सोनू निगम ने रफी मेंशन में बजाया मोहम्मद रफी का हारमोनियम, गाया 'दीवाना हुआ बादल'; सचिन और सलीम मर्चेंट रहे साथ
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के बांद्रा स्थित रफी मेंशन में 3 सितंबर 2026 को एक भावुक और ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब मशहूर गायक सोनू निगम ने स्वर-सम्राट मोहम्मद रफी के उसी हारमोनियम पर उनका कालजयी गीत 'दीवाना हुआ बादल' गाया, जिसे रफी साहब खुद बजाया करते थे। इस खास मुलाकात में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर और संगीतकार सलीम मर्चेंट भी मौजूद रहे।
रफी मेंशन में भावुक मुलाकात
सोनू निगम रफी साहब की गायकी के चिरकाल से प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने रफी साहब का वही हारमोनियम उठाया और 1964 में प्रदर्शित फिल्म 'कश्मीर की कली' का सदाबहार गीत 'दीवाना हुआ बादल' गाया। यह गीत मूल रूप से मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज़ों में था और इसका संगीत दिग्गज संगीतकार ओ.पी. नैयर ने तैयार किया था। जब सोनू की सुरीली आवाज़ रफी मेंशन की दीवारों से टकराई, तो सचिन तेंदुलकर पास खड़े होकर पूरी तन्मयता से सुनते नज़र आए।
इंस्टाग्राम पर साझा किया भावुक पल
सोनू निगम ने इस पूरी यात्रा का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने इस विजिट को बेहद खास बताते हुए लिखा — 'रफी मेंशन में हमारी संगीत से जुड़ी एक खास यात्रा।' इस पोस्ट ने संगीत प्रेमियों के बीच भावनाओं की एक लहर पैदा कर दी।
शाहिद रफी से मुलाकात और विरासत की जिम्मेदारी
इस दौरान तीनों की मुलाकात रफी साहब के सुपुत्र शाहिद रफी से भी हुई। शाहिद रफी अपने पिता के सात बच्चों में सबसे छोटे हैं और स्वयं भी गायक हैं। वह अपने पिता की संगीत विरासत को संरक्षित करने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में निरंतर जुटे हुए हैं। वह अक्सर रफी साहब की जिंदगी, उनके काम और उनसे जुड़ी यादों को लोगों के साथ साझा करते रहते हैं।
रफी मेंशन: एक जीवंत संग्रहालय
बांद्रा स्थित रफी मेंशन के एक हिस्से को अब संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया गया है। यहाँ रफी साहब के वाद्य यंत्र, पुरस्कार, दुर्लभ तस्वीरें और उनके निजी सामान को सहेजकर रखा गया है। इनमें उनका हारमोनियम और तानपुरा तो हैं ही, साथ ही उनकी क्रॉकरी, पुरानी तस्वीरें, पुराना लैंडलाइन टेलीफोन और यहाँ तक कि जिस गिलास में वह अपनी पसंदीदा कोल्ड ड्रिंक पीते थे, वह भी यहाँ मौजूद है। ये छोटी-छोटी चीजें रफी साहब की रोजमर्रा की जिंदगी की झलक पेश करती हैं।
रफी साहब की अमर विरासत
मोहम्मद रफी का निधन 31 जुलाई 1980 को हुआ था, लेकिन उनकी आवाज़ और संगीत आज भी करोड़ों श्रोताओं के दिलों में जीवित है। सोनू निगम, सचिन तेंदुलकर और सलीम मर्चेंट जैसी हस्तियों का रफी मेंशन आना इस बात का प्रमाण है कि रफी साहब की विरासत पीढ़ियों और क्षेत्रों की सीमाएँ पार कर चुकी है। रफी मेंशन का यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए संगीत की इस अनमोल धरोहर को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।