3 सितंबर 2026
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गंगा नदी बिहार में उच्चतम बाढ़ स्तर पार करने की कगार पर, 8 जिलों के लिए आपदा विभाग का अलर्ट

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गंगा नदी बिहार में उच्चतम बाढ़ स्तर पार करने की कगार पर, 8 जिलों के लिए आपदा विभाग का अलर्ट

सारांश

गंगा नदी बिहार में उच्चतम बाढ़ स्तर पार करने की कगार पर है — पटना के गांधी घाट और हाथीदह दोनों खतरे में हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने 8 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है और लाखों लोगों को तत्काल सावधानी बरतने की अपील की है।

मुख्य बातें

आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर को गंगा के बढ़ते जलस्तर पर आपातकालीन अलर्ट जारी किया।
पटना के गांधी घाट पर गुरुवार रात और हाथीदह (मोकामा) में 4 सितंबर की दोपहर जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर पार कर सकता है।
भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद — 8 जिले खतरे की जद में।
नदी, घाट, तटबंध और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सख्त हिदायत।
आपात स्थिति में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से संपर्क करने की अपील।

बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर को गंगा नदी के तेज़ी से बढ़ते जलस्तर को लेकर आपातकालीन अलर्ट जारी किया है। जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गुरुवार रात और हाथीदह (मोकामा) में 4 सितंबर की दोपहर गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को तत्काल सतर्क रहने की अपील की गई है।

कौन-से जिले हैं खतरे में

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, गंगा के जलस्तर में संभावित उछाल से भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद — कुल 8 जिलों के नदी तटीय और निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए और किसी भी प्रकार का जोखिम न लिया जाए।

विभाग की प्रमुख सलाह

आपदा प्रबंधन विभाग ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को नदी, घाट, तटबंध और जलभराव वाले निचले इलाकों में अनावश्यक रूप से न जाने की चेतावनी दी है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को ऐसे क्षेत्रों से दूर रखने की अपील की गई है। नदी में स्नान, तैराकी और नाव से अनावश्यक आवाजाही से बचने को भी कहा गया है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सेल्फी लेने या अन्य जोखिमपूर्ण गतिविधियों में शामिल न होने की कड़ी चेतावनी दी गई है।

आम जनता पर असर और तैयारी

विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सलाह दी है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेज़, दवाइयाँ, मोबाइल फोन, टॉर्च और पीने का पानी सुरक्षित तथा आसानी से ले जाने योग्य रखें। प्रशासन द्वारा चिन्हित सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की जानकारी पहले से रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल वहाँ जाने की हिदायत दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसून का दबाव चरम पर है और गंगा की सहायक नदियाँ भी उफान पर हैं।

अफवाहों से बचें, आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें

आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर बचाव दल के निर्देशों का तत्काल पालन करना अनिवार्य बताया गया है।

गौरतलब है कि बिहार में गंगा प्रतिवर्ष मानसून के दौरान खतरे के निशान को पार करती है और लाखों लोग विस्थापित होते हैं। इस बार जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान पहले से जारी होने से प्रशासन की तैयारी अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इस बार अलर्ट समय पर जारी हुआ है, जो सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि राहत शिविरों की क्षमता और बचाव दल की तैनाती 8 जिलों की ज़रूरत के अनुरूप है या नहीं। तटबंध निर्माण और नदी प्रबंधन पर वर्षों से खर्च होने वाले करोड़ों रुपयों के बावजूद हर मानसून में लाखों लोग विस्थापित होते हैं — यह जवाबदेही का सवाल है जिसका जवाब केवल अलर्ट जारी करने से नहीं मिलता।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में गंगा का जलस्तर कब और कहाँ उच्चतम बाढ़ स्तर पार कर सकता है?
जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पटना के गांधी घाट पर गुरुवार रात और हाथीदह (मोकामा) में 4 सितंबर की दोपहर गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। यह पूर्वानुमान आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अलर्ट का आधार है।
बिहार के किन जिलों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है?
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद — कुल 8 जिले — गंगा के बढ़ते जलस्तर से सर्वाधिक प्रभावित हो सकते हैं। इन जिलों के नदी तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।
बाढ़ की स्थिति में लोगों को क्या करना चाहिए?
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को नदी, घाट और निचले इलाकों से दूर रहने, आवश्यक दस्तावेज़ और सामान तैयार रखने तथा प्रशासन द्वारा चिन्हित राहत शिविरों की जानकारी पहले से लेने की सलाह दी है। आपात स्थिति में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से तत्काल संपर्क करना चाहिए।
क्या नदी में नाव चलाना या स्नान करना सुरक्षित है?
नहीं। आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट रूप से नदी में स्नान, तैराकी और नाव से अनावश्यक आवाजाही से बचने की चेतावनी दी है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सेल्फी लेने या जोखिमपूर्ण गतिविधियों में शामिल होना भी सख्त मना है।
बाढ़ की सही जानकारी के लिए किस पर भरोसा करें?
आपदा प्रबंधन विभाग ने अफवाहों से बचने और केवल जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से संपर्क किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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