एशियन गेम्स 2026: हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम जापान रवाना, गोल्ड से मिलेगा LA ओलंपिक टिकट
सारांश
मुख्य बातें
कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय पुरुष हॉकी टीम 8 सितंबर 2026 की मंगलवार शाम जापान के लिए रवाना हो गई, जहाँ आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक एशियन गेम्स 2026 आयोजित होगा। टीम का प्राथमिक लक्ष्य 2023 एशियन गेम्स में जीते गए स्वर्ण पदक को बरकरार रखना है, क्योंकि इस बार गोल्ड जीतने पर LA 2028 ओलंपिक के लिए सीधी क्वालिफिकेशन भी दाँव पर है।
वर्ल्ड कप की निराशा से उबरकर नई चुनौती
भारतीय टीम ने पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित FIH हॉकी वर्ल्ड कप में 8वाँ स्थान हासिल किया था — एक ऐसा प्रदर्शन जो टीम की काबिलियत के अनुरूप नहीं माना गया। अहम मुकाबलों में निरंतरता की कमी उस अभियान का सबसे बड़ा कमज़ोर पहलू रहा।
अब टीम उस कड़वे अनुभव को सबक के रूप में लेकर जापान में अधिक संयमित और अनुशासित प्रदर्शन की कोशिश करेगी। हेड कोच क्रेग फुल्टन चाहते हैं कि खिलाड़ी अंतिम परिणाम की चिंता छोड़कर रणनीतिक योजनाओं को मैदान पर सटीक ढंग से उतारने पर ध्यान दें।
पूल-ए में भारत का कार्यक्रम
चार बार की एशियन गेम्स चैंपियन भारत को पूल-ए में मेजबान जापान, साउथ कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ रखा गया है। डिफेंडिंग चैंपियन अपने अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ करेंगे और पूल चरण का समापन 28 सितंबर को बांग्लादेश के विरुद्ध होगा।
नॉकआउट चरण में 1 अक्टूबर को सेमीफाइनल और 3 अक्टूबर को फाइनल खेला जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब एशियाई हॉकी में भारत की प्रभुता को दक्षिण कोरिया और मेजबान जापान से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है।
ओलंपिक क्वालिफिकेशन का दबाव
गौरतलब है कि एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक LA 2028 ओलंपिक के लिए सीधी क्वालिफिकेशन की चाबी है। इसलिए यह टूर्नामेंट महज़ एक कॉन्टिनेंटल खिताब की लड़ाई नहीं, बल्कि ओलंपिक तैयारी का अहम पड़ाव भी है।
भारत ने 2023 एशियन गेम्स और एशिया कप — दोनों में गोल्ड जीतकर पिछले दशक में एशियाई हॉकी में खुद को शीर्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया है। मौजूदा चैंपियन के रूप में टीम पर उस विरासत को आगे बढ़ाने का दोहरा दबाव होगा।
आगे की राह
कोच फुल्टन के मार्गदर्शन में टीम का ध्यान प्रक्रिया पर केंद्रित रहेगा — विशेष रूप से पेनल्टी कॉर्नर रूपांतरण और डिफेंसिव संरचना पर, जो वर्ल्ड कप में कमज़ोर कड़ी साबित हुई थी। भारतीय हॉकी प्रशंसकों की निगाहें अब आइची-नागोया पर टिकी हैं, जहाँ टीम लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक का रास्ता पक्का करने उतरेगी।