8 अगस्त 2026
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सेंसेक्स-निफ्टी लगातार दूसरे हफ्ते हरे निशान पर, कच्चे तेल की गिरावट और Q1 नतीजों ने दिया सहारा

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सेंसेक्स-निफ्टी लगातार दूसरे हफ्ते हरे निशान पर, कच्चे तेल की गिरावट और Q1 नतीजों ने दिया सहारा

सारांश

कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और Q1 के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों ने भारतीय बाजार को लगातार दूसरे हफ्ते हरे निशान पर रखा। स्मॉलकैप 2.73% उछला, सेंसेक्स साप्ताहिक 0.52% मजबूत — RBI के सकारात्मक संकेत और फेड की नरमी ने निवेशकों का भरोसा और पक्का किया।

मुख्य बातें

सेंसेक्स सप्ताह में 0.52% चढ़कर 78,499 पर बंद; शुक्रवार को 455 अंक की गिरावट।
निफ्टी 50 साप्ताहिक 0.77% मजबूत, 24,570 पर बंद।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 सप्ताह में 2.73% उछला — सबसे बेहतर प्रदर्शन।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और Q1 2026-27 के बेहतर कॉरपोरेट नतीजे मुख्य चालक रहे।
RBI ने मौद्रिक नीति अपरिवर्तित रखी, GDP अनुमान बढ़ाया और महंगाई अनुमान घटाया।
अमेरिकी फेड द्वारा दर वृद्धि की संभावना कम होने से उभरते बाजारों में निवेश माहौल अनुकूल।

भारतीय शेयर बाजार ने 8 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में लगातार दूसरी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की, जिसमें कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र गिरावट और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों ने निर्णायक भूमिका निभाई। हालाँकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मुनाफावसूली के दबाव में प्रमुख सूचकांक फिसले, साप्ताहिक आधार पर दोनों बेंचमार्क सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुए।

साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े

निफ्टी 50 ने सप्ताह भर में 0.77 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, लेकिन शुक्रवार को 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,570 के स्तर पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार को 455 अंक यानी 0.58 प्रतिशत टूटकर 78,499 पर आ गया, फिर भी पूरे सप्ताह में इसने 0.52 प्रतिशत की बढ़त बनाए रखी।

व्यापक बाजार ने मुख्य सूचकांकों को पीछे छोड़ा। निफ्टी मिडकैप 100 सप्ताह में 0.87 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने 2.73 प्रतिशत की जोरदार छलाँग लगाई — यह संकेत देता है कि निवेशकों का रुझान लार्जकैप के साथ-साथ मिड और स्मॉलकैप कंपनियों की ओर भी बढ़ रहा है।

कौन से सेक्टर रहे आगे

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉलकैप शेयर इस सप्ताह के सबसे बड़े विजेता रहे। मजबूत तिमाही परिणामों और कंपनी-स्तरीय सकारात्मक घटनाक्रमों ने इस श्रेणी में निवेशकों की रुचि बनाए रखी। पीएसयू बैंकिंग शेयरों में बेहतर बुनियादी स्थिति और ठोस वित्तीय प्रदर्शन के चलते अच्छी खरीदारी देखी गई।

मेटल सेक्टर को घरेलू माँग में मजबूती और आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं का फायदा मिला। ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयर भी तेजी में रहे, क्योंकि बाजार को आगामी त्योहारी सीजन में वाहनों की माँग मजबूत रहने की उम्मीद है।

बाजार को मिला वैश्विक और घरेलू सहारा

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की धारणा को सबसे बड़ा सहारा कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से मिला। तेल सस्ता होने से भारत की महंगाई और आयात लागत संबंधी चिंताएँ कम हुई हैं, जिससे समग्र आर्थिक परिदृश्य बेहतर हुआ।

वैश्विक स्तर पर, अमेरिका के श्रम बाजार के अपेक्षाकृत नरम आँकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कमजोर पड़ी है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में नरमी आई, जिसने उभरते बाजारों — विशेषकर भारत — के लिए निवेश माहौल अनुकूल बनाया।

घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया, साथ ही GDP वृद्धि दर का अनुमान थोड़ा बढ़ाया और महंगाई का अनुमान कुछ घटाया। इस कदम ने यह संदेश दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर टिकी है।

F&O में नई व्यवस्था से शुरुआती उतार-चढ़ाव

सप्ताह की शुरुआत कुछ अस्थिरता के साथ हुई, जिसका कारण फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) व्यवस्था का लागू होना था। हालाँकि बाजार प्रतिभागियों के इस नई प्रणाली के अनुरूप ढलने के बाद स्थिरता लौट आई और बाजार ने सकारात्मक रुख बनाए रखा।

आगे क्या होगा

आने वाले सप्ताहों में बाजार की नजर अमेरिका के रोजगार और महंगाई आँकड़ों पर रहेगी, जो फेडरल रिज़र्व की नीतिगत दिशा के संकेत देंगे। घरेलू स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और बैंक ऋण वृद्धि के आँकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और महंगाई के रुख को समझने के लिए अहम होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और कॉरपोरेट नतीजे मजबूत बने रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि निफ्टी की 0.77% की साप्ताहिक बढ़त मुख्यतः बाहरी कारकों — कच्चे तेल की गिरावट और फेड की नरमी — पर टिकी है, न कि किसी घरेलू संरचनात्मक सुधार पर। स्मॉलकैप का 2.73% उछाल जहाँ खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी दर्शाता है, वहीं यह अतिमूल्यांकन के जोखिम की भी याद दिलाता है जो 2024-25 में स्मॉलकैप करेक्शन का कारण बना था। F&O में CAS व्यवस्था से शुरुआती अस्थिरता यह भी बताती है कि नियामकीय बदलावों को बाजार में पचाने में समय लगता है। असली परीक्षा तब होगी जब CPI और WPI आँकड़े आएँगे — यदि महंगाई फिर ऊपर जाती है, तो RBI की नरम मुद्रा का यह माहौल लंबे समय तक नहीं टिकेगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन कैसा रहा?
सेंसेक्स ने सप्ताह में 0.52% की बढ़त के साथ 78,499 पर और निफ्टी ने 0.77% की बढ़त के साथ 24,570 पर कारोबार समाप्त किया। हालाँकि शुक्रवार को मुनाफावसूली के कारण दोनों सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह बढ़त के मुख्य कारण क्या रहे?
कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र गिरावट और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजे मुख्य कारण रहे। इसके अलावा RBI की अनुकूल मौद्रिक नीति और अमेरिकी फेड द्वारा दर वृद्धि की घटती संभावना ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
इस सप्ताह स्मॉलकैप शेयरों ने इतना बेहतर प्रदर्शन क्यों किया?
निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स सप्ताह में 2.73% उछला, जो मुख्य सूचकांकों से काफी बेहतर रहा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत तिमाही नतीजों और कंपनी-स्तरीय सकारात्मक घटनाक्रमों ने इस श्रेणी में निवेशकों की रुचि बनाए रखी।
RBI की मौद्रिक नीति का बाजार पर क्या असर पड़ा?
RBI ने मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया और GDP वृद्धि दर का अनुमान थोड़ा बढ़ाते हुए महंगाई का अनुमान कम किया। इससे निवेशकों को यह संकेत मिला कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत बनी हुई है, जिसने बाजार की धारणा को सकारात्मक रखा।
आने वाले हफ्तों में भारतीय बाजार किन कारकों पर निर्भर करेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की नजर अमेरिका के रोजगार और महंगाई आँकड़ों पर रहेगी, जो फेड की नीतिगत दिशा तय करेंगे। घरेलू स्तर पर CPI, WPI और बैंक ऋण वृद्धि के आँकड़े तथा कच्चे तेल की कीमतों का रुख बाजार की आगे की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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