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मणिपुर में शांति के लिए संवाद ज़रूरी: मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह का आह्वान

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मणिपुर में शांति के लिए संवाद ज़रूरी: मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह का आह्वान

सारांश

दो वर्षों से अधिक समय से जातीय हिंसा में जल रहे मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने साफ़ कहा — शांति के बिना विकास नहीं, और शांति का रास्ता सिर्फ संवाद से होकर जाता है। साथ ही उन्होंने उन तत्वों को कड़ी चेतावनी दी जो अराजकता से फायदा उठा रहे हैं।

मुख्य बातें

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इंफाल में कहा कि राज्य में स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग संवाद है।
चुराचंदपुर दौरे के बाद उन्होंने कहा कि जिले में जातीय संकट के चरम की तुलना में अशांति का असर अब कम हुआ है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि शांति भंग करने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
संकट से सबसे अधिक प्रभावित युवा पीढ़ी, गरीब, दिहाड़ी मजदूर और छात्र बताए गए।
राज्य की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व संग्रह पर भी संकट का गंभीर असर स्वीकार किया गया।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 5 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि जातीय हिंसा से जूझ रहे राज्य में स्थायी शांति की बहाली का एकमात्र कारगर मार्ग संवाद है। इंफाल में एक स्थानीय टेलीविजन चैनल के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिना शांति के राज्य का विकास और प्रगति संभव नहीं है।

चुराचंदपुर दौरे से मिली उम्मीद

मुख्यमंत्री ने उसी दिन चुराचंदपुर की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर संतोष हुआ कि जिले में जातीय संकट के चरम के दौरान जो अशांति थी, उसका असर अब काफी हद तक कम हो चुका है। गौरतलब है कि चुराचंदपुर उन जिलों में रहा है जो मई 2023 से जारी जातीय टकराव में सबसे अधिक प्रभावित हुए थे।

शांति-विरोधी तत्वों पर कड़ी चेतावनी

सिंह ने स्वीकार किया कि कुछ स्वार्थी तत्व मौजूदा अराजक स्थिति से लाभ उठा रहे हैं और शांति बहाल नहीं होने देना चाहते। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे ऐसे लोगों को राज्य के सामूहिक पुनर्निर्माण प्रयासों को पटरी से उतारने का अवसर न दें। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि शांति भंग करने वालों की शीघ्र पहचान की जाएगी और उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता पर संकट का असर

सिंह ने कहा कि इस संकट ने राज्य की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व संग्रह को बुरी तरह प्रभावित किया है। उनके अनुसार, सबसे अधिक नुकसान युवा पीढ़ी, गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों को उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य में जारी अशांति के कारण छात्रों की पढ़ाई और भविष्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

इस अवसर पर विधायक खुमुकचम जॉयकिशन सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक चरणजीत सिंह और चैनल के संपादक जीत निंगोम्बा सहित मीडियाकर्मी, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी उपस्थित थे।

आगे की राह

मणिपुर में दो वर्षों से अधिक समय से जारी जातीय संकट के बीच मुख्यमंत्री का यह संदेश राज्य की जनता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। अब देखना यह होगा कि संवाद की यह पहल ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया कब तक ठोस रूप लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि दो वर्षों से अधिक समय बाद भी संवाद की ठोस रूपरेखा क्या है और किन समुदायों के प्रतिनिधियों को मेज पर बुलाया जा रहा है। 'शांति-विरोधी तत्वों' की पहचान और कार्रवाई की चेतावनी नई नहीं है — यह पहले भी दी जा चुकी है, पर ज़मीनी हिंसा का सिलसिला रुका नहीं। असली परीक्षा यह है कि सरकार विस्थापित समुदायों की घर-वापसी और राजस्व-संग्रह की बहाली के लिए कोई मापने योग्य समयसीमा देती है या नहीं — अन्यथा यह बयान भी उन अनेक आश्वासनों की सूची में जुड़ जाएगा जो मणिपुर संकट के दौरान दिए गए और भुला दिए गए।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शांति के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने का एकमात्र कारगर रास्ता संवाद है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना शांति के राज्य का विकास संभव नहीं है।
मणिपुर में जातीय संकट का आम जनता पर क्या असर पड़ा है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस संकट ने राज्य की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व संग्रह को बुरी तरह प्रभावित किया है। सबसे अधिक नुकसान युवा पीढ़ी, गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों को उठाना पड़ा है।
मुख्यमंत्री ने शांति-विरोधी तत्वों के बारे में क्या कहा?
सिंह ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व मौजूदा अराजक स्थिति से लाभ उठा रहे हैं और शांति बहाल नहीं होने देना चाहते। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे शांति-भंग करने वालों की जल्द पहचान की जाएगी और उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
चुराचंदपुर दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुराचंदपुर में जातीय संकट के चरम के दौरान जो अशांति थी, उसका असर अब काफी हद तक कम हो चुका है। यह जिला मई 2023 से जारी जातीय टकराव में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक रहा है।
मणिपुर में शांति बहाली के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
मुख्यमंत्री ने संवाद को मुख्य माध्यम बताया है और जनता से आग्रह किया है कि वे स्वार्थी तत्वों को शांति प्रयासों में बाधा न डालने दें। हालांकि, संवाद की ठोस समयसीमा या रूपरेखा के बारे में अभी तक कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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