बिहार में कम बारिश के बावजूद गंगा-कोसी समेत 7 नदियाँ उफान पर, कई जिलों में बाढ़ का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में 22 अगस्त 2026 को एक असामान्य स्थिति सामने आई है — इस वर्ष अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने के बावजूद गंगा, सोन, गंडक, कोसी, घाघरा, बूढ़ी गंडक और बागमती नदियाँ कई स्थानों पर खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की चिंता बढ़ गई है और राज्य के कई जिलों में बाढ़ का संकट गहराता दिख रहा है।
पटना में गंगा का जलस्तर: घाट-दर-घाट स्थिति
पटना में गंगा नदी गांधी घाट, दीघा घाट और हाथीदह — तीनों स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 6 बजे गांधी घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। दीघा घाट पर यह 8 सेंटीमीटर और हाथीदह में 46 सेंटीमीटर ऊपर था।
अगले दिन सुबह तक दीघा घाट के जलस्तर में 13 सेंटीमीटर और हाथीदह में 20 सेंटीमीटर की और वृद्धि का अनुमान जताया गया है। बक्सर में गंगा खतरे के निशान से 104 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन अगले दिन दोपहर तक 32 सेंटीमीटर बढ़ने की आशंका है। मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 110 सेंटीमीटर और भागलपुर में 95 सेंटीमीटर नीचे दर्ज की गई। कहलगांव में स्थिति सबसे नाज़ुक है — गंगा वहाँ खतरे के निशान से महज 2 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
मुंगेर में चंडिका मंदिर परिसर में घुसा बाढ़ का पानी
मुंगेर में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब धार्मिक स्थलों तक पहुँच गया है। प्रसिद्ध चंडिका स्थान मंदिर परिसर में देर शाम बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया, जिससे आसपास के निवासियों में भय और चिंता का माहौल है। यह पहली बार नहीं है जब मुंगेर के तटवर्ती इलाकों को गंगा के उफान का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इस वर्ष कम बारिश के बावजूद इतनी तेज़ वृद्धि विशेषज्ञों को भी चिंतित कर रही है।
अन्य प्रमुख नदियों की स्थिति
सोन नदी पटना जिले के गनेर में खतरे के निशान से 1 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। घाघरा नदी सिवान के दरौली में खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर है, हालाँकि अगले दिन सुबह तक 10 सेंटीमीटर कमी का अनुमान है।
गंडक नदी गोपालगंज के डुमरियाघाट में खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर ऊपर है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से 8 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन अगले दिन तक 14 सेंटीमीटर वृद्धि का अनुमान है। कोसी नदी खगड़िया के बलतारा में खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कटिहार के कुरसेला में जलस्तर खतरे के निशान से 6 सेंटीमीटर नीचे है, पर अगले दिन तक 38 सेंटीमीटर वृद्धि की आशंका जताई गई है। सुपौल के बसुआ में कोसी अभी 96 सेंटीमीटर नीचे है। मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर नीचे दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी और निगरानी
मौसम विभाग के अनुसार 23 अगस्त तक नॉर्थ कोयल और कन्हार के जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की से सामान्य वर्षा तथा राज्य के अन्य जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की बारिश होने की संभावना है। ऐसे में नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है। यह स्थिति इस बात की याद दिलाती है कि बिहार में बाढ़ का संकट केवल स्थानीय वर्षा पर नहीं, बल्कि नेपाल और उत्तर भारत के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश पर भी निर्भर करता है।
आने वाले दिनों में जलस्तर की प्रवृत्ति यह तय करेगी कि कितने और जिले बाढ़ की चपेट में आते हैं और राहत-बचाव की तैयारियाँ किस स्तर तक बढ़ानी होंगी।