नेपाल बाढ़: 'मेरे गांव के 200 लोग लापता', मुस्तांग-त्रिशूली के बचे लोगों ने सुनाई दर्दनाक आपबीती
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड को करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी मुस्तांग और त्रिशूली जैसे प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर जस का तस बना हुआ है। 3 सितंबर को अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे बचे लोगों ने एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक की भयावह दास्तान बयां की। हजारों लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका जताई जा रही है।
मुस्तांग: 'दो मिनट में बह गया पूरा गांव'
मुस्तांग के एक मठ में बने अस्थायी शिविर में शरण लिए एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उनके गांव का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह तबाह हो चुका है। उन्होंने कहा, 'हमारे लोगों को तिमुरे से बड़ी मुश्किल से बचाकर यहां लाया गया। गांव की स्थानीय आबादी में से करीब 200 लोग अभी भी लापता हैं — करीब 80 प्रतिशत लोग गायब हैं और हममें से सिर्फ 20 प्रतिशत ही यहां पहुंच पाए हैं।'
उन्होंने बताया कि आपदा किसी को कोई चेतावनी दिए बिना आई। उनके शब्दों में, 'लोग अपना सामान्य काम कर रहे थे। बाढ़ इतनी भयानक थी कि पूरा गांव महज दो मिनट के भीतर बह गया। वहां से करीब आठ से दस लोगों को ही बचाया जा सका, बाकी सभी बह गए।' उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की गुहार लगाते हुए कहा, 'हम शून्य पर पहुंच गए हैं — घर, रोजी-रोटी का साधन, सब कुछ खत्म हो गया।'
त्रिशूली: पांचवीं मंजिल तक पहुंचा पानी
नेपाल के सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में शामिल त्रिशूली में एक स्थानीय निवासी ने बताया कि आपदा में उनका घर और दुकान पूरी तरह बर्बाद हो गए। उन्होंने कहा, 'पानी पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया और सब कुछ बर्बाद कर दिया। दुकान का सारा सामान पानी में बह गया।' हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्र में पहुंचना शुरू हो गई है और वितरण का काम जारी है।
संचार ढांचा ध्वस्त, परिवारों से टूटा संपर्क
इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएं बाधित होने के कारण आपदा प्रभावित इलाकों का नेपाल के बाकी हिस्सों और विदेशों में रह रहे परिजनों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। त्रिशूली में इंटरनेट सेवा बहाल करने में जुटे नेपाल टेलीकॉम के एक तकनीशियन ने बताया, 'सब कुछ पूरी तरह नष्ट हो गया है। कुल नुकसान का आकलन अभी बाकी है।' उनके अनुसार, करीब ₹6 से 7 लाख मूल्य के उपकरण नष्ट हो चुके हैं।
तकनीशियन ने बताया कि त्रिशूली में इंटरनेट सेवा एक-दो दिन में बहाल होने की उम्मीद है, लेकिन इससे आगे के दुर्गम इलाकों में सेवाएं बहाल करने में कम से कम तीन दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।
राहत और बचाव: अभी लंबी राह
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल पहले से ही मानसून की मार झेल रहा था। गौरतलब है कि नेपाल में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित होता है, लेकिन इस बार की आपदा को एक दशक से अधिक समय की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया जा रहा है। राहत सामग्री कुछ इलाकों तक पहुंच रही है, पर संचार और आवागमन के बुनियादी ढांचे के ध्वस्त होने से बचाव अभियान में गंभीर बाधाएं आ रही हैं। प्रभावित परिवारों को अभी लंबे पुनर्वास की दरकार है।