उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 9 जुलाई को ओडिशा दौरे पर; डीप सी फिशिंग मिशन और NISER दीक्षांत समारोह में होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 9 जुलाई को एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा जाएंगे, जहाँ वह भुवनेश्वर में दो प्रमुख कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस यात्रा का केंद्रबिंदु ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन का औपचारिक शुभारंभ और राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NISER) का 15वाँ दीक्षांत समारोह है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब केंद्र और राज्य दोनों सरकारें ब्लू इकोनॉमी और समुद्री मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रही हैं।
डीप सी फिशिंग मिशन: मुख्य घटनाक्रम
उपराष्ट्रपति सबसे पहले भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (OUAT) पहुँचेंगे। यहाँ वह खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए 'प्राधिकरण पत्र (Letter of Authorization — LOA)' जारी करने के राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस पहल का उद्देश्य गहरे समुद्र के मत्स्य संसाधनों का वैज्ञानिक, सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से उपयोग सुनिश्चित करना है, साथ ही समुद्री जैव विविधता का संरक्षण भी बनाए रखना है।
इसी अवसर पर ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज़ का भी औपचारिक अनावरण किया जाएगा। यह मिशन राज्य में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने, मछुआरों की आय में वृद्धि करने और इस क्षेत्र को अधिक संगठित एवं दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम माना जा रहा है।
NISER का 15वाँ दीक्षांत समारोह
दौरे के दूसरे चरण में उपराष्ट्रपति भुवनेश्वर के खुर्दा स्थित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NISER) पहुँचेंगे, जहाँ वह संस्थान के 15वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर वह स्नातक और शोध छात्रों को डिग्रियाँ एवं पदक प्रदान करेंगे।
उम्मीद है कि अपने संबोधन में वह विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी शिक्षा की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका पर प्रकाश डालेंगे। युवा वैज्ञानिकों को नई चुनौतियों के लिए प्रेरित करना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देना भी उनके संबोधन का अपेक्षित हिस्सा रहेगा।
ब्लू इकोनॉमी के संदर्भ में महत्व
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राज्य स्तर पर ओडिशा की समुद्री नीतियाँ मिलकर मत्स्य क्षेत्र को एक संगठित उद्योग का दर्जा दिलाने की कोशिश कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की ब्लू इकोनॉमी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की कवायद तेज़ हो रही है। ओडिशा की लंबी समुद्री तटरेखा इस क्षेत्र में राज्य को एक रणनीतिक बढ़त देती है।
आगे की राह
उपराष्ट्रपति के इस दौरे से मत्स्य क्षेत्र में नई नीतिगत दिशा और वैज्ञानिक शिक्षा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। LOA प्रणाली का राष्ट्रीय शुभारंभ अन्य तटीय राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, जबकि NISER के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति की उपस्थिति संस्थान की वैज्ञानिक साख को और मज़बूती देगी।