3 सितंबर 2026
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नेपाल बाढ़: 'मेरे गांव के 200 लोग लापता', मुस्तांग-त्रिशूली के बचे लोगों ने सुनाई दर्दनाक आपबीती

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नेपाल बाढ़: 'मेरे गांव के 200 लोग लापता', मुस्तांग-त्रिशूली के बचे लोगों ने सुनाई दर्दनाक आपबीती

सारांश

नेपाल में फ्लैश फ्लड के एक सप्ताह बाद भी मुस्तांग के एक गांव के करीब 200 लोग लापता हैं, गांव का 80% हिस्सा तबाह है। त्रिशूली में पानी पांचवीं मंजिल तक पहुंचा। संचार ढांचा ध्वस्त होने से परिवारों का संपर्क टूटा हुआ है — यह एक दशक से अधिक समय की नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक बताई जा रही है।

मुख्य बातें

मुस्तांग के एक गांव की स्थानीय आबादी में से करीब 200 लोग अभी भी लापता हैं; गांव का 80% हिस्सा तबाह।
बाढ़ इतनी तेज थी कि पूरा गांव महज दो मिनट में बह गया; केवल 8-10 लोगों को बचाया जा सका।
त्रिशूली में पानी पांचवीं मंजिल तक पहुंचा, घर और दुकानें पूरी तरह बर्बाद।
नेपाल टेलीकॉम के अनुसार करीब ₹6-7 लाख के उपकरण नष्ट; त्रिशूली में एक-दो दिन में इंटरनेट बहाल होने की उम्मीद।
दुर्गम इलाकों में संचार सेवा बहाल होने में तीन दिन या अधिक लग सकते हैं।
यह आपदा एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदियों में से एक मानी जा रही है।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड को करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी मुस्तांग और त्रिशूली जैसे प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर जस का तस बना हुआ है। 3 सितंबर को अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे बचे लोगों ने एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक की भयावह दास्तान बयां की। हजारों लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका जताई जा रही है।

मुस्तांग: 'दो मिनट में बह गया पूरा गांव'

मुस्तांग के एक मठ में बने अस्थायी शिविर में शरण लिए एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उनके गांव का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह तबाह हो चुका है। उन्होंने कहा, 'हमारे लोगों को तिमुरे से बड़ी मुश्किल से बचाकर यहां लाया गया। गांव की स्थानीय आबादी में से करीब 200 लोग अभी भी लापता हैं — करीब 80 प्रतिशत लोग गायब हैं और हममें से सिर्फ 20 प्रतिशत ही यहां पहुंच पाए हैं।'

उन्होंने बताया कि आपदा किसी को कोई चेतावनी दिए बिना आई। उनके शब्दों में, 'लोग अपना सामान्य काम कर रहे थे। बाढ़ इतनी भयानक थी कि पूरा गांव महज दो मिनट के भीतर बह गया। वहां से करीब आठ से दस लोगों को ही बचाया जा सका, बाकी सभी बह गए।' उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की गुहार लगाते हुए कहा, 'हम शून्य पर पहुंच गए हैं — घर, रोजी-रोटी का साधन, सब कुछ खत्म हो गया।'

त्रिशूली: पांचवीं मंजिल तक पहुंचा पानी

नेपाल के सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में शामिल त्रिशूली में एक स्थानीय निवासी ने बताया कि आपदा में उनका घर और दुकान पूरी तरह बर्बाद हो गए। उन्होंने कहा, 'पानी पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया और सब कुछ बर्बाद कर दिया। दुकान का सारा सामान पानी में बह गया।' हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्र में पहुंचना शुरू हो गई है और वितरण का काम जारी है।

संचार ढांचा ध्वस्त, परिवारों से टूटा संपर्क

इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएं बाधित होने के कारण आपदा प्रभावित इलाकों का नेपाल के बाकी हिस्सों और विदेशों में रह रहे परिजनों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। त्रिशूली में इंटरनेट सेवा बहाल करने में जुटे नेपाल टेलीकॉम के एक तकनीशियन ने बताया, 'सब कुछ पूरी तरह नष्ट हो गया है। कुल नुकसान का आकलन अभी बाकी है।' उनके अनुसार, करीब ₹6 से 7 लाख मूल्य के उपकरण नष्ट हो चुके हैं।

तकनीशियन ने बताया कि त्रिशूली में इंटरनेट सेवा एक-दो दिन में बहाल होने की उम्मीद है, लेकिन इससे आगे के दुर्गम इलाकों में सेवाएं बहाल करने में कम से कम तीन दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।

राहत और बचाव: अभी लंबी राह

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल पहले से ही मानसून की मार झेल रहा था। गौरतलब है कि नेपाल में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित होता है, लेकिन इस बार की आपदा को एक दशक से अधिक समय की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया जा रहा है। राहत सामग्री कुछ इलाकों तक पहुंच रही है, पर संचार और आवागमन के बुनियादी ढांचे के ध्वस्त होने से बचाव अभियान में गंभीर बाधाएं आ रही हैं। प्रभावित परिवारों को अभी लंबे पुनर्वास की दरकार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नेपाल की आपदा-पूर्व चेतावनी प्रणाली की विफलता का प्रमाण है। हर वर्ष मानसून में नेपाल बाढ़ और भूस्खलन की मार झेलता है, फिर भी दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अर्ली-वार्निंग नेटवर्क और निकासी योजनाएं अधूरी रहती हैं। संचार ढांचे का पूरी तरह ध्वस्त हो जाना यह भी बताता है कि बुनियादी आधारभूत संरचना अभी भी आपदा-रोधी नहीं है। जब तक पुनर्निर्माण केवल इमारतों तक सीमित रहेगा और चेतावनी तंत्र व संचार अवसंरचना को प्राथमिकता नहीं मिलेगी, यह चक्र हर मानसून में दोहराता रहेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में मुस्तांग के गांव से कितने लोग लापता हैं?
मुस्तांग के एक गांव की स्थानीय आबादी में से करीब 200 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचे लोगों के अनुसार गांव का करीब 80% हिस्सा तबाह हो चुका है और केवल 20% लोग ही सुरक्षित स्थान तक पहुंच पाए हैं।
नेपाल में बाढ़ कितनी तेजी से आई?
बचे लोगों के अनुसार फ्लैश फ्लड इतनी तेज थी कि पूरा गांव महज दो मिनट के भीतर बह गया। लोग उस वक्त अपने सामान्य कामकाज में व्यस्त थे और उन्हें कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली।
त्रिशूली में बाढ़ का क्या असर हुआ?
त्रिशूली में बाढ़ का पानी पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया, जिससे घर और दुकानें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। हालांकि, राहत सामग्री अब वहां पहुंचने लगी है और वितरण का काम जारी है।
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में इंटरनेट कब बहाल होगा?
नेपाल टेलीकॉम के तकनीशियनों के अनुसार त्रिशूली में इंटरनेट सेवा एक-दो दिन में बहाल होने की उम्मीद है। इससे आगे के दुर्गम इलाकों में सेवाएं बहाल करने में कम से कम तीन दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।
नेपाल की यह बाढ़ कितनी बड़ी आपदा है?
बचे लोगों और राहतकर्मियों के बयानों के अनुसार यह एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। हजारों लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका जताई जा रही है और संचार ढांचा व्यापक स्तर पर ध्वस्त हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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