मणिपुर के 36 समुदायों का समावेशी विकास ही राज्य की प्रगति की कुंजी: मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 30 मई 2026 को इंफाल में स्पष्ट कहा कि राज्य की शांति, समृद्धि और विकास तभी संभव है जब पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के सभी 36 समुदायों का समान और समावेशी विकास सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि किसी एक वर्ग या क्षेत्र को पीछे छोड़कर मणिपुर का समग्र उत्थान संभव नहीं है।
कार्यक्रम और संदर्भ
मुख्यमंत्री जनजातीय गरिमा उत्सव-2026 के अवसर पर पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (एसटी) योजना के लाभार्थी छात्रों के साथ आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम जनजातीय मामलों एवं पहाड़ी क्षेत्र विभाग द्वारा 'बिरसा लाइव्स इन न्यू भारत' सप्ताह के तहत आयोजित किया गया था। इस आयोजन में महान जनजातीय नेता बिरसा मुंडा को भी सम्मानित किया गया, जिनके योगदान को आदिवासी समाज के सशक्तिकरण की प्रेरणा के रूप में याद किया गया।
शांति और सद्भाव पर मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि विकास केवल शांतिपूर्ण और अनुकूल वातावरण में ही फल-फूल सकता है। उन्होंने कहा कि जातीय हिंसा और अशांति का सबसे अधिक खामियाजा छात्रों और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव और आपसी समझ को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ तथा संवाद को शांति स्थापना का एकमात्र माध्यम मानें। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर 2023 से जारी जातीय संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण की राह पर है।
छात्रवृत्ति में देरी और सरकार का आश्वासन
संवाद सत्र के दौरान कई छात्रों ने पिछले चार महीनों से छात्रवृत्ति राशि न मिलने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से राशि जारी की जा चुकी है, लेकिन आधार और बैंक खाते के लिंक न होने के कारण कई मामलों में भुगतान अटका हुआ है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए और छात्रों तक समय पर लाभ पहुँचे। चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों के कुकी-जो समुदाय के छात्रों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लेकर अपनी समस्याएँ और चिंताएँ साझा कीं।
उपमुख्यमंत्री का संबोधन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुईं उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन ने कहा कि पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना महज आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि यह छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और सपनों को साकार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने छात्रों से मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि गाँव और समुदाय के उत्थान के लिए भी होना चाहिए। किपजेन ने भरोसा दिलाया कि मणिपुर सरकार छात्रों की शैक्षणिक यात्रा में हर संभव सहयोग जारी रखेगी।
आगे की राह
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की सभी चिंताओं पर गंभीरता से विचार करेगी और आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय संघर्ष के बाद शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का निर्बाध क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। आधार-बैंक लिंकेज की समस्या सुलझाना और छात्रवृत्ति वितरण को सुचारु बनाना सरकार के सामने तत्काल चुनौती है।