उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने लद्दाख में पश्मीना फार्म और सिंधु रॉक चेक डैम का निरीक्षण किया
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 20 जून 2026 को अपने लद्दाख दौरे के दौरान उपशी स्थित पश्मीना बकरी फार्म और सिंधु नदी पर निर्मित पहले रॉक चेक डैम का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने इन दोनों पहलों को क्षेत्र के सतत विकास, आजीविका संवर्धन और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण की दिशा में ठोस कदम बताया।
पश्मीना फार्म: सांस्कृतिक धरोहर और महिला सशक्तीकरण
राधाकृष्णन ने पश्मीना बकरी फार्म के दौरे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि लद्दाख की विशिष्ट पश्मीना विरासत को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने के प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उन्होंने चांगथांगी नस्ल की बकरियों और उनसे प्राप्त विश्व प्रसिद्ध पश्मीना ऊन को इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और स्थानीय समुदायों की दूरदर्शिता का प्रतीक बताया।
उपराष्ट्रपति ने फार्म की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान टिकाऊ पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों — विशेषकर महिलाओं — के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण में भी अहम योगदान दे रहा है। पश्मीना उत्पादन से जुड़े कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को उन्होंने क्षेत्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार करार दिया।
राधाकृष्णन ने फार्म से जुड़े वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के समर्पण की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण आजीविका मज़बूत हो रही है, महिलाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ रहे हैं और देश की एक अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।
सिंधु जल समृद्धि अभियान: पहला रॉक चेक डैम
अपने दौरे के दूसरे चरण में उपराष्ट्रपति ने उपशी में सिंधु नदी पर निर्मित पहले रॉक चेक डैम का निरीक्षण किया। यह परियोजना 'सिंधु जल समृद्धि अभियान' के अंतर्गत विकसित की गई है। राधाकृष्णन ने इस पर्यावरण-अनुकूल और कम लागत वाली पहल को जल संरक्षण की दिशा में एक अभिनव प्रयोग बताया।
उन्होंने कहा, 'लद्दाख के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले महीने लद्दाख में पानी की बार-बार होने वाली समस्याओं के एक नए समाधान के तौर पर इसकी योजना बनाई थी और इसका उद्घाटन किया था। यह अनोखा प्रोजेक्ट सिंधु नदी के कम गहरे हिस्सों में पानी का स्तर बढ़ाता है, जिससे किसान बुवाई के अहम मौसम में अपने खेतों की सिंचाई कर पाते हैं।'
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के टिकाऊ और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल उपाय जल सुरक्षा को मज़बूत कर सकते हैं, कृषि आजीविका को सहारा दे सकते हैं और इलाके के दीर्घकालिक विकास में योगदान कर सकते हैं।
आम जनता और किसानों पर असर
रॉक चेक डैम विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभकारी है जो बुवाई के मौसम में सिंधु नदी की उथली धाराओं पर निर्भर रहते हैं। यह परियोजना लद्दाख जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जल संकट के स्थानीय समाधान का एक मॉडल बन सकती है, जहाँ पारंपरिक बाँध निर्माण कठिन और महँगा होता है।
गौरतलब है कि लद्दाख में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की दर बढ़ रही है, जिससे नदियों में जल प्रवाह अनियमित होता जा रहा है। ऐसे में रॉक चेक डैम जैसी कम लागत वाली तकनीक स्थानीय किसानों के लिए दीर्घकालिक राहत का विकल्प प्रस्तुत करती है।
क्या होगा आगे
उपराष्ट्रपति के इस दौरे से इन दोनों परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। यह यात्रा लद्दाख में सतत विकास और जल प्रबंधन की दिशा में केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। आने वाले समय में 'सिंधु जल समृद्धि अभियान' के तहत और अधिक रॉक चेक डैम बनाए जाने की संभावना है।