नागेंद्र इस्तीफा विवाद: कर्नाटक BJP के आर. अशोक का कांग्रेस पर पलटवार — 'दलित अधिकारी चंद्रशेखर को न्याय कब मिलेगा?'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 29 अगस्त को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। यह प्रतिक्रिया उन कांग्रेस आरोपों के जवाब में आई, जिनमें कहा गया था कि BJP योजना एवं सांख्यिकी विभाग के पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र — जो एक दलित नेता हैं — को राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है। अशोक ने सीधा सवाल दागा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के विरोध में आत्महत्या करने वाले दलित अधिकारी चंद्रशेखर के परिवार को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी कांग्रेस क्यों नहीं ले रही।
चंद्रशेखर प्रकरण: विवाद की जड़
अशोक ने बताया कि अधिकारी चंद्रशेखर की आत्महत्या के बाद मिले सुसाइड नोट से कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर के परिवार ने न्याय की माँग को लेकर सड़कों पर उतरने का निर्णय किया है, फिर भी कांग्रेस नेता इस पीड़ित परिवार की पीड़ा को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
अशोक ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने मृत्यु से पूर्व जिन लोगों के नाम लिए, उनमें से कई स्वयं दलित समुदाय से थे। उन्होंने कहा, 'चंद्रशेखर एक ईमानदार अधिकारी थे।'
BJP का केंद्रीय तर्क: 'अमीर दलित को न्याय, गरीब दलित को नहीं?'
अशोक ने कांग्रेस की स्थिति पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, 'कांग्रेस के मुताबिक, दलित मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा मंज़ूर नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चंद्रशेखर जैसे दलित अधिकारी की आत्महत्या से मौत हो सकती है।' उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर कोई दलित गरीब है तो उसे न्याय नहीं मिलना चाहिए, लेकिन अगर वह अमीर है तो उसे न्याय मिलना चाहिए — क्या बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने हमें यही सिखाया था?'
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार वाल्मीकि आदिवासी कल्याण निगम घोटाले को लेकर विपक्ष के निरंतर दबाव में है। गौरतलब है कि BJP और जनता दल (सेक्युलर) — JD(S) — ने विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था।
घोटाले की रकम पर विवाद और SIT पर आरोप
अशोक ने याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में इस मुद्दे पर लगभग ढाई घंटे तक बात की थी, तब उन्होंने स्वयं कहा था कि इसमें शामिल रकम ₹187 करोड़ नहीं, बल्कि ₹84 करोड़ थी। अशोक ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जाँच दल (SIT) पर घोटाले को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में नागेंद्र की भूमिका की पहचान की है और नागेंद्र का नाम कई चार्जशीट में दर्ज है।
BJP विधायक रेड्डी की प्रतिक्रिया
BJP विधायक रेड्डी ने नागेंद्र की उन टिप्पणियों की आलोचना की जिनमें उन्होंने अपनी बेगुनाही का दावा किया था। रेड्डी ने कहा कि यदि नागेंद्र वास्तव में निर्दोष हैं, तो उन्हें केवल दावे करने के बजाय ठोस सबूत प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ED के पास अपने कड़े नियम हैं और कोई भी उसकी जाँच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकता।
नागेंद्र का इस्तीफा और पृष्ठभूमि
शुक्रवार, 28 अगस्त को मंत्री बी. नागेंद्र ने कैबिनेट से इस्तीफे की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वह इसलिए पद छोड़ रहे हैं ताकि वाल्मीकि आदिवासी कल्याण निगम घोटाले से जुड़े विवाद के कारण कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को शर्मिंदगी न उठानी पड़े। नागेंद्र ने BJP पर दलित नेताओं को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। इस घोटाले में दलित और आदिवासी कल्याण के लिए आवंटित सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला है, जो चंद्रशेखर के सुसाइड नोट के सामने आने के बाद से सुर्खियों में है।
यह मामला कर्नाटक की राजनीति में सामाजिक न्याय की बहस को नए आयाम दे रहा है — आने वाले दिनों में ED की जाँच और SIT की रिपोर्ट इस विवाद की दिशा तय करेंगी।