31 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: 'चेतावनी मिली थी, पर तबाही का अंदाज़ा नहीं था' — त्रिशूली के पीड़ितों की आपबीती

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नेपाल बाढ़: 'चेतावनी मिली थी, पर तबाही का अंदाज़ा नहीं था' — त्रिशूली के पीड़ितों की आपबीती

सारांश

चेतावनी मिली थी — सरकारी एसएमएस, चीन से संदेश, पड़ोसियों के फोन — लेकिन त्रिशूली के लोगों ने सोचा था कि पानी इतना नहीं चढ़ेगा। अब जहाँ ढुंगे त्रिशूली बाज़ार हुआ करता था, वहाँ सिर्फ मलबा है। यह सिर्फ बाढ़ की कहानी नहीं, बल्कि चेतावनी-प्रणाली और जन-जागरूकता की विफलता का दर्दनाक दस्तावेज़ है।

मुख्य बातें

नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में भीषण बाढ़ ने ढुंगे त्रिशूली बाज़ार को पूरी तरह तबाह कर दिया।
पीड़ितों को बाढ़ से 5 से 30 मिनट पहले चेतावनी मिली थी, लेकिन तबाही का पैमाना अकल्पनीय निकला।
एक व्यापारी को अकेले ₹1 से 1.5 करोड़ का नुकसान हुआ; एक अन्य की दुकान में 20-25 टन सामान बह गया।
लिखु रूरल म्युनिसिपैलिटी की 250 सदस्यीय टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है।
बचाव दल के सदस्य मबराज थापा के अनुसार मिले शवों की हालत इतनी खराब थी कि पहचान करना मुश्किल था।
एक व्यक्ति को घर की छत पर फँसे होने के बाद जान जोखिम में डालकर बचाया गया।

नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ के बाद चारों ओर मलबे और तबाही का मंजर है। 31 अगस्त को प्रभावित इलाकों के निवासियों ने बताया कि उन्हें बाढ़ की पूर्व-चेतावनी तो मिली थी — सरकारी एसएमएस, चीन की ओर से संदेश और पड़ोसियों के फोन कॉल — लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पानी का स्तर इतना विनाशकारी हो जाएगा। अब जहाँ कभी पुराना ढुंगे त्रिशूली बाज़ार हुआ करता था, वहाँ केवल मलबा बचा है।

चेतावनी थी, विश्वास नहीं था

एक स्थानीय निवासी, जो 40 वर्षों से त्रिशूली में रह रहे हैं, ने बताया कि बाढ़ से पहले सरकार की ओर से मोबाइल पर संदेश आए थे और चीन से भी सूचना मिली थी। उन्होंने कहा, 'हमें लगा कि हमारा घर नदी से काफी दूर है और पानी यहाँ तक नहीं पहुँचेगा। हमने कभी नहीं सोचा था कि इतना पानी आएगा और पूरे बाज़ार को बहा ले जाएगा।'

एक किराना व्यापारी ने बताया कि उन्हें बाढ़ से केवल आधा घंटा पहले सूचना मिली थी, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार, 'जब पानी त्रिशूली पुल तक पहुँचा, तब हम भागने लगे। नुकसान करीब ₹1 से 1.5 करोड़ का है। मेरी पत्नी, तीन बच्चे और मैं — सभी वहाँ थे।'

मुख्य घटनाक्रम और नुकसान

आलू, प्याज और अनाज का कारोबार करने वाले एक व्यापारी को बाढ़ का पानी पहुँचने से केवल पाँच मिनट पहले चेतावनी मिली। उन्होंने बताया कि परिवार के छह सदस्य सुरक्षित निकल गए, लेकिन पूरी संपत्ति बह गई।

एक अन्य व्यापारी ने बताया कि उनकी दुकान में 20 से 25 टन सामान था — बोरी (गनी बैग) की दुकान और तीन शटर वाला वर्क एरिया — सब कुछ पानी में बह गया। उन्होंने कहा, 'मैं ₹5 भी नहीं निकाल पाया। कपड़े, गहने, पैसे — सब कुछ चला गया। मैंने चार दिन पहले ही काठमांडू से अपने बच्चे के लिए दवा मंगवाई थी, उसका भी कोई पता नहीं।'

एक और निवासी ने बताया कि उन्हें बाढ़ से 15 से 20 मिनट पहले सूचना मिली थी, फिर भी तबाही के पैमाने का अनुमान लगाना असंभव था।

