एशियन गेम्स 2026: भारत के 85 मेडल और महिला हॉकी का 44 साल बाद गोल्ड — 5 ऐतिहासिक पल
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 21 गोल्ड सहित कुल 85 मेडल जीतकर अपना अब तक का एक बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया। यह टूर्नामेंट केवल पदक तालिका तक सीमित नहीं रहा — इसमें एक के बाद एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण आए, जो दशकों की प्रतीक्षा के बाद साकार हुए। महिला हॉकी में स्वर्ण से लेकर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में पहले पदक तक, 5 अक्टूबर 2026 को समापन के साथ यह आयोजन भारतीय खेल इतिहास में एक नया अध्याय बन गया।
महिला हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड
भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में वह कर दिखाया जो 1982 के बाद कोई भारतीय टीम नहीं कर पाई थी। कप्तान सलीमा टेटे की अगुआई में टीम ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया और फाइनल में चीन को 1-0 के कड़े मुकाबले में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
यह जीत महज एक खिताब नहीं — 44 साल के लंबे सूखे का अंत है। गौरतलब है कि भारतीय महिला हॉकी ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मज़बूत की है, और यह स्वर्ण उसी मेहनत की परिणति है।
एमएमए में भारत का पहला पदक
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में भारत ने एशियन गेम्स इतिहास में पहली बार पदक जीता। सुचिका तारियाल ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
हालाँकि वह अपना सेमीफाइनल मुकाबला हार गईं, जिससे गोल्ड या सिल्वर की दावेदारी समाप्त हो गई, फिर भी एशियन गेम्स के मंच पर यह पहला MMA पदक भारतीय खेलों के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
सॉफ्ट टेनिस और रोइंग में पहला मेडल
सॉफ्ट टेनिस को इस बार एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किया गया था। भारत की ओर से जय मीणा ने पुरुष वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इस नए खेल में देश का पहला पदक दर्ज कराया।
इसके साथ ही रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने डबल स्कल्स स्पर्धा में भारत को पहला पदक दिलाया। दोनों खेलों में मिले ये पदक दर्शाते हैं कि भारत अब परंपरागत खेलों से आगे बढ़कर विविध स्पर्धाओं में भी अपनी दावेदारी पेश कर रहा है।
अनाहत सिंह और बरनिका इलांगोवन का ऐतिहासिक प्रदर्शन
अनाहत सिंह एशियन गेम्स 2026 में स्क्वैश के सिंगल्स फाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। वह गोल्ड से चूक गईं, लेकिन सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने भारतीय स्क्वैश में एक नया इतिहास रचा।
वहीं, पोल वॉल्ट में बरनिका इलांगोवन ने एशियन गेम्स में भारत को इस स्पर्धा का पहला पदक दिलाया। उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया, जो भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
मीराबाई चानू और सावन बरवाल का लंबा इंतजार खत्म
भारत की महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 28 साल का सूखा खत्म करते हुए एशियन गेम्स में पहली बार पदक जीता। उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया, जो उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है।
मैराथन में सावन बरवाल ने 1982 के बाद भारत को इस स्पर्धा का पहला पदक दिलाया। वे सिल्वर मेडल जीतकर स्वदेश लौटे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में लंबी दूरी की दौड़ में नई प्रतिभाएँ उभर रही हैं। कुल मिलाकर, एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए महज एक आयोजन नहीं, बल्कि खेलों में एक नई पीढ़ी के उदय का प्रमाण बना।