रही है, जिसके कारण कई मामले कमजोर पड़ जाते हैं। इस फैसले से यह सवाल भी उठता है कि क्या पुलिस ने उस समय एफआईआर में जानबूझकर देरी की, और यदि हां, तो इसके लिए जवाबदेही कब तय होगी?

आगे देखें तो सोमनाथ भारती के लिए एम्स मारपीट मामले में उच्च न्यायालय में चल रही अपील का फैसला अगला अहम पड़ाव होगा, जो उनके राजनीतिक भविष्य को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।

Point of View

लेकिन इस मामले के कई अनुत्तरित सवाल आज भी बाकी हैं — क्या पुलिस ने जानबूझकर FIR दर्ज करने में देरी की? क्या अफ्रीकी महिलाओं को गवाही के लिए अदालत में लाने की कोशिश ईमानदारी से की गई? यह मामला उस दौर का प्रतीक है जब AAP की 'अराजकता बनाम जवाबदेही' की राजनीति चरम पर थी। 12 साल बाद बरी होना भारती के लिए कानूनी राहत है, लेकिन उनके कई अन्य विवादों को देखते हुए यह उनकी राजनीतिक पुनर्वापसी की गारंटी नहीं।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

सोमनाथ भारती को किस मामले में बरी किया गया?
सोमनाथ भारती को 2014 के खिड़की एक्सटेंशन मामले में बरी किया गया, जिसमें उन पर अफ्रीकी मूल की महिलाओं के साथ मारपीट का आरोप था। राउज एवेन्यू कोर्ट की ACJM नेहा मित्तल ने यह फैसला 24 अप्रैल 2025 को सुनाया।
कोर्ट ने सोमनाथ भारती को बरी क्यों किया?
कोर्ट ने तीन प्रमुख कारणों से बरी किया — अफ्रीकी महिलाएं गवाही देने अदालत नहीं आईं, गैरकानूनी जमावड़े का कोई सबूत नहीं था, और FIR दर्ज करने में हुई देरी को अभियोजन पक्ष स्पष्ट नहीं कर सका।
खिड़की एक्सटेंशन मामला क्या था?
15-16 जनवरी 2014 की रात सोमनाथ भारती ने दक्षिण दिल्ली के खिड़की एक्सटेंशन में एक मकान पर छापा मारा था। उनका दावा था कि वहां ड्रग्स और वेश्यावृत्ति का रैकेट चल रहा था, लेकिन अफ्रीकी महिलाओं ने उन पर मारपीट का आरोप लगाया था।
क्या सोमनाथ भारती के खिलाफ अन्य मामले भी हैं?
हां, भारती के खिलाफ 2015 में पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का मामला, 2018 में न्यूज एंकर द्वारा अभद्र भाषा का मामला और 2016 के एम्स मारपीट मामले में 2021 में दो साल की सजा शामिल है। एम्स मामले में अपील अभी भी लंबित है।
AAP ने इस फैसले पर क्या कहा?
आम आदमी पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे राजनीतिक साजिश की हार बताया। पार्टी का कहना है कि भारती को एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में काम करने के बदले में झूठे मामले में फंसाया गया था।
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