मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह की अपील: IIT मद्रास में सेमीकंडक्टर ट्रेनिंग पाकर लौटें युवा, बनाएं राज्य का भविष्य
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 24 सितंबर 2026 को इंफाल स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित एक हाइब्रिड संवाद कार्यक्रम के दौरान राज्य से बाहर तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर रहे युवाओं से आग्रह किया कि वे उन्नत कौशल और अनुभव लेकर मणिपुर लौटें और राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह कार्यक्रम मणिपुर माइनॉरिटीज एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट सोसाइटी की पहल के तहत आयोजित किया गया था, जिसके अंतर्गत राज्य के अल्पसंख्यक, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और एससी (अनुसूचित जाति) समुदायों के 25 स्नातक छात्रों का चयन IIT मद्रास में सेमीकंडक्टर सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी की स्किल ट्रेनिंग के लिए किया गया है।
चयन प्रक्रिया और कार्यक्रम की संरचना
कुल 75 आवेदनों में से कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद 25 स्नातक छात्रों — जिनमें 22 छात्र और 3 छात्राएं शामिल हैं — को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया है। उल्लेखनीय बात यह है कि किसी भी विषय से स्नातक छात्र इस प्रशिक्षण के लिए पात्र हैं, जो इसे व्यापक पहुंच वाला कार्यक्रम बनाता है। चयनित छात्रों को IIT मद्रास में 15 दिनों की आवासीय ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी।
ट्रेनिंग, आवास और आवागमन का समस्त खर्च मणिपुर राज्य सरकार वहन करेगी, जिसमें IIT मद्रास की सहायता रहेगी। यह वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र भी इस अवसर से वंचित न रहें।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अवसर
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के तकनीकी पहलू भले ही विशिष्ट प्रकृति के हों, किंतु यह उभरता हुआ क्षेत्र युवाओं के लिए असाधारण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे इस प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाएं और ऐसे कौशल आत्मसात करें जो उन्हें रोजगार के नए द्वार खोलने में सहायक हों।
अल्पसंख्यक मामलों, ओबीसी और एससी विभाग के कमिश्नर-कम-सेक्रेटरी आर्मस्ट्रांग पामे ने बताया कि सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और सामग्री की असेंबली तथा मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया जाता है।
IIT मद्रास की भूमिका और प्लेसमेंट सहायता
IIT मद्रास इस कार्यक्रम को एक स्किल डेवलपमेंट पहल के रूप में संचालित कर रहा है, जिसमें संस्थान की अत्याधुनिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए व्यावहारिक और उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संवाद कार्यक्रम में IIT मद्रास के निदेशक पद्मश्री प्रो. वी. कामकोटि, प्रो. आर. सारथी और अन्य फैकल्टी सदस्यों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
गौरतलब है कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात IIT मद्रास सफल प्रशिक्षुओं को संबद्ध विभिन्न उद्योगों में रोजगार दिलाने में सहायता करेगा। शुरुआती स्तर पर चयनित युवाओं को ₹20,000 से ₹25,000 प्रति माह वेतन मिलने की संभावना जताई गई है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह पहल ऐसे समय में आई है जब मणिपुर दीर्घकालिक सामाजिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तलाश रहा है। राज्य के अल्पसंख्यक, ओबीसी और एससी समुदायों पर विशेष ध्यान देना यह संकेत देता है कि सरकार समावेशी विकास को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रही है। सेमीकंडक्टर जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र में प्रशिक्षण से राज्य के युवाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक नौकरी बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री का यह आह्वान कि प्रशिक्षित युवा राज्य में लौटकर योगदान दें, मणिपुर में 'ब्रेन ड्रेन' की दीर्घकालिक समस्या से निपटने की दिशा में एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है।