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मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026: ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 10,000 नौकरियों की संभावना — सीएम मोहन यादव

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मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026: ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 10,000 नौकरियों की संभावना — सीएम मोहन यादव

सारांश

मध्य प्रदेश ने इंदौर में सेमीकंडक्टर समिट 2026 आयोजित कर ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव हासिल किए और 10,000 से अधिक नौकरियों का लक्ष्य रखा। चिप डिज़ाइन से लेकर क्वांटम टेक्नोलॉजी तक — राज्य खुद को भारत के सेमीकंडक्टर मानचित्र पर स्थापित करने की दौड़ में है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 अक्टूबर 2026 को इंदौर में ₹5,800 करोड़ के सेमीकंडक्टर निवेश प्रस्तावों की घोषणा की।
इन प्रस्तावों से 10,000 से अधिक नौकरियाँ सृजित होने की संभावना है।
पाँच कंपनियों को भूमि आवंटन के आशय पत्र दिए गए; कुल ₹9,625 करोड़ निवेश और 4,450+ प्रत्यक्ष रोज़गार का अनुमान।
ग्वालियर में 50 मेगावाट का हाइपरस्केल डेटा सेंटर और भोपाल में लिथियम-सेल इकाई प्रमुख परियोजनाओं में शामिल।
राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता 5,000 मेगावाट से बढ़कर 32,000 मेगावाट हो गई है।
सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और फोटोनिक्स-क्वांटम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा की गई।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 अक्टूबर 2026 को इंदौर में घोषणा की कि राज्य को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में लगभग ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 10,000 से अधिक नौकरियाँ सृजित होने की संभावना है। यह घोषणा ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय 'मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026' के दौरान की गई, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्वीडन के प्रतिनिधियों सहित 1,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

समिट की मुख्य घोषणाएँ

समिट में राज्य सरकार ने चिप डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग और अन्य हाई-टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की योजनाएँ प्रस्तुत कीं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा, 'कोविड महामारी के दौरान सेमीकंडक्टर की कमी ने यह दिखा दिया कि अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह क्षेत्र कितना महत्वपूर्ण है।'

सरकार ने एक 'सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने की भी घोषणा की, जो चिप डिज़ाइन, वीएलएसआई (VLSI), अनुसंधान, प्रोटोटाइपिंग और कौशल विकास पर केंद्रित होगा। इसके साथ ही, फोटोनिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए एक अलग 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की भी घोषणा की गई।

भूमि आवंटन और प्रत्यक्ष निवेश

समिट के दौरान पाँच कंपनियों को ज़मीन आवंटन के लिए 'लेटर ऑफ इंटेंट' (आशय पत्र) प्रदान किए गए। इन परियोजनाओं में ₹9,625 करोड़ का निवेश और 4,450 से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है।

इन परियोजनाओं में ग्वालियर में 50 मेगावाट का हाइपरस्केल डेटा सेंटर, भोपाल में लिथियम-सेल निर्माण इकाई, तथा इंदौर और भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी सुविधाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सात कंपनियों को इंदौर के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स में ऑफिस स्पेस की पेशकश की गई, जिनसे 1,280 से अधिक रोज़गार पैदा होने की उम्मीद है।

राज्य की निवेश नीति और बुनियादी ढाँचा

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए 25 से अधिक नीतियाँ पेश की हैं। 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' और अन्य पहलों के माध्यम से लगभग ₹34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्ताव कार्यान्वयन चरण की ओर बढ़ रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता 5,000 मेगावाट से बढ़कर 32,000 मेगावाट हो गई है। यादव ने निवेशकों को त्वरित मंजूरी, 'सिंगल-विंडो' क्लीयरेंस और निर्बाध बिजली आपूर्ति का भरोसा दिलाया।

एमओयू और संस्थागत सहयोग

राज्य सरकार ने कौशल विकास, निवेश संवर्धन और उद्योग सहयोग के लिए पाँच संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया, सेमी इंडिया और सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी, मोहाली शामिल हैं।

गौरतलब है कि यह समिट ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार की सेमीकंडक्टर मिशन योजना के तहत राज्यों में चिप-मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की होड़ तेज़ हो गई है। मध्य प्रदेश की यह पहल गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा में राज्य की स्थिति मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

800 करोड़ के ये प्रस्ताव प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि 'इरादे' से 'कार्यान्वयन' तक का सफर कितना होगा — खासतौर पर जब राज्य के ₹34 लाख करोड़ के कुल निवेश प्रस्तावों में से केवल 30 प्रतिशत ही क्रियान्वयन चरण तक पहुँचे हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग की माँग — स्थिर जल आपूर्ति, अत्यंत विशिष्ट कौशल बल, और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला एकीकरण — मध्य प्रदेश के लिए नई चुनौतियाँ हैं जो महज़ बिजली क्षमता और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस से नहीं सुलझतीं। गुजरात और तमिलनाडु पहले से इस दौड़ में आगे हैं, इसलिए मध्य प्रदेश का दाँव सार्थक तभी होगा जब घोषित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ज़मीन पर उतरें और MoU साझेदारियाँ वास्तविक रोज़गार सृजन में बदलें।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 क्या है?
यह इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय उद्योग सम्मेलन है, जिसमें राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रदर्शित किए। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्वीडन सहित 1,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर निवेश से कितनी नौकरियाँ मिलेंगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्तावों से 10,000 से अधिक नौकरियाँ पैदा होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, पाँच कंपनियों को दिए गए आशय पत्रों के तहत ₹9,625 करोड़ निवेश और 4,450 से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार का अनुमान है।
मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्या होगा?
यह एक प्रस्तावित संस्थान है जो चिप डिज़ाइन, वीएलएसआई (VLSI), अनुसंधान, प्रोटोटाइपिंग और कौशल विकास पर केंद्रित होगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए एक अलग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भी घोषणा की गई है।
समिट में कौन-सी प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा हुई?
ग्वालियर में 50 मेगावाट का हाइपरस्केल डेटा सेंटर, भोपाल में लिथियम-सेल निर्माण इकाई, तथा इंदौर और भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक्स सुविधाएँ प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं। सात कंपनियों को इंदौर के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स में ऑफिस स्पेस भी दी गई, जिनसे 1,280 से अधिक रोज़गार की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में निवेशकों को क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
राज्य सरकार ने त्वरित मंजूरी, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और निर्बाध बिजली आपूर्ति की गारंटी दी है। राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता 5,000 मेगावाट से बढ़कर 32,000 मेगावाट हो चुकी है और पिछले ढाई वर्षों में 25 से अधिक निवेश-अनुकूल नीतियाँ भी पेश की गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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