3 सितंबर 2026
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बिहार बाढ़: कोसी समेत 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, 13 जिलों में हाहाकार

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बिहार बाढ़: कोसी समेत 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, 13 जिलों में हाहाकार

सारांश

बिहार में एक साथ 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर — यह सिर्फ मानसून की बाढ़ नहीं, बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली त्रासदी है। 13 जिले प्रभावित, पटना में गंगा 127 सेमी ऊपर, और सोन में 5.54 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। 100 लोग द्वीपों पर फंसे, 12 नौकाएं तैनात।

मुख्य बातें

3 सितंबर 2026 को बिहार में गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा — आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर।
13 जिले बाढ़ से प्रभावित: दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगुसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर।
पटना के गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 127 सेंटीमीटर ऊपर; दीघा घाट पर 61 सेंटीमीटर ऊपर।
इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी में 5.54 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया।
रोहतास के नौहट्टा में लगभग 100 लोग नदी के द्वीपों पर फंसे; 12 सरकारी नौकाएं और 200 ट्रैक्टर राहत कार्य में तैनात।
आपदा प्रबंधन विभाग ने फसल, पशुधन और घरों के नुकसान का आकलन शुरू किया।

बिहार में बाढ़ की स्थिति 3 सितंबर 2026 को और गंभीर हो गई, जब गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा — ये आठ प्रमुख नदियां एक साथ खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। 13 जिलों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है और पटना प्रशासन हाई अलर्ट पर है।

पटना में जलस्तर की स्थिति

पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 127 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि दीघा घाट पर यह 61 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2.01 मीटर ऊपर बह रही है, जिससे आसपास के घरों में पानी घुस गया है। इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी में 5.54 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के नदी तटीय क्षेत्रों में पानी तेजी से फैल गया है।

राज्यभर में बाढ़ का फैलाव

समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर है। हाथीदाह, कहलगांव और मुंगेर में भी गंगा चेतावनी स्तर पार कर चुकी है।

भागलपुर में गंगा के किनारे हो रहे भीषण कटाव ने राघोपुर-काजीकोरिया तटबंध और रेलवे के बांध की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। बांध की सुरक्षा के लिए अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए लगभग 200 ट्रैक्टर और 3 स्टीमर रेत की बोरियां पहुंचाने में लगाए गए हैं।

रोहतास के नौहट्टा में सोन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण लगभग 100 लोग नदी के छोटे द्वीपों पर फंसे हैं, जहां वे कृषि कार्यों में लगे थे। अधिकारी उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटे हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए 12 सरकारी नौकाएं तैनात की गई हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें फसलों, पशुधन और घरों को हुए नुकसान का आकलन शामिल होगा। यह कदम पात्र परिवारों को शीघ्र राहत सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अधिकारी नदी के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं। गौरतलब है कि बिहार में हर वर्ष मानसून के दौरान इन्हीं नदियों के कारण बड़े पैमाने पर तबाही होती है, और यह स्थिति उस दीर्घकालिक भौगोलिक संकट की पुनरावृत्ति है जिसका स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकाला जा सका है।

प्रभावित जिले

बाढ़ से प्रभावित 13 जिलों में दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगुसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर शामिल हैं।

आगे की स्थिति

राज्यभर में बाढ़ की स्थिति लगातार बदल रही है। यह ऐसे समय में आई है जब खरीफ फसलों की कटाई का मौसम नजदीक है, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। प्रशासन का ध्यान अभी राहत और बचाव पर केंद्रित है, लेकिन नुकसान के आकलन के बाद पुनर्वास की चुनौती भी सामने आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिले डूबते हैं, नौकाएं तैनात होती हैं और फिर सब भूल जाते हैं। इस बार एक साथ 8 नदियों का खतरे के निशान से ऊपर जाना और 13 जिलों का प्रभावित होना दर्शाता है कि बाढ़ नियंत्रण के दीर्घकालिक उपाय अभी भी कागजों तक सीमित हैं। भागलपुर में तटबंध और रेलवे बांध की सुरक्षा के लिए 200 ट्रैक्टर लगाना तात्कालिक राहत है, स्थायी समाधान नहीं। असली सवाल यह है कि नुकसान के आकलन के बाद राहत राशि वास्तव में प्रभावित परिवारों तक कितनी जल्दी और पूरी पहुंचती है — यह परीक्षा हर साल अधूरी रह जाती है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में इस समय कौन-सी नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं?
3 सितंबर 2026 को गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा — ये आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें पटना के गांधी घाट पर गंगा सबसे अधिक 127 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई है।
बिहार बाढ़ 2026 से कौन-से जिले प्रभावित हैं?
कुल 13 जिले प्रभावित हैं — दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगुसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर। इन जिलों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
पटना में बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर है?
पटना में गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 127 सेंटीमीटर और दीघा घाट पर 61 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी 2.01 मीटर ऊपर है और आसपास के घरों में पानी घुस रहा है।
बाढ़ राहत के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 12 सरकारी नौकाएं तैनात की हैं। भागलपुर में तटबंध सुरक्षा के लिए 200 ट्रैक्टर और 3 स्टीमर लगाए गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने फसल, पशुधन और घरों के नुकसान का आकलन शुरू किया है ताकि पात्र परिवारों को शीघ्र राहत मिल सके।
रोहतास में नदी के द्वीपों पर फंसे लोगों का क्या हाल है?
रोहतास के नौहट्टा में सोन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण लगभग 100 लोग नदी के छोटे द्वीपों पर फंसे हैं, जो वहां कृषि कार्यों में लगे थे। अधिकारी उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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