पटना में गंगा का जलस्तर घटा पर खतरे के निशान से ऊपर, 500 से अधिक दुकानें अभी भी जलमग्न
सारांश
मुख्य बातें
पटना में गंगा नदी का जलस्तर 29 अगस्त को धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन बाढ़ नियंत्रण विभाग के आंकड़ों के अनुसार यह अभी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। निचले इलाकों और नदी किनारे की बस्तियों में पानी जमा होने से हज़ारों लोग प्रभावित हैं और 500 से अधिक दुकानें जलमग्न हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में मनेर में गंगा का जलस्तर 16 सेमी घटकर 52.12 मीटर पर आ गया है, फिर भी यह 52 मीटर के खतरे के निशान से 12 सेमी ऊपर है। दीघा घाट पर भी जलस्तर लगभग 52.12 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे की सीमा के करीब है।
गांधी घाट पर पिछले तीन दिनों में जलस्तर में लगभग 30 सेमी की कमी आई है, लेकिन यह 49.28 मीटर पर है — 48.60 मीटर के खतरे के निशान से 68 सेमी ऊपर।
व्यापारियों पर असर
जेपी गंगा पथ — जिसे मरीन ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है — के किनारे सैकड़ों दुकानें बाढ़ की चपेट में आई हैं। दीघा घाट के पास बाढ़ का पानी ज़मीन के अंदर लगभग 500 मीटर तक फैल गया है, जिससे सड़क किनारे की 500 से अधिक दुकानें प्रभावित हुई हैं। कई दुकानदारों को अपना सामान और वाहन सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ व्यापारियों ने सामान डूबने से हुए नुकसान की बात कही है, जबकि अन्य वैकल्पिक जगहों की तलाश में हैं।
पटना नगर निगम ने स्वीकार किया है कि मरीन ड्राइव के प्रभावित दुकानदारों के लिए अभी तक कोई विशेष निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
अन्य नदियों की स्थिति
कोइलवर में सोन नदी का जलस्तर 52.80 मीटर दर्ज किया गया, जो 55.52 मीटर के खतरे के निशान से काफी नीचे है और लगातार घट रहा है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर 49.10 मीटर था, जो 50.60 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 1.50 मीटर नीचे है।
हालांकि, अरवल के किंजर में जलस्तर बढ़ने के कारण अधिकारियों को दक्षिणी पटना के निचले इलाकों में सतर्कता बरतनी पड़ रही है। मोकामा में गंगा के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
दानापुर के नदी किनारे वाले इलाकों में अभी भी पानी जमा है, लेकिन जलस्तर में गिरावट से निकासी में मदद मिल रही है। बख्तियारपुर में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। प्रशासन सोन और पुनपुन नदियों पर भी कड़ी निगरानी बनाए हुए है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसून का मौसम अभी जारी है और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति पर जलस्तर की दिशा निर्भर करती है। गौरतलब है कि पटना में गंगा का जलस्तर कई बिंदुओं पर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है, इसलिए राहत आंशिक ही मानी जा सकती है। प्रशासन की सतर्कता और नदियों की निगरानी आने वाले दिनों में निर्णायक होगी।