21 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जेपीएससी 11वीं-13वीं परीक्षा रद्द अधिसूचना पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार, 15 सितंबर को फास्ट ट्रैक सुनवाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जेपीएससी 11वीं-13वीं परीक्षा रद्द अधिसूचना पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार, 15 सितंबर को फास्ट ट्रैक सुनवाई

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं और 13वीं परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर रोक बरकरार रखी है। नियुक्त अभ्यर्थी पद पर बने रहेंगे, जबकि राज्य सरकार पर साक्ष्य पेश करने का दबाव है। 15 सितंबर को फास्ट ट्रैक सुनवाई में हज़ारों अभ्यर्थियों का भविष्य तय होगा।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को जेपीएससी की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर रोक बरकरार रखी।
अगली सुनवाई 15 सितंबर को फास्ट ट्रैक आधार पर होगी; सभी पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करना होगा।
रद्द परीक्षाओं के आधार पर नियुक्त अभ्यर्थी फिलहाल पद पर बने रहेंगे, उन्हें हटाया नहीं जाएगा।
अधिवक्ता कुमार हर्ष ने मेरिटोरियस अभ्यर्थियों की ओर से इंटरवीनर आवेदन दायर किया; जाँच दस्तावेज़ अदालत में पेश करने की माँग।
राज्य सरकार पर आरोप कि वह भ्रष्टाचार से जुड़े साक्ष्य अदालत के सामने लाने से बच रही है।

झारखंड हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर लगाई गई रोक को बरकरार रखा। अदालत ने राज्य सरकार, याचिकाकर्ताओं और अन्य सभी पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर के लिए निर्धारित की और स्पष्ट किया कि इस मामले की फास्ट ट्रैक आधार पर सुनवाई होगी।

कोर्ट का रुख और मुख्य आदेश

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर रोक जारी रहेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यवस्था देते हुए कहा कि रद्द परीक्षाओं के आधार पर जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है, वे फिलहाल विधिसम्मत तरीके से अपना कार्य जारी रखेंगे और उन्हें पद से नहीं हटाया जाएगा। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यह मामला सफल और असफल दोनों श्रेणियों के अभ्यर्थियों के हितों से जुड़ा है।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रेरणा झुनझुनवाला ने बताया कि अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े पूर्व मामलों में मिली अंतरिम राहत के आधार पर इस मामले में भी रोक की माँग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

इंटरवीनर पक्ष की दलीलें

मेरिटोरियस अभ्यर्थियों की ओर से इंटरवीनर आवेदन दायर करने वाले अधिवक्ता कुमार हर्ष ने राज्य सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार, जिन भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर परीक्षाएँ रद्द की गई हैं, उनसे संबंधित जाँच एजेंसियों के दस्तावेज़ और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

कुमार हर्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं की दलीलों का विरोध करने के बजाय इंटरवीनर आवेदन का विरोध करने में अधिक सक्रिय है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जाँच एजेंसियों द्वारा अब तक सामने आए सभी तथ्य और दस्तावेज़ राज्य सरकार अपने हलफनामे के साथ रिकॉर्ड पर लाए। हालाँकि, राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अदालत उन्हें ऐसा निर्देश नहीं दे सकती।

मामले का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि जेपीएससी की परीक्षाओं को लेकर झारखंड में यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएँ भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते रद्द की गई थीं, जिससे हज़ारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

अदालत का यह रुख संकेत देता है कि वह मामले को गंभीरता से ले रही है और साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय करेगी।

आगे क्या होगा

झारखंड हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को करेगा, जिसमें राज्य सरकार सहित सभी पक्षों के लिखित जवाब और हलफनामों पर विचार किया जाएगा। फास्ट ट्रैक सुनवाई के निर्देश से यह स्पष्ट है कि अदालत इस मामले का शीघ्र निपटारा चाहती है, जिससे हज़ारों अभ्यर्थियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जाँच दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने में संकोच क्यों? इंटरवीनर पक्ष का यह तर्क कि सरकार याचिकाकर्ताओं से लड़ने के बजाय इंटरवीनर का विरोध कर रही है, एक असुविधाजनक प्रश्न खड़ा करता है। 15 सितंबर की सुनवाई केवल कानूनी नहीं, बल्कि हज़ारों अभ्यर्थियों के भविष्य और झारखंड की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता की भी परीक्षा होगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी 11वीं और 13वीं परीक्षा रद्द करने पर हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
झारखंड हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को जेपीएससी की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर लगाई गई रोक को बरकरार रