नेपाल बाढ़: 'चेतावनी मिली थी, पर तबाही का अंदाज़ा नहीं था' — त्रिशूली के पीड़ितों की आपबीती
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ के बाद चारों ओर मलबे और तबाही का मंजर है। 31 अगस्त को प्रभावित इलाकों के निवासियों ने बताया कि उन्हें बाढ़ की पूर्व-चेतावनी तो मिली थी — सरकारी एसएमएस, चीन की ओर से संदेश और पड़ोसियों के फोन कॉल — लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पानी का स्तर इतना विनाशकारी हो जाएगा। अब जहाँ कभी पुराना ढुंगे त्रिशूली बाज़ार हुआ करता था, वहाँ केवल मलबा बचा है।
चेतावनी थी, विश्वास नहीं था
एक स्थानीय निवासी, जो 40 वर्षों से त्रिशूली में रह रहे हैं, ने बताया कि बाढ़ से पहले सरकार की ओर से मोबाइल पर संदेश आए थे और चीन से भी सूचना मिली थी। उन्होंने कहा, 'हमें लगा कि हमारा घर नदी से काफी दूर है और पानी यहाँ तक नहीं पहुँचेगा। हमने कभी नहीं सोचा था कि इतना पानी आएगा और पूरे बाज़ार को बहा ले जाएगा।'
एक किराना व्यापारी ने बताया कि उन्हें बाढ़ से केवल आधा घंटा पहले सूचना मिली थी, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार, 'जब पानी त्रिशूली पुल तक पहुँचा, तब हम भागने लगे। नुकसान करीब ₹1 से 1.5 करोड़ का है। मेरी पत्नी, तीन बच्चे और मैं — सभी वहाँ थे।'
मुख्य घटनाक्रम और नुकसान
आलू, प्याज और अनाज का कारोबार करने वाले एक व्यापारी को बाढ़ का पानी पहुँचने से केवल पाँच मिनट पहले चेतावनी मिली। उन्होंने बताया कि परिवार के छह सदस्य सुरक्षित निकल गए, लेकिन पूरी संपत्ति बह गई।
एक अन्य व्यापारी ने बताया कि उनकी दुकान में 20 से 25 टन सामान था — बोरी (गनी बैग) की दुकान और तीन शटर वाला वर्क एरिया — सब कुछ पानी में बह गया। उन्होंने कहा, 'मैं ₹5 भी नहीं निकाल पाया। कपड़े, गहने, पैसे — सब कुछ चला गया। मैंने चार दिन पहले ही काठमांडू से अपने बच्चे के लिए दवा मंगवाई थी, उसका भी कोई पता नहीं।'
एक और निवासी ने बताया कि उन्हें बाढ़ से 15 से 20 मिनट पहले सूचना मिली थी, फिर भी तबाही के पैमाने का अनुमान लगाना असंभव था।
ढुंगे त्रिशूली बाज़ार: एक पूरे इलाके की धड़कन खामोश
एक स्थानीय निवासी ने उस स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा, 'आप जो वहाँ देख रहे हैं, वह कभी पुराना ढुंगे त्रिशूली बाज़ार हुआ करता था। पहाड़ों पर बसे गाँवों के लोग यहाँ खरीदारी करने आते थे। ठीक सामने एक हाइड्रोपावर प्लांट था और बगल में एक बड़ा शॉपिंग मार्केट — वह सब कुछ खत्म हो गया।'
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हर साल तबाही मचाती हैं, लेकिन इस बार का पैमाना असाधारण बताया जा रहा है।
जान बचाने की जद्दोजहद: छत पर फँसे व्यक्ति का बचाव
एक निवासी ने एक रोमांचक बचाव अभियान का ज़िक्र किया जिसमें एक व्यक्ति अपने घर की छत पर फँसा था और चारों ओर बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ रहा था। उन्होंने बताया, 'वह व्यक्ति काफी देर तक "मदद करो, मदद करो" चिल्लाता रहा। पानी के तेज़ बहाव के कारण उस तक पहुँचना लगभग नामुमकिन था।' आखिरकार एक साहसी व्यक्ति उस खतरनाक इलाके तक पहुँचा और फँसे हुए व्यक्ति को बचा लिया गया।
राहत एवं बचाव कार्य जारी
रेस्क्यू टीम के सदस्य मबराज थापा ने बताया कि लिखु रूरल म्युनिसिपैलिटी की 250 लोगों की पूरी टीम प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में जुटी है। उन्होंने कहा, 'अब तक हमने चार घरों से सामान निकाला है और काम जारी है। कल हम देवीघाट जाकर इलाके को साफ करेंगे।'
थापा ने बताया कि जो शव मिले, वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे और उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल था। उन्होंने कहा, 'जो हुआ उसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। यह समझ से परे था।' आगे के दिनों में संपत्ति निकालने और इलाके की सफाई पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।