झारखंड में 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, 2,628 अधिकारियों-कर्मियों की नौकरी पर संकट — JPSC-JSSC घोटाले पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने 19 अगस्त 2026 को नियुक्ति परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) द्वारा आयोजित 22 भर्ती परीक्षाएं एक साथ रद्द कर दीं। सीआईडी (CID) और एसआईटी (SIT) की जांच में उजागर हुए तथ्यों के आधार पर लिए गए इन फैसलों से 2,628 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं।
कितने और कौन प्रभावित हुए
रद्द की गई परीक्षाओं के दायरे में आने वाले अभ्यर्थियों में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के माध्यम से नियुक्त 342 अधिकारी, 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, 63 एसडीपीओ और 237 महिला पर्यवेक्षिका शामिल हैं। इसके अलावा जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) — विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा — से नियुक्त 1,932 कर्मचारी भी इस कार्रवाई की जद में हैं। ये सभी या तो अलग-अलग विभागों में कार्यरत थे या इनके नियुक्ति आदेश जारी हो चुके थे।
कौन-सी परीक्षाएं रद्द हुईं
झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2023 और 2025 की नियमित एवं बैकलॉग परीक्षाएं रद्द की गई हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक एवं महिला पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर, मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर, सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक वन संरक्षक, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सहायक लोक अभियोजक और झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET)-2024 से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। टीडीपीएल (TDPL) से संबंधित कई भर्ती परीक्षाओं को भी इसी दायरे में लाया गया है।
छह परीक्षाएं स्थगित, 17 की जांच के आदेश
सरकार ने फूड एनालिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन, डायरेक्टर, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज और बॉयलर इंस्पेक्टर की भर्ती प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित किया है। इन परीक्षाओं की प्रारंभिक प्रक्रिया टीडीपीएल के अतिरिक्त अन्य एजेंसियों के माध्यम से कराई गई थी, और उन एजेंसियों की विश्वसनीयता एवं भूमिका की जांच सीआईडी को सौंपी गई है। इसके अलावा वर्ष 2014 से अब तक आयोजित 17 भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया गया है, जिनमें पाँचवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2013, सिविल जज की विभिन्न परीक्षाएं, मृदा संरक्षण अधिकारी, कृषि अधिकारी, डेंटिस्ट, भूविज्ञानी-रसायनज्ञ और सहायक अभियंता की परीक्षाएं शामिल हैं।
सुधार के लिए तीन बड़े कदम
राज्य सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तीन महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं। पहला, कथित अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। दूसरा, जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा प्रक्रिया पर निगरानी के लिए आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। तीसरा, परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को भी सदस्य बनाया जाएगा।
अधिसूचनाएं और आगे की प्रक्रिया
राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने मंगलवार रात 11.45 बजे इस संदर्भ में कुल आठ अधिसूचनाएं जारी कीं। विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी इन अधिसूचनाओं में स्पष्ट किया गया है कि सभी फैसले सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं। उच्चस्तरीय समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यह कार्रवाई झारखंड में सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।