गंगा नदी बिहार में उच्चतम बाढ़ स्तर पार करने की कगार पर, 8 जिलों के लिए आपदा विभाग का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर को गंगा नदी के तेज़ी से बढ़ते जलस्तर को लेकर आपातकालीन अलर्ट जारी किया है। जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गुरुवार रात और हाथीदह (मोकामा) में 4 सितंबर की दोपहर गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को तत्काल सतर्क रहने की अपील की गई है।
कौन-से जिले हैं खतरे में
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, गंगा के जलस्तर में संभावित उछाल से भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद — कुल 8 जिलों के नदी तटीय और निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए और किसी भी प्रकार का जोखिम न लिया जाए।
विभाग की प्रमुख सलाह
आपदा प्रबंधन विभाग ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को नदी, घाट, तटबंध और जलभराव वाले निचले इलाकों में अनावश्यक रूप से न जाने की चेतावनी दी है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को ऐसे क्षेत्रों से दूर रखने की अपील की गई है। नदी में स्नान, तैराकी और नाव से अनावश्यक आवाजाही से बचने को भी कहा गया है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सेल्फी लेने या अन्य जोखिमपूर्ण गतिविधियों में शामिल न होने की कड़ी चेतावनी दी गई है।
आम जनता पर असर और तैयारी
विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सलाह दी है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेज़, दवाइयाँ, मोबाइल फोन, टॉर्च और पीने का पानी सुरक्षित तथा आसानी से ले जाने योग्य रखें। प्रशासन द्वारा चिन्हित सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की जानकारी पहले से रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल वहाँ जाने की हिदायत दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसून का दबाव चरम पर है और गंगा की सहायक नदियाँ भी उफान पर हैं।
अफवाहों से बचें, आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर बचाव दल के निर्देशों का तत्काल पालन करना अनिवार्य बताया गया है।
गौरतलब है कि बिहार में गंगा प्रतिवर्ष मानसून के दौरान खतरे के निशान को पार करती है और लाखों लोग विस्थापित होते हैं। इस बार जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान पहले से जारी होने से प्रशासन की तैयारी अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है।