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क्यूबा की तेल कंपनी CUPET पर अमेरिका के नए प्रतिबंध, ट्रंप प्रशासन ने ऊर्जा दुरुपयोग का लगाया आरोप

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क्यूबा की तेल कंपनी CUPET पर अमेरिका के नए प्रतिबंध, ट्रंप प्रशासन ने ऊर्जा दुरुपयोग का लगाया आरोप

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी CUPET पर कार्यकारी आदेश 14404 के तहत प्रतिबंध लगाए। आरोप है कि हवाना ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल दमन और भ्रष्टाचार के लिए करती है, जबकि आम नागरिक बिजली संकट झेल रहे हैं। यह अमेरिका के छह दशक पुराने क्यूबा प्रतिबंध कार्यक्रम की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

अमेरिका ने 12 जून 2025 को क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी CUPET को कार्यकारी आदेश 14404 के तहत प्रतिबंधित संस्था घोषित किया।
CUPET की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियाँ और हित OFAC के आदेश पर फ्रीज किए जाएंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आरोप लगाया कि क्यूबा सरकार ऊर्जा को दमन और सामाजिक नियंत्रण के हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है।
रुबियो के अनुसार, CUPET की कुछ संपत्तियाँ कथित तौर पर अमेरिकी मालिकों से अवैध रूप से अधिग्रहीत की गई थीं।
प्रतिबंधित संस्था से जुड़े विदेशी व्यक्ति, कंपनियाँ और वित्तीय संस्थान भी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं।
अमेरिका छह दशकों से अधिक समय से क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हुए है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 12 जून 2025 को क्यूबा की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो (CUPET) को प्रतिबंधित संस्था घोषित किया। ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश 14404 के तहत यह कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ऊर्जा संसाधनों का उपयोग दमनकारी नीतियों को बनाए रखने और शीर्ष नेतृत्व को लाभ पहुँचाने के लिए कर रही है।

प्रतिबंधों का दायरा और कानूनी ढाँचा

इन प्रतिबंधों के अंतर्गत CUPET की अमेरिका में मौजूद अथवा अमेरिकी व्यक्तियों के नियंत्रण वाली सभी संपत्तियाँ और हित तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिए जाएंगे। इन संपत्तियों की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) को देना अनिवार्य होगा। प्रतिबंधित संस्था के साथ किसी भी प्रकार का लेन-देन तब तक निषिद्ध रहेगा, जब तक OFAC से विशेष अनुमति न प्राप्त हो।

अमेरिकी आरोप: ऊर्जा का हथियार के रूप में इस्तेमाल

रुबियो ने आरोप लगाया कि क्यूबा के नेताओं ने ऊर्जा की भीषण कमी के बावजूद तेल और ईंधन को दूसरे बाज़ारों में बेचा, सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए ऊर्जा का भंडारण किया, और ऊर्जा आपूर्ति को सामाजिक नियंत्रण के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। रुबियो के अनुसार, जहाँ आम क्यूबाई नागरिक ईंधन भरवाने के लिए हफ्तों प्रतीक्षा करते हैं और लगातार बिजली संकट झेलते हैं, वहीं कास्त्रो परिवार निजी जेट से यात्रा करता है और सरकार लक्जरी पर्यटन होटलों में बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता देती है।

रुबियो ने यह भी दावा किया कि CUPET की कुछ प्रमुख संपत्तियाँ वर्षों पूर्व अमेरिकी मालिकों से कथित तौर पर अवैध रूप से अधिग्रहीत की गई थीं। गौरतलब है कि दशकों से बुनियादी ढाँचे में पर्याप्त निवेश न होने के कारण आम क्यूबाई नागरिक ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं।

विदेशी कंपनियों और संस्थाओं पर भी असर

अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित संस्थाओं या क्यूबा की नामित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विदेशी व्यक्ति, कंपनियाँ और वित्तीय संस्थान भी इन प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है।

छह दशकों से जारी प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका पिछले छह दशकों से अधिक समय से क्यूबा पर विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हुए है, जिसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे प्रतिबंध कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। CUPET पर यह नई कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की क्यूबा के प्रति सख्त नीति की कड़ी में एक और कदम है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि प्रशासन क्यूबा की ऊर्जा व्यापार के ज़रिए अपने कथित भ्रष्ट एजेंडे और दमनकारी सुरक्षा तंत्र को मज़बूत करने की क्षमता को निशाना बनाना जारी रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वेनेज़ुएला और निकारागुआ जैसे देशों पर एक साथ दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है — लेकिन छह दशकों के प्रतिबंधों के बावजूद हवाना में शासन-परिवर्तन नहीं हुआ, यह सवाल बना रहता है कि एक और प्रतिबंध कितना असरदार होगा। ऊर्जा दुरुपयोग के आरोप गंभीर हैं, परंतु इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है — रुबियो के बयान अमेरिकी सरकार के एकपक्षीय दृष्टिकोण पर आधारित हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह कदम तीसरे देशों की कंपनियों को क्यूबा के ऊर्जा क्षेत्र से दूर करने में सफल होता है, या महज़ एक राजनीतिक संदेश बनकर रह जाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CUPET पर अमेरिकी प्रतिबंध क्या हैं और इनका मतलब क्या है?
अमेरिका ने कार्यकारी आदेश 14404 के तहत क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी CUPET को प्रतिबंधित संस्था घोषित किया है। इसके तहत CUPET की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियाँ फ्रीज होंगी और OFAC की अनुमति के बिना कोई भी लेन-देन निषिद्ध रहेगा।
ट्रंप प्रशासन ने CUPET पर प्रतिबंध क्यों लगाए?
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल दमनकारी नीतियों को बनाए रखने, शीर्ष नेतृत्व को लाभ पहुँचाने और सामाजिक नियंत्रण के लिए करती है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह भी दावा किया कि CUPET की कुछ संपत्तियाँ कथित तौर पर अमेरिकी मालिकों से अवैध रूप से अधिग्रहीत की गई थीं।
इन प्रतिबंधों से विदेशी कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि CUPET या क्यूबा की नामित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विदेशी व्यक्ति, कंपनियाँ और वित्तीय संस्थान भी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। यह तीसरे देशों के व्यापारिक भागीदारों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।
अमेरिका और क्यूबा के बीच प्रतिबंधों का इतिहास क्या है?
अमेरिका पिछले छह दशकों से अधिक समय से क्यूबा पर विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हुए है, जिसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे प्रतिबंध कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। CUPET पर यह नई कार्रवाई उसी दीर्घकालिक नीति की ताज़ा कड़ी है।
OFAC क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
OFAC यानी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय, अमेरिकी वित्त मंत्रालय की वह इकाई है जो आर्थिक और व्यापार प्रतिबंधों को लागू करती है। CUPET मामले में OFAC की अनुमति के बिना प्रतिबंधित संस्था के साथ कोई भी वित्तीय लेन-देन अवैध होगा।
राष्ट्र प्रेस
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