52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का बड़ा लक्ष्य: CM मोहन यादव ने मध्य प्रदेश डेयरी क्षेत्र को दी नई दिशा

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52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का बड़ा लक्ष्य: CM मोहन यादव ने मध्य प्रदेश डेयरी क्षेत्र को दी नई दिशा

सारांश

मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव ने डेयरी क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य रखा — रोजाना 52 लाख KG दूध खरीद और 26,000 गांवों को डेयरी से जोड़ना। 1,752 नई सहकारी समितियां बनीं, मोबाइल ऐप से रियल टाइम निगरानी शुरू। किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल।

Key Takeaways

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 24 अप्रैल को मध्य प्रदेश राज्य सहकारी डेयरी महासंघ की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
  • राज्य सरकार ने प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • वर्तमान में केवल 9.67 लाख किलोग्राम दूध प्रतिदिन खरीदा जा रहा है, जो लक्ष्य से पांच गुना से अधिक कम है।
  • 26,000 गांवों को डेयरी गतिविधियों से जोड़ने और 1,752 नई सहकारी समितियां बनाने की योजना है।
  • इंदौर में मिल्क पाउडर प्लांट और ग्वालियर-शिवपुरी में डेयरी इकाइयों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
  • किसानों को मोबाइल ऐप के जरिए रियल टाइम में दूध का भाव और मात्रा जानने की सुविधा दी गई है।

भोपाल, 24 अप्रैल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को राज्य के डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह बदलने का संकल्प जताते हुए कहा कि सरकार प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का लक्ष्य हासिल करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। यह लक्ष्य न केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।

डेयरी महासंघ की समीक्षा बैठक में बड़े ऐलान

मध्य प्रदेश राज्य सहकारी डेयरी महासंघ की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत डेयरी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहकारी ढांचे के माध्यम से यह योजना गांव-गांव तक पहुंचाई जाएगी, ताकि किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के नए द्वार खुलें।

मुख्यमंत्री ने कहा, ''डेयरी विकास किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। सरकार सहकारी ढांचे के जरिए इसे गांव-गांव तक पहुंचाने पर काम कर रही है।''

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से साझेदारी

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ सहयोग से दूध की खरीद प्रक्रिया और किसानों को मिलने वाले दामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री यादव ने निर्देश दिए कि NDDB के अनुभव का उपयोग राज्य स्तर से लेकर ग्राम स्तरीय डेयरी समितियों तक किया जाए, ताकि कामकाज में एकरूपता और दक्षता सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए, जिसमें डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार, नई प्रोसेसिंग और उत्पाद निर्माण इकाइयों की स्थापना, पशु आहार संयंत्रों का आधुनिकीकरण और डेयरी वैल्यू चेन का डिजिटलीकरण शामिल है।

26,000 गांव और 52 लाख KG दूध खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

अधिकारियों ने बताया कि राज्य का लक्ष्य 26,000 गांवों को डेयरी गतिविधियों से जोड़ना और रोजाना दूध खरीद को 52 लाख किलोग्राम तक ले जाना है। वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन केवल 9.67 लाख किलोग्राम दूध की खरीद हो रही है, जिसे 153 बल्क मिल्क कूलर के माध्यम से संभाला जा रहा है।

यह आंकड़ा बताता है कि लक्ष्य और वर्तमान स्थिति के बीच पांच गुना से अधिक का अंतर है — यानी सरकार को अभी लंबा रास्ता तय करना है। वर्ष 2025-26 में 1,752 नई डेयरी सहकारी समितियां गठित की गई हैं, जबकि 701 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय किया गया है।

डिजिटल क्रांति: मोबाइल ऐप से रियल टाइम निगरानी

पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मोबाइल आधारित दूध खरीद प्रणाली शुरू की है। इस प्रणाली के तहत किसान दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी रियल टाइम में अपने मोबाइल पर देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, फील्ड स्तर पर निगरानी के लिए फील्ड फोर्स मॉनिटरिंग ऐप भी लॉन्च किया गया है।

दूध की गुणवत्ता और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए इंदौर में मिल्क पाउडर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। साथ ही शिवपुरी और ग्वालियर की डेयरी इकाइयों का भी उन्नयन किया जा रहा है।

ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री यादव ने दूध और डेयरी उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए ब्रांडिंग को मजबूत करने और आधुनिक पैकेजिंग अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि NDDB के अनुभव का सही उपयोग, बेहतर ब्रांडिंग और पैकेजिंग के साथ मिलकर डेयरी उत्पादों की पहुंच राज्य से बाहर भी बढ़ाने में सहायक होगा।

किसानों और युवाओं को आधुनिक डेयरी तकनीकों और नवाचार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की भी बात कही गई। यह पहल न केवल ग्रामीण रोजगार बढ़ाएगी, बल्कि मध्य प्रदेश को डेयरी उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने की नींव रखेगी।

आने वाले महीनों में सरकार की कार्ययोजना की प्रगति और नई समितियों के संचालन पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि 52 लाख किलोग्राम का लक्ष्य तभी संभव होगा जब जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन तेज और पारदर्शी हो।

Point of View

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी केवल 9.67 लाख किलोग्राम खरीद हो रही है — यानी लक्ष्य से पांच गुना से अधिक पीछे। सवाल यह है कि बिना पर्याप्त कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर और पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के, केवल सहकारी समितियां बनाने से यह अंतर कैसे पाटा जाएगा? गुजरात का अमूल मॉडल दशकों की मेहनत और किसान विश्वास पर टिका है — मध्य प्रदेश को उस रास्ते पर चलने के लिए घोषणाओं से आगे जाकर क्रियान्वयन की जवाबदेही तय करनी होगी।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश में प्रतिदिन दूध खरीद का लक्ष्य कितना है?
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में राज्य में रोजाना करीब 9.67 लाख किलोग्राम दूध की खरीद हो रही है।
मध्य प्रदेश डेयरी सेक्टर में कितनी नई सहकारी समितियां बनाई गई हैं?
वर्ष 2025-26 में 1,752 नई डेयरी सहकारी समितियां गठित की गई हैं। इसके अलावा 701 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय किया गया है।
मध्य प्रदेश में डेयरी किसानों के लिए कौन सी नई तकनीक लाई गई है?
सरकार ने मोबाइल आधारित दूध खरीद प्रणाली शुरू की है जिससे किसान रियल टाइम में दूध की मात्रा, गुणवत्ता और कीमत देख सकते हैं। फील्ड फोर्स मॉनिटरिंग ऐप भी लॉन्च किया गया है।
मध्य प्रदेश में डेयरी विकास के लिए कौन से नए प्लांट लगाए जा रहे हैं?
इंदौर में मिल्क पाउडर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। शिवपुरी और ग्वालियर की डेयरी इकाइयों का भी उन्नयन किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार का डेयरी सेक्टर में क्या उद्देश्य है?
सरकार का उद्देश्य 26,000 गांवों को डेयरी गतिविधियों से जोड़ना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना प्राथमिक लक्ष्य है।
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