ढुंगे त्रिशूली बाज़ार: एक पूरे इलाके की धड़कन खामोश

एक स्थानीय निवासी ने उस स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा, 'आप जो वहाँ देख रहे हैं, वह कभी पुराना ढुंगे त्रिशूली बाज़ार हुआ करता था। पहाड़ों पर बसे गाँवों के लोग यहाँ खरीदारी करने आते थे। ठीक सामने एक हाइड्रोपावर प्लांट था और बगल में एक बड़ा शॉपिंग मार्केट — वह सब कुछ खत्म हो गया।'

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हर साल तबाही मचाती हैं, लेकिन इस बार का पैमाना असाधारण बताया जा रहा है।

जान बचाने की जद्दोजहद: छत पर फँसे व्यक्ति का बचाव

एक निवासी ने एक रोमांचक बचाव अभियान का ज़िक्र किया जिसमें एक व्यक्ति अपने घर की छत पर फँसा था और चारों ओर बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ रहा था। उन्होंने बताया, 'वह व्यक्ति काफी देर तक "मदद करो, मदद करो" चिल्लाता रहा। पानी के तेज़ बहाव के कारण उस तक पहुँचना लगभग नामुमकिन था।' आखिरकार एक साहसी व्यक्ति उस खतरनाक इलाके तक पहुँचा और फँसे हुए व्यक्ति को बचा लिया गया।

राहत एवं बचाव कार्य जारी

रेस्क्यू टीम के सदस्य मबराज थापा ने बताया कि लिखु रूरल म्युनिसिपैलिटी की 250 लोगों की पूरी टीम प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में जुटी है। उन्होंने कहा, 'अब तक हमने चार घरों से सामान निकाला है और काम जारी है। कल हम देवीघाट जाकर इलाके को साफ करेंगे।'

थापा ने बताया कि जो शव मिले, वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे और उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल था। उन्होंने कहा, 'जो हुआ उसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। यह समझ से परे था।' आगे के दिनों में संपत्ति निकालने और इलाके की सफाई पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि तकनीकी चेतावनी तंत्र तब तक अधूरा है जब तक समुदाय उसे गंभीरता से लेना न सीखे। गौरतलब है कि नेपाल में हर मानसून में ऐसी घटनाएँ दोहराई जाती हैं, फिर भी स्थानीय स्तर पर निकासी-अभ्यास और जोखिम-शिक्षा की कमी बनी रहती है। असली सवाल यह है कि क्या यह त्रासदी नेपाल सरकार को आपदा-प्रबंधन में जन-भागीदारी को प्राथमिकता देने पर मजबूर करेगी, या अगले मानसून तक यह भी भुला दी जाएगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल के त्रिशूली में बाढ़ कब और कैसे आई?
नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में 31 अगस्त को भीषण बाढ़ आई, जिसने ढुंगे त्रिशूली बाज़ार सहित आसपास के इलाकों को पूरी तरह तबाह कर दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार बाढ़ से पहले सरकारी एसएमएस और अन्य चेतावनियाँ मिली थीं, लेकिन पानी के इतने खतरनाक स्तर तक पहुँचने का अनुमान किसी को नहीं था।
त्रिशूली बाढ़ में कितना नुकसान हुआ?
एक किराना व्यापारी को अकेले करीब ₹1 से 1.5 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि एक अन्य व्यापारी की दुकान में रखा 20 से 25 टन सामान बह गया। पुराना ढुंगे त्रिशूली बाज़ार, एक हाइड्रोपावर प्लांट और आसपास का शॉपिंग मार्केट पूरी तरह नष्ट हो गया।
क्या त्रिशूली बाढ़ से पहले कोई चेतावनी दी गई थी?
हाँ, सरकार की ओर से मोबाइल फोन पर एसएमएस भेजे गए थे और चीन की ओर से भी संदेश मिले थे। निवासियों को बाढ़ से 5 से 30 मिनट पहले जानकारी मिली थी, लेकिन अधिकांश लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि पानी इतना ऊपर चढ़ेगा।
त्रिशूली में राहत और बचाव कार्य कौन कर रहा है?
लिखु रूरल म्युनिसिपैलिटी की 250 सदस्यीय टीम प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में जुटी है। बचाव दल के सदस्य मबराज थापा के अनुसार अब तक चार घरों से सामान निकाला जा चुका है और देवीघाट में सफाई अभियान भी जारी रहेगा।
ढुंगे त्रिशूली बाज़ार का क्या महत्व था?
ढुंगे त्रिशूली बाज़ार आसपास के पहाड़ी गाँवों के लोगों के लिए मुख्य खरीदारी केंद्र था। इसके पास एक हाइड्रोपावर प्लांट और बड़ा शॉपिंग मार्केट भी था, जो पूरे क्षेत्र की आर्थिक धड़कन था। बाढ़ ने इस पूरे बाज़ार को नष्ट कर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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