निफ्टी-सेंसेक्स लगातार तीसरे सप्ताह लुढ़के, साप्ताहिक आधार पर 0.36% तक की गिरावट; IT शेयरों ने थामा बाजार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार ने 29 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में लगातार तीसरी बार साप्ताहिक गिरावट दर्ज की — वैश्विक ब्याज दरों की अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सतर्कता के संयुक्त दबाव में। निफ्टी 50 साप्ताहिक आधार पर 0.31 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि बीएसई सेंसेक्स में 0.36 प्रतिशत की गिरावट आई — हालाँकि सप्ताह के अंतिम सत्र में दोनों सूचकांकों ने मजबूत वापसी की।
साप्ताहिक प्रदर्शन: संख्याओं में तस्वीर
शुक्रवार को निफ्टी 50 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,175 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स अंतिम सत्र में 330 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 77,264 अंक पर बंद हुआ। बावजूद इसके, पूरे सप्ताह का हिसाब नकारात्मक रहा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
IT क्षेत्र की चमक, बैंकिंग पर दबाव
शुक्रवार को आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखी गई। वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र से सकारात्मक संकेतों और एनवीडिया के बेहतर तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स सप्ताह भर में लगभग 2.45 प्रतिशत मजबूत हुआ और यह सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इसके विपरीत, चुनिंदा बैंकिंग और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी बनी रही। दवा और कुछ धातु कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की रुचि दर्ज हुई।
एफएंडओ क्लोजिंग ऑक्शन और बाजार की अस्थिरता
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वायदा एवं विकल्प (F&O) शेयरों में क्लोजिंग ऑक्शन सत्र (CAS) लागू किए जाने से जुड़ी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दौरान कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और मूल्य विसंगतियों की चिंता ने विशेषकर बड़े शेयरों में अल्पकालिक दबाव बढ़ाया। गौरतलब है कि यह व्यवस्था अपेक्षाकृत नई है और बाजार अभी इसके साथ तालमेल बैठा रहा है।
जैक्सन होल और वैश्विक संकेत
बाजार की दिशा पर सबसे बड़ा प्रभाव अमेरिका से आए संकेतों का रहा। जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष की टिप्पणियों के बाद निवेशक भविष्य की ब्याज दर नीति को लेकर सतर्क बने रहे। बाजार अब इस संभावना का आकलन कर रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक पहले की तुलना में कम उदार मौद्रिक नीति अपना सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी मुद्रास्फीति और बॉन्ड यील्ड को लेकर बढ़ती अनिश्चितता उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।
कच्चे तेल में नरमी से राहत, लेकिन जोखिम बरकरार
इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में सुधार की उम्मीदों ने ऊर्जा बाजार में नरमी लाई, जिससे ऊर्जा-निर्भर उद्योगों को कुछ राहत मिली। हालाँकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव अभी भी ऊँचे स्तर पर है और किसी भी नई आपूर्ति बाधा की स्थिति में कीमतें फिर तेज हो सकती हैं।
तकनीकी स्तर और आगे की राह
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,000–23,800 अंक का क्षेत्र निकटतम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,300–24,400 अंक पर प्रमुख रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 56,900–56,500 अंक सपोर्ट और 57,800–58,000 अंक रेजिस्टेंस बताया जा रहा है। आने वाले सप्ताह में भारत के GDP आँकड़े और 4 सितंबर को जारी होने वाली अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट बाजार की अगली दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।