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झारखंड: JPSC-JSSC परीक्षाएं रद्द होने पर सैकड़ों अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे, 'इंसाफ दो या फांसी दो' के नारे

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झारखंड: JPSC-JSSC परीक्षाएं रद्द होने पर सैकड़ों अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे, 'इंसाफ दो या फांसी दो' के नारे

सारांश

झारखंड में JPSC-JSSC की 22 परीक्षाएं रद्द होने के बाद रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर सैकड़ों चयनित अभ्यर्थी रातभर डटे रहे। 'इंसाफ दो या फांसी दो' के नारों के साथ यह प्रदर्शन उन दो वर्गों के टकराव को उजागर करता है — एक जो पारदर्शिता चाहता है, दूसरा जो अपनी मेहनत से मिली नौकरी बचाना चाहता है।

मुख्य बातें

रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर 19 अगस्त से सैकड़ों चयनित अभ्यर्थी और प्रभावित कर्मचारी धरने पर हैं।
झारखंड सरकार ने CID जांच के आधार पर 22 परीक्षाएं रद्द , 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं में जांच का आदेश दिया।
वर्ष 2014 के बाद हुई सभी नियुक्तियों की समीक्षा का भी निर्णय लिया गया है।
कुछ अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर प्रोजेक्ट भवन परिसर में प्रवेश किया; बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात।
प्रदर्शनकारियों की मांग — दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी न छीनी जाए।
परीक्षा घोटाले के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों ने सरकार के फैसले को बड़ी जीत बताया है।

झारखंड की राजधानी रांची में 19 अगस्त को उस समय तनाव का माहौल बन गया जब जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की परीक्षाएं रद्द किए जाने के विरोध में सैकड़ों चयनित अभ्यर्थी और प्रभावित कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन (झारखंड मंत्रालय) के मुख्य द्वार पर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने 'इंसाफ दो या फांसी दो' के नारे लगाए और सरकार से यह फैसला वापस लेने की मांग की। सोमवार शाम से शुरू हुआ यह धरना तेज बारिश के बावजूद रातभर जारी रहा।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर सुरक्षा घेरा पार किया और प्रोजेक्ट भवन परिसर के भीतर प्रवेश कर गए। इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।

अभ्यर्थियों की पीड़ा और मांगें

प्रदर्शन कर रहे जेएसएससी-सीजीएल के सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल की थी। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उन्होंने अन्य स्थानों पर मिली नौकरियाँ छोड़कर झारखंड में सरकारी सेवा को प्राथमिकता दी थी। अब नौकरी समाप्त होने के बाद वे फिर से बेरोज़गारी की स्थिति में आ गए हैं और परिवार चलाने का संकट सामने खड़ा है।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'कल तक हम सचिवालय में कर्मचारी थे, आज सड़क पर खड़े हैं। हमारी क्या गलती है? अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन हमारी नौकरी क्यों छीनी जा रही है?'

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी अलग-अलग जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि कथित अनियमितता के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर निर्दोष अभ्यर्थियों को दंडित करना न्यायसंगत नहीं है।

सरकार का फैसला और उसकी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद झारखंड राज्य सरकार ने सीआईडी (CID) की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कड़ा कदम उठाया। सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द की हैं, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की है, और 17 परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है। इसके अलावा, वर्ष 2014 के बाद हुई नियुक्तियों की समीक्षा और जांच का भी निर्णय लिया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में परीक्षा घोटालों के खिलाफ छात्र आंदोलन काफी मुखर हो चुका था। परीक्षा में कथित गड़बड़ी के विरुद्ध आंदोलन करने वाले छात्रों ने सरकार के इस फैसले को अपनी बड़ी जीत बताया है।

दो पक्षों के बीच टकराव

यह विवाद दो वर्गों के बीच तीखे टकराव का रूप ले चुका है। एक तरफ वे छात्र हैं जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते हुए लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे, तो दूसरी तरफ वे चयनित अभ्यर्थी हैं जो खुद को निर्दोष बताते हुए अपनी नौकरी बचाने के लिए सड़क पर उतरे हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार को व्यक्तिगत मामलों की जांच कर दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहिए था।

आगे क्या होगा

फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना जारी है और प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी बात नहीं सुनती और उनके मामले में न्यायसंगत समाधान नहीं निकालती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। यह मामला अब राज्य की न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की परीक्षा भी बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बुनियादी न्यायिक खामी दिखती है — सामूहिक दंड। जब CID जांच व्यक्तिगत अनियमितताओं की पहचान कर सकती है, तो पूरी भर्ती को एकमुश्त रद्द करना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है जिन्होंने नियमों के भीतर चयन पाया। यह वही विरोधाभास है जो भारत में परीक्षा सुधार की बहस के केंद्र में है — पारदर्शिता की माँग और निर्दोष उम्मीदवारों की सुरक्षा, दोनों एक साथ साधना अब तक किसी राज्य सरकार के लिए आसान नहीं रहा। 2014 के बाद की सभी नियुक्तियों की समीक्षा का दायरा इतना व्यापक है कि इसे लागू करने में वर्षों लग सकते हैं, और तब तक हज़ारों परिवार अनिश्चितता में जीने को मजबूर रहेंगे।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाएं क्यों रद्द की गई हैं?
झारखंड सरकार ने CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर JPSC और JSSC की 22 परीक्षाएं रद्द की हैं। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद यह फैसला लिया गया, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं का आरोप था।
सरकार के इस फैसले से कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं?
सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द की हैं, 6 की प्रक्रिया स्थगित की है और 17 में जांच का आदेश दिया है। इसके अलावा 2014 के बाद हुई सभी नियुक्तियों की समीक्षा का निर्णय लिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी और कार्यरत कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि भर्ती में गड़बड़ी के दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन जिन अभ्यर्थियों का चयन नियमों के अनुसार हुआ है उनकी नौकरी न छीनी जाए। उनका कहना है कि व्यक्तिगत स्तर पर जांच कर निर्दोष और दोषी के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कब से जारी है और स्थिति क्या है?
19 अगस्त को सोमवार शाम से सैकड़ों अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जमा हैं। तेज बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी रातभर डटे रहे; कुछ ने बैरिकेडिंग तोड़कर परिसर में प्रवेश किया, जिसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
परीक्षा रद्द होने पर छात्र आंदोलन और चयनित अभ्यर्थियों के बीच क्या अंतर है?
परीक्षा घोटाले के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों ने सरकार के फैसले को बड़ी जीत बताया है। वहीं, चयनित अभ्यर्थी और प्रभावित कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि वे निर्दोष हैं और उन्हें दूसरों की गलती की सज़ा दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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