मणिपुर में शांति के लिए संवाद ज़रूरी: मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 5 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि जातीय हिंसा से जूझ रहे राज्य में स्थायी शांति की बहाली का एकमात्र कारगर मार्ग संवाद है। इंफाल में एक स्थानीय टेलीविजन चैनल के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिना शांति के राज्य का विकास और प्रगति संभव नहीं है।
चुराचंदपुर दौरे से मिली उम्मीद
मुख्यमंत्री ने उसी दिन चुराचंदपुर की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर संतोष हुआ कि जिले में जातीय संकट के चरम के दौरान जो अशांति थी, उसका असर अब काफी हद तक कम हो चुका है। गौरतलब है कि चुराचंदपुर उन जिलों में रहा है जो मई 2023 से जारी जातीय टकराव में सबसे अधिक प्रभावित हुए थे।
शांति-विरोधी तत्वों पर कड़ी चेतावनी
सिंह ने स्वीकार किया कि कुछ स्वार्थी तत्व मौजूदा अराजक स्थिति से लाभ उठा रहे हैं और शांति बहाल नहीं होने देना चाहते। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे ऐसे लोगों को राज्य के सामूहिक पुनर्निर्माण प्रयासों को पटरी से उतारने का अवसर न दें। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि शांति भंग करने वालों की शीघ्र पहचान की जाएगी और उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता पर संकट का असर
सिंह ने कहा कि इस संकट ने राज्य की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व संग्रह को बुरी तरह प्रभावित किया है। उनके अनुसार, सबसे अधिक नुकसान युवा पीढ़ी, गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों को उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य में जारी अशांति के कारण छात्रों की पढ़ाई और भविष्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर विधायक खुमुकचम जॉयकिशन सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक चरणजीत सिंह और चैनल के संपादक जीत निंगोम्बा सहित मीडियाकर्मी, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी उपस्थित थे।
आगे की राह
मणिपुर में दो वर्षों से अधिक समय से जारी जातीय संकट के बीच मुख्यमंत्री का यह संदेश राज्य की जनता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। अब देखना यह होगा कि संवाद की यह पहल ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया कब तक ठोस रूप लेती है।