19 अगस्त 2026
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झारखंड CGL परीक्षा रद्द: 2,628 चयनित कर्मचारी सड़क पर, सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन

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झारखंड CGL परीक्षा रद्द: 2,628 चयनित कर्मचारी सड़क पर, सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन

सारांश

झारखंड सरकार ने एक झटके में 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दीं — और 2,628 लोग जो कल तक सचिवालय में काम कर रहे थे, आज सड़क पर हैं। कर्मचारियों का सवाल है: जब पाँच दिन पहले CID ने खामी नहीं मानी, तो अचानक यह फैसला क्यों? अब अदालत ही आखिरी उम्मीद है।

मुख्य बातें

झारखंड सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी की 22 भर्ती परीक्षाएं एक साथ रद्द कीं।
इस फैसले से 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं।
प्रभावित सीजीएल कर्मचारियों ने 19 अगस्त को झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों का आरोप — परीक्षा से पाँच दिन पहले तक सीआईडी ने किसी गड़बड़ी से इनकार किया था।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियुक्तियां हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थीं; न्यायालय से स्टे लेने की तैयारी।

झारखंड सरकार द्वारा जेपीएससी और जेएसएससी की 22 भर्ती परीक्षाएं एक साथ रद्द किए जाने के बाद 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां संकट में आ गई हैं। इस फैसले के विरोध में प्रभावित सीजीएल कर्मचारियों ने बुधवार, 19 अगस्त को झारखंड सचिवालय के सामने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने राज्य सरकार के इस निर्णय को मेहनतकश उम्मीदवारों के साथ घोर अन्याय बताया।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य सरकार ने नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि सीआईडी और जेएसएससी की जांच के दौरान कुछ साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर परीक्षाएं रद्द की गईं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि परीक्षा से महज पाँच दिन पहले तक सीआईडी ने किसी खामी से इनकार किया था, और फिर अचानक यह निर्णय क्यों लिया गया।

कर्मचारियों की आवाज़

प्रदर्शनकारी कर्मचारी चेन्ना कुमारी ने कहा, 'सरकार के इस फैसले की वजह से हमें सचिवालय से सीधे सड़कों पर उतरना पड़ा है। नौकरी खोने का मतलब सिर्फ नौकरी जाना नहीं है — इससे पूरे परिवार पर असर पड़ता है।'

चंदन कुमार ने कहा, 'जो लोग अपनी मेहनत के बल पर नौकरी पाए हैं, उनकी क्या गलती है? यह सरकार और सिस्टम की नाकामी है। हम एजेंसी देखकर परीक्षा नहीं देते — सरकार के विज्ञापन और भर्ती के आधार पर तैयारी करते हैं।'

अर्चना ने कानूनी पहलू उठाते हुए कहा, 'कोर्ट ने आदेश दिया था कि गड़बड़ी में शामिल पाए जाने वाले लोगों को हटाया जाए, न कि पूरी सीजीएल परीक्षा ही रद्द कर दी जाए। असल सबूत क्या हैं और क्या इसके लिए अलग-अलग उम्मीदवार जिम्मेदार हैं?'

कशिश कुमारी ने बताया, 'कल तक हम सचिवालय में काम कर रहे थे, आज सड़क पर हैं। हम न्यायालय से सरकार के फैसले पर स्टे लगवाने के लिए प्रयास करेंगे।'

न्यायिक आधार पर सवाल

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनकी नियुक्तियां हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर की गई थीं और अब उस फैसले को ही बेबुनियाद बताना न्यायपालिका को कमज़ोर करना है। एक अन्य कर्मचारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सालों की मेहनत से मिली नौकरियां 'खैरात' नहीं थीं।

आम जनता और उम्मीदवारों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पहले से ही विवादों में घिरी रही है। 2,628 प्रभावित उम्मीदवारों में से अधिकांश पहले से कार्यरत थे और उनके परिवार इन नौकरियों पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि यह झारखंड में एक साथ सबसे अधिक परीक्षाएं रद्द किए जाने का मामला है।

क्या होगा आगे

प्रभावित कर्मचारियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है। सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत सफाई नहीं दी है कि वे 'साक्ष्य' क्या हैं जिनके आधार पर पूरी परीक्षा श्रृंखला रद्द की गई। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति और न्यायपालिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत विफलता की स्वीकारोक्ति है — और उसकी कीमत 2,628 निर्दोष उम्मीदवार चुका रहे हैं। अगर गड़बड़ी में शामिल लोगों की पहचान संभव थी, जैसा कि हाईकोर्ट ने भी कहा था, तो पूरी परीक्षा रद्द करना अनुपातहीन कदम है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीआईडी ने पाँच दिन पहले क्लीन चिट दी और अचानक पलटी क्यों — इस विरोधाभास का जवाब सरकार को देना होगा, वरना यह मामला राज्य की भर्ती प्रणाली में जनता का भरोसा और गहरा तोड़ेगा।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में CGL परीक्षा रद्द क्यों की गई?
झारखंड सरकार ने नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए जेपीएससी और जेएसएससी की 22 परीक्षाएं रद्द कीं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, सीआईडी और जेएसएससी की जांच में कुछ साक्ष्य मिले थे, हालांकि उनका विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस फैसले से कितने उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं?
इस फैसले से 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। ये वे उम्मीदवार हैं जो पहले से कार्यरत थे या नियुक्ति पत्र पा चुके थे।
प्रदर्शनकारी कर्मचारी क्या माँग कर रहे हैं?
कर्मचारी सरकार के फैसले को वापस लेने की माँग कर रहे हैं और न्यायालय से स्टे आदेश लेने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि गड़बड़ी में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों पर कार्रवाई हो, न कि पूरी परीक्षा रद्द की जाए।
क्या हाईकोर्ट का इस मामले से कोई संबंध है?
हाँ, प्रदर्शनकारियों के अनुसार उनकी नियुक्तियां हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर हुई थीं। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि कोर्ट ने पहले कहा था कि केवल गड़बड़ी में शामिल लोगों को हटाया जाए, पूरी परीक्षा रद्द न की जाए।
सीआईडी की भूमिका इस विवाद में क्या रही?
कर्मचारियों का आरोप है कि परीक्षा रद्द होने से महज पाँच दिन पहले तक सीआईडी ने कहा था कि परीक्षा में कोई खामी नहीं है। इस अचानक पलटाव ने उम्मीदवारों में गहरा रोष पैदा किया है और सरकार की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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