झारखंड CGL परीक्षा रद्द: 2,628 चयनित कर्मचारी सड़क पर, सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार द्वारा जेपीएससी और जेएसएससी की 22 भर्ती परीक्षाएं एक साथ रद्द किए जाने के बाद 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां संकट में आ गई हैं। इस फैसले के विरोध में प्रभावित सीजीएल कर्मचारियों ने बुधवार, 19 अगस्त को झारखंड सचिवालय के सामने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने राज्य सरकार के इस निर्णय को मेहनतकश उम्मीदवारों के साथ घोर अन्याय बताया।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य सरकार ने नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि सीआईडी और जेएसएससी की जांच के दौरान कुछ साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर परीक्षाएं रद्द की गईं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि परीक्षा से महज पाँच दिन पहले तक सीआईडी ने किसी खामी से इनकार किया था, और फिर अचानक यह निर्णय क्यों लिया गया।
कर्मचारियों की आवाज़
प्रदर्शनकारी कर्मचारी चेन्ना कुमारी ने कहा, 'सरकार के इस फैसले की वजह से हमें सचिवालय से सीधे सड़कों पर उतरना पड़ा है। नौकरी खोने का मतलब सिर्फ नौकरी जाना नहीं है — इससे पूरे परिवार पर असर पड़ता है।'
चंदन कुमार ने कहा, 'जो लोग अपनी मेहनत के बल पर नौकरी पाए हैं, उनकी क्या गलती है? यह सरकार और सिस्टम की नाकामी है। हम एजेंसी देखकर परीक्षा नहीं देते — सरकार के विज्ञापन और भर्ती के आधार पर तैयारी करते हैं।'
अर्चना ने कानूनी पहलू उठाते हुए कहा, 'कोर्ट ने आदेश दिया था कि गड़बड़ी में शामिल पाए जाने वाले लोगों को हटाया जाए, न कि पूरी सीजीएल परीक्षा ही रद्द कर दी जाए। असल सबूत क्या हैं और क्या इसके लिए अलग-अलग उम्मीदवार जिम्मेदार हैं?'
कशिश कुमारी ने बताया, 'कल तक हम सचिवालय में काम कर रहे थे, आज सड़क पर हैं। हम न्यायालय से सरकार के फैसले पर स्टे लगवाने के लिए प्रयास करेंगे।'
न्यायिक आधार पर सवाल
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनकी नियुक्तियां हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर की गई थीं और अब उस फैसले को ही बेबुनियाद बताना न्यायपालिका को कमज़ोर करना है। एक अन्य कर्मचारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सालों की मेहनत से मिली नौकरियां 'खैरात' नहीं थीं।
आम जनता और उम्मीदवारों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पहले से ही विवादों में घिरी रही है। 2,628 प्रभावित उम्मीदवारों में से अधिकांश पहले से कार्यरत थे और उनके परिवार इन नौकरियों पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि यह झारखंड में एक साथ सबसे अधिक परीक्षाएं रद्द किए जाने का मामला है।
क्या होगा आगे
प्रभावित कर्मचारियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है। सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत सफाई नहीं दी है कि वे 'साक्ष्य' क्या हैं जिनके आधार पर पूरी परीक्षा श्रृंखला रद्द की गई। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति और न्यायपालिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षण बन सकता है।