झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL और CDPO नियुक्तियाँ रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को JSSC-CGL और सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में शुक्रवार को चार अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई, जो झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द किए जाने के विरुद्ध दाखिल की गई थीं।
मुख्य घटनाक्रम
इससे एक दिन पूर्व, गुरुवार को अदालत ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर पदों पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर भी अंतरिम रोक लगाई थी। शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित आयोगों से जवाब तलब किया है — विशेष रूप से यह बताने को कहा है कि इन परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के पीछे क्या कानूनी आधार और CID जाँच में क्या तथ्य सामने आए हैं।
समयसीमा और अगली सुनवाई
अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 7 सितंबर तक का समय दिया है। याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब पर प्रति-उत्तर दाखिल करने के लिए 14 सितंबर तक की मोहलत दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है। महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत से अनुरोध किया कि इस प्रकार के सभी मामलों में शपथपत्र दाखिल करने के लिए एक समान समयसीमा तय की जाए।
सरकार का मूल फैसला
गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने 18 अगस्त की देर रात कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही CID जाँच के आधार पर बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाला फैसला लिया था। सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और वर्ष 2014 से हुई 17 अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को जाँच के दायरे में रखने की घोषणा की थी। इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने संबंधित अधिसूचनाएँ जारी की थीं।
आम अभ्यर्थियों पर असर
इन फैसलों से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं जिन्होंने परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर नियुक्तियाँ हासिल की थीं और कई मामलों में सेवा भी शुरू कर दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने सीडीपीओ परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने और JSSC-CGL नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश दोनों को कानूनी चुनौती दी है।
क्या होगा आगे
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद अब सरकार के फैसले का कानूनी आधार, CID जाँच के निष्कर्ष और नियुक्त अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकार — ये तीनों पहलू केंद्र में आ गए हैं। 15 सितंबर की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की संभावना है कि रोक को स्थायी रूप दिया जाएगा या नहीं।