झारखंड में 45 भर्ती परीक्षाएं प्रभावित: 22 रद्द, फास्ट ट्रैक कोर्ट और JPSC-JSSC में विजिलेंस सेल का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने 19 अगस्त 2026 को भर्ती परीक्षाओं में व्यापक गड़बड़ी के मद्देनज़र कैबिनेट की विशेष बैठक में कई अहम फैसले लिए, जिनके दायरे में राज्य की 45 नियुक्ति परीक्षाएं आती हैं। इन फैसलों के तहत परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने हेतु राज्य सरकार झारखंड हाईकोर्ट से आग्रह करेगी। कैबिनेट अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय परीक्षा प्रणाली में संस्थागत सुधार की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य की 45 नियुक्ति परीक्षाओं में व्यापक अनियमितताओं की आशंका के आधार पर सरकार ने तीन-स्तरीय कार्रवाई की है। इनमें से 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया है, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई है, और पूर्व में संपन्न 17 परीक्षाओं की जाँच का आदेश दिया गया है। यह जाँच सीआईडी (आपराधिक जाँच विभाग) और एसआईटी (विशेष जाँच दल) द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
JPSC और JSSC में निगरानी सेल
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में आंतरिक विजिलेंस सेल स्थापित किए जाएंगे। ये सेल दोनों आयोगों की परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण — परीक्षा एजेंसी के चयन से लेकर प्रश्नपत्र की तैयारी, प्रिंटिंग, सुरक्षित परिवहन, परीक्षा केंद्र व्यवस्था और परिणाम तैयार करने तक — पर सतत निगरानी रखेंगे। इसका उद्देश्य संभावित गड़बड़ियों को समय रहते पहचानकर उन्हें रोकना है।
उच्चस्तरीय सुधार समिति का गठन
सरकार ने JPSC और JSSC की समग्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इस समिति में राज्य के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों को भी शामिल किया जाएगा। समिति दोनों आयोगों की मौजूदा परीक्षा प्रणाली, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन करेगी और आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी।
आगे की राह
समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में परीक्षा घोटालों को लेकर अभ्यर्थियों और विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा था। गौरतलब है कि सीआईडी और एसआईटी की जाँच में सामने आए तथ्यों ने ही इस व्यापक कार्रवाई की ज़मीन तैयार की। भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए संस्थागत ढाँचे में बदलाव का यह क्रम अगले कुछ महीनों में और स्पष्ट होगा।