मिशन रंगीन मछली 2031: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने लक्षद्वीप में की लॉन्चिंग, ₹62 करोड़ की मत्स्य परियोजनाओं को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को लक्षद्वीप के अगात्ती में आयोजित मत्स्य पालन आउटरीच कार्यक्रम में सजावटी मछली पालन के विकास के लिए रणनीतिक कार्य योजना 'मिशन रंगीन मछली 2031' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र के लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ और सहायता भी वितरित की।
मिशन रंगीन मछली 2031 क्या है
यह सजावटी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई एक केंद्रित रणनीतिक कार्य योजना है, जिसका उद्देश्य 2031 तक लक्षद्वीप और देश के अन्य तटीय क्षेत्रों में सजावटी मत्स्य उद्योग को व्यावसायिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। उपराष्ट्रपति ने इस मौके को लक्षद्वीप के लिए एक ऐतिहासिक दिन और भारत की 'नीली क्रांति' में एक नया मील का पत्थर बताया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अंकित नीला चक्र 'नीली क्रांति' और समुद्री अर्थव्यवस्था की असीम संभावनाओं का प्रतीक है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश का मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख उभरते हुए स्तंभ के रूप में स्थापित हो रहा है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और लक्षद्वीप
राधाकृष्णन ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत लक्षद्वीप के लिए ₹62 करोड़ से अधिक की मत्स्य पालन विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। उन्होंने शासन व्यवस्था में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार अब लोगों के अपने पास आने का इंतजार नहीं करती, बल्कि सीधे मछुआरा समुदायों तक पहुँचकर योजनाओं का लाभ देती है।
गौरतलब है कि यह आउटरीच मॉडल केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत दूरदराज के द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
लक्षद्वीप की समुद्री क्षमता
उपराष्ट्रपति ने लक्षद्वीप की विशाल समुद्री क्षमता को रेखांकित करते हुए बताया कि इन द्वीपों में मछली पकड़ने की अनुमानित क्षमता एक लाख टन से अधिक है, जिसमें लगभग 94,000 टन टूना और टूना जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं। उन्होंने वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से इस क्षमता के दोहन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि द्वीपवासियों की समृद्धि सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने भारत के बढ़ते समुद्री खाद्य निर्यात का भी उल्लेख किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष में ₹73,000 करोड़ से अधिक हो गया और 120 से ज़्यादा देशों तक पहुँचा। राधाकृष्णन ने कहा कि एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) और हाई सीज़ से जुड़ी पहल भारत की वैश्विक समुद्री खाद्य बाज़ारों में उपस्थिति को और सशक्त करेंगी।
टिकाऊपन और युवाओं से आह्वान
टिकाऊ मत्स्य पालन पर ज़ोर देते हुए राधाकृष्णन ने जिम्मेदारी से मछली पकड़ने, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और अवैध, बिना रिपोर्ट किए और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और वैश्विक अवसरों से संचालित एक आधुनिक उद्यम के रूप में अपनाएँ।
हरित और श्वेत क्रांति से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि 'नीली क्रांति' में भी मछुआरा समुदायों के जीवन को बदलने की समान क्षमता है। उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर काम करने का आग्रह किया, ताकि भारत की 'ब्लू इकॉनमी', विकसित भारत 2047 का एक सुदृढ़ स्तंभ बन सके।