12 अगस्त 2026
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सोनू निगम का बहुभाषी गायन का राज: 'एस. पी. बालासुब्रमण्यम को ध्यान में रखता था'

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सोनू निगम का बहुभाषी गायन का राज: 'एस. पी. बालासुब्रमण्यम को ध्यान में रखता था'

सारांश

सोनू निगम ने खुलासा किया कि दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय वह दिवंगत एस. पी. बालासुब्रमण्यम को अपना आदर्श मानते थे। उनका कहना है कि बहुभाषी गायन में शब्द रटने से ज़्यादा भाषा की आत्मा को समझना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

सोनू निगम ने बताया कि दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय वह एस.
बालासुब्रमण्यम को अपना प्रेरणास्रोत मानते थे।
उनके अनुसार, बहुभाषी गायन में केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि उस भाषा का स्वाभाविक अंदाज़ पकड़ना ज़रूरी है।
भाषा सीखने की प्रक्रिया में गायक और सिखाने वाले — दोनों की मेहनत अनिवार्य है।
सोनू निगम इन दिनों हरियाणवी गाने 'चुन्नी' को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें रेणुका पंवार ने भी आवाज़ दी है।
यह इंटरव्यू 12 अगस्त 2026 को मुंबई में हुआ।

गायक सोनू निगम ने 12 अगस्त 2026 को एक विशेष बातचीत में खुलासा किया कि वह दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय दिवंगत महान गायक एस. पी. बालासुब्रमण्यम को अपना आदर्श मानते थे। मुंबई में दिए इस इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बहुभाषी गायन केवल शब्दों को रटने की कला नहीं, बल्कि उस भाषा की आत्मा को आत्मसात करने की साधना है।

भाषा की आत्मा को समझना ज़रूरी

सोनू निगम ने स्पष्ट किया कि किसी अपरिचित भाषा में गाते समय गायक की सबसे बड़ी चुनौती उस भाषा के स्वाभाविक अंदाज़ को पकड़ना है। उन्होंने कहा, 'इसका जवाब कई स्तरों पर दिया जा सकता है। सबसे पहली चीज़ गायक की क्षमता है कि वह किसी भाषा और उसके गायन के अंदाज़ को कितनी अच्छी तरह अपने अंदर उतार सकता है।' उनके अनुसार, जब श्रोता को यह महसूस हो कि गाना उसी भाषा के जानकार गायक ने गाया है, तभी गायन सफल माना जा सकता है।

एस. पी. बालासुब्रमण्यम: सोनू का प्रेरणास्रोत

सोनू निगम ने अपने शुरुआती दक्षिण भारतीय गायन के अनुभव को याद करते हुए कहा, 'जब मैंने पहली बार दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाने गाए, तो मेरे दिमाग में एस. पी. बालासुब्रमण्यम होते थे।' उन्होंने बताया कि बालासुब्रमण्यम ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाया और उनके उच्चारण एवं गायकी में भाषा की स्वाभाविकता स्पष्ट रूप से सुनाई देती थी। यह ऐसे समय में आया है जब बहुभाषी गायन की माँग भारतीय फ़िल्म उद्योग में लगातार बढ़ रही है।

सीखने की प्रक्रिया में दोतरफ़ा मेहनत

सोनू निगम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भाषा सीखने की प्रक्रिया में गायक और सिखाने वाले — दोनों की भूमिका अहम होती है। उनके शब्दों में, 'अगर गाना सिखाने वाला व्यक्ति ही भाषा के उच्चारण को लेकर स्पष्ट नहीं है, तो गायक पूरी मेहनत करने के बावजूद गलती कर सकता है।' गौरतलब है कि हिंदी भाषी गायकों के लिए दक्षिण भारतीय भाषाओं के उच्चारण की बारीकियाँ सबसे कठिन मानी जाती हैं, क्योंकि इन भाषाओं की ध्वनि-संरचना मूलतः भिन्न है।

नया हरियाणवी गाना 'चुन्नी'

इन दिनों सोनू निगम अपने नए हरियाणवी गाने 'चुन्नी' को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें उनके साथ लोकप्रिय हरियाणवी गायिका रेणुका पंवार ने भी आवाज़ दी है। यह गाना उनकी बहुभाषी गायन की उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसकी चर्चा उन्होंने इस इंटरव्यू में की।

आगे की राह

सोनू निगम का यह अनुभव भारतीय संगीत उद्योग के उन तमाम उभरते गायकों के लिए मार्गदर्शक है जो क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। बालासुब्रमण्यम की विरासत को आदर्श मानते हुए वह यह संदेश देते हैं कि भाषा की गहराई में उतरे बिना गायन अधूरा रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि एकरूपता में। यह उन उभरते गायकों के लिए एक ज़रूरी संदेश है जो क्षेत्रीय बाज़ारों में पैठ बनाने के लिए भाषाई शॉर्टकट अपनाते हैं — और अक्सर श्रोताओं की नज़र में खरे नहीं उतरते।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनू निगम दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय किसे आदर्श मानते थे?
सोनू निगम ने बताया कि दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय वह दिवंगत महान गायक एस. पी. बालासुब्रमण्यम को ध्यान में रखते थे। उनके अनुसार, बालासुब्रमण्यम के उच्चारण और गायकी में भाषा की स्वाभाविकता स्पष्ट रूप से झलकती थी।
बहुभाषी गायन में सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है?
सोनू निगम के अनुसार, किसी अपरिचित भाषा में गाते समय केवल शब्दों को याद करना पर्याप्त नहीं है — उस भाषा के स्वाभाविक उच्चारण, लहजे और अंदाज़ को भी आत्मसात करना ज़रूरी है। हिंदी भाषी गायकों के लिए दक्षिण भारतीय भाषाओं की ध्वनि-संरचना यह चुनौती और बढ़ा देती है।
सोनू निगम का नया हरियाणवी गाना कौन-सा है?
सोनू निगम इन दिनों अपने नए हरियाणवी गाने 'चुन्नी' को लेकर चर्चा में हैं। इस गाने में उनके साथ लोकप्रिय हरियाणवी गायिका रेणुका पंवार ने भी अपनी आवाज़ दी है।
क्या गाना सिखाने वाले की भूमिका भी बहुभाषी गायन में अहम होती है?
हाँ, सोनू निगम ने स्पष्ट किया कि यदि गाना सिखाने वाला व्यक्ति स्वयं भाषा के उच्चारण को लेकर स्पष्ट नहीं है, तो गायक पूरी मेहनत के बावजूद गलती कर सकता है। उन्होंने कहा कि भाषा सीखने की प्रक्रिया में दोनों तरफ से मेहनत ज़रूरी है।
एस. पी. बालासुब्रमण्यम की गायकी की क्या विशेषता थी?
सोनू निगम के अनुसार, एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाया और उनके उच्चारण एवं गायकी में भाषा की स्वाभाविकता साफ़ सुनाई देती थी। यही कारण है कि सोनू निगम उन्हें बहुभाषी गायन का सर्वोच्च आदर्श मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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