4 अक्टूबर 2026
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हार्दिक सिंह का खुलासा: वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ी फैंस से ज़्यादा निराश थे, एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड था असली लक्ष्य

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हार्दिक सिंह का खुलासा: वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ी फैंस से ज़्यादा निराश थे, एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड था असली लक्ष्य

सारांश

वर्ल्ड कप की तीखी आलोचना के बाद भारतीय हॉकी टीम ने नागोया में इतिहास रच दिया — एशियन गेम्स गोल्ड का बचाव और LA ओलंपिक 2028 का टिकट एक साथ। हार्दिक सिंह का खुलासा: उस हार के बाद खिलाड़ी फैंस से भी ज़्यादा टूटे हुए थे — और यही दर्द उन्हें वापस चैंपियन बना गया।

मुख्य बातें

भारत ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष हॉकी का गोल्ड मेडल सफलतापूर्वक बरकरार रखा — यह पहली बार है जब भारत ने यह उपलब्धि हासिल की।
यह भारत का एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का पाँचवाँ गोल्ड मेडल है — इससे पहले 1966, 1998, 2014 और 2023 में जीता था।
हरमनप्रीत सिंह एशियन गेम्स में भारत को दो गोल्ड दिलाने वाले पहले भारतीय हॉकी कप्तान बने।
टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल किया।
मिडफील्डर हार्दिक सिंह ने कहा कि वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ी फैंस से ज़्यादा निराश थे और गोल्ड जीतना ही एकमात्र लक्ष्य था।
एफआईएच वर्ल्ड कप में भारत नीदरलैंड (1 3) और अर्जेंटीना (3 5) से हारकर सेमीफाइनल से बाहर हो गया था।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मिडफील्डर हार्दिक सिंह ने 4 अक्टूबर 2026 को नागोया में एशियन गेम्स गोल्ड मेडल जीतने के बाद एक भावुक स्वीकारोक्ति की — एफआईएच वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल से बाहर होने के बाद खिलाड़ी फैंस से कहीं अधिक टूटे हुए थे, और एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना उनके लिए सबसे अहम लक्ष्य था। शनिवार को हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारत ने एशियन गेम्स में हॉकी गोल्ड का सफलतापूर्वक बचाव किया और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया।

ऐतिहासिक स्वर्णिम उपलब्धि

यह पहली बार है जब भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का गोल्ड मेडल लगातार दूसरी बार बरकरार रखा है। हरमनप्रीत सिंह इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में टीम को दो गोल्ड मेडल दिलाने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं। यह भारत का एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का पाँचवाँ गोल्ड मेडल है — इससे पहले भारत 1966, 1998, 2014 और 2023 में भी चैंपियन रहा था।

वर्ल्ड कप की निराशा और खिलाड़ियों का दर्द

अगस्त में हुए एफआईएच वर्ल्ड कप में भारतीय टीम नीदरलैंड से 1 3 और अर्जेंटीना से 3 5 से हारकर पूल ई में सबसे नीचे रही और सेमीफाइनल से चूक गई। इसके बाद टीम को फैंस और विशेषज्ञों की तीखी आलोचना झेलनी पड़ी।

हार्दिक ने कहा, "वर्ल्ड कप के बाद फैंस और मीडिया निराश थे। हालांकि, आपको नहीं पता कि खिलाड़ियों के मन में क्या चल रहा होता है। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से यह बहुत मुश्किल था क्योंकि हम जानते थे कि टोक्यो ओलंपिक में हम अंडरडॉग थे। पेरिस में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है, और हमारा देश हमारे साथ था। वर्ल्ड कप में भी उम्मीदें थीं।" गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया जब टीम ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद देश की सर्वोच्च उम्मीद बन चुकी थी।

हार्दिक की फैंस से अपील

हार्दिक ने फैंस से अनुरोध किया कि वे सिर्फ बड़े टूर्नामेंट में नहीं, बल्कि पूरी हॉकी यात्रा में टीम का साथ दें। उन्होंने कहा, "अगर आप हमारा हौसला बढ़ाना चाहते हैं, तो सिर्फ वर्ल्ड कप के लिए ही न आएं। हमारी लीग के भी मैच होते हैं। आप वहां आकर हमें खेलते हुए देख सकते हैं। खिलाड़ियों से ज़्यादा निराश कोई नहीं होता।"

उन्होंने बेल्जियम के फैंस का उदाहरण भी दिया। हार्दिक के अनुसार, जब बेल्जियम हॉकी वर्ल्ड कप में सातवें स्थान पर रही, तब भी उनके सोशल मीडिया पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं थी। उन्होंने कहा, "हम सचमुच सोच रहे थे, 'ये हैं असली फैंस।' अगर आप हमारा समर्थन करना चाहते हैं, तो कृपया आगे आएं और हमारी हॉकी यात्रा को फॉलो करें।"

गोल्ड जीतने के बाद भावनाओं का उफान

हार्दिक ने बताया कि टीम पिछले पाँच छह दिनों से ठीक से सो नहीं पाई थी। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल जीतना ही एकमात्र लक्ष्य था — जो वर्ल्ड कप में नहीं हुआ, वह एशियन गेम्स में करना था, और पूरी दुनिया को भारतीय हॉकी की ताकत दिखानी थी। अब जब वह लक्ष्य पूरा हो गया है, टीम ओलंपिक की तैयारी नई ऊर्जा के साथ शुरू करेगी।

लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का सीधा टिकट मिलने के साथ भारतीय पुरुष हॉकी टीम एक नए युग की दहलीज़ पर खड़ी है — और इस बार उम्मीदों का बोझ पिछले किसी भी दौर से बड़ा होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हार के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जवाबदेह बनाने में देर नहीं लगाते। बेल्जियम के फैंस का उनका संदर्भ महज़ भावुक अपील नहीं है, बल्कि एक नीतिगत प्रश्न है: क्या भारतीय हॉकी लीग को उसी ध्यान और दर्शक संख्या मिलती है जो टीम को बड़े टूर्नामेंट में मिलती है? जब तक घरेलू हॉकी को वह समर्थन नहीं मिलता, वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंचों पर निरंतर सफलता की उम्मीद करना एकतरफा सौदा है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने एशियन गेम्स 2026 में हॉकी में क्या उपलब्धि हासिल की?
भारत ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष हॉकी का गोल्ड मेडल जीतकर अपने 2023 के खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया — यह पहली बार है जब भारत ने लगातार दो बार यह गोल्ड जीता। साथ ही टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया।
हार्दिक सिंह ने वर्ल्ड कप की निराशा के बारे में क्या कहा?
हार्दिक सिंह ने कहा कि वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ी फैंस से भी ज़्यादा निराश थे। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक के अच्छे प्रदर्शन के बाद वर्ल्ड कप में भी उम्मीदें थीं, और सेमीफाइनल से बाहर होना व्यक्तिगत रूप से बेहद मुश्किल था।
हरमनप्रीत सिंह ने एशियन गेम्स हॉकी में क्या रिकॉर्ड बनाया?
हरमनप्रीत सिंह एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को दो गोल्ड मेडल दिलाने वाले पहले कप्तान बन गए हैं। उन्होंने 2023 और 2026 दोनों में टीम की अगुवाई की।
भारत ने एशियन गेम्स में हॉकी में कितनी बार गोल्ड जीता है?
2026 का गोल्ड भारत का एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का पाँचवाँ स्वर्ण पदक है। इससे पहले भारत 1966, 1998, 2014 और 2023 में चैंपियन रहा था।
हार्दिक सिंह ने फैंस से क्या अपील की?
हार्दिक सिंह ने फैंस से अनुरोध किया कि वे सिर्फ वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में ही नहीं, बल्कि हॉकी लीग के मैचों में भी टीम का समर्थन करें। उन्होंने बेल्जियम के फैंस का उदाहरण देते हुए कहा कि असली समर्थन हार में भी साथ खड़े रहना है।
राष्ट्र प्रेस
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