चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका से क्यूबा की नाकाबंदी तुरंत खत्म करने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 7 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय नाकाबंदी को समाप्त करना' विषय पर आयोजित बहस के दौरान अमेरिका से क्यूबा पर लगाए गए सभी प्रतिबंध और दबाव तत्काल हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि यह नाकाबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वैश्विक सहमति के सीधे विरुद्ध है।
60 वर्षों की नाकाबंदी और बढ़ता दबाव
फू थ्सोंग ने कहा कि 60 वर्षों से अधिक समय से अमेरिका क्यूबा पर अवैध आर्थिक नाकाबंदी और एकतरफा प्रतिबंध लगाए हुए है, जिससे क्यूबा की जनता को भारी पीड़ा उठानी पड़ी है। उनके अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अमेरिका ने अपने नियंत्रण, दमन और नाकाबंदी की धमकियों को और तेज कर दिया है।
अमेरिका ने ऊर्जा, वित्त और व्यापार क्षेत्रों में कड़े कदम उठाए हैं। इसके अलावा, क्यूबाई संस्थाओं के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर द्वितीयक प्रतिबंधों की धमकी दी गई है। फू थ्सोंग के अनुसार, अमेरिका ने क्यूबा के नेताओं को खुलेआम सूचीबद्ध किया है और सैन्य धमकियाँ भी दी हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय सहमति
फू थ्सोंग ने याद दिलाया कि अक्टूबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने लगातार 33वें वर्ष, 165 मतों के भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी समाप्त करने की माँग की गई थी। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अवैध प्रतिबंधों को तत्काल हटाने का आधार प्रदान करता है और इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि यह लगातार तीन दशकों से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकमत राय रही है, फिर भी अमेरिका ने इस प्रस्ताव की अनदेखी जारी रखी है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
चीन के स्थायी प्रतिनिधि ने तर्क दिया कि अमेरिका की ये कार्रवाइयाँ संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उन प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन हैं जो संप्रभु समानता, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और बल प्रयोग पर रोक से संबंधित हैं। उनके अनुसार, ये कदम क्यूबा की जनता के जीवन और विकास के अधिकार को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं।
फू थ्सोंग ने कहा कि अमेरिका की ये नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों को कुचलती हैं, इसलिए इन्हें तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
चीन का रुख और आगे की राह
चीन ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिका से अपेक्षा करता है कि वह क्यूबा पर लगाई गई नाकाबंदी और हर प्रकार के दबाव व उत्पीड़न को तुरंत बंद करे, और अंतरराष्ट्रीय सहमति, ऐतिहासिक न्याय तथा मानवीय विवेक के विरुद्ध खड़े होने से बचे। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-क्यूबा संबंध दशकों में सबसे तनावपूर्ण दौर में हैं और वैश्विक दक्षिण के देश अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंध नीतियों पर अपनी आपत्ति तेजी से मुखर कर रहे हैं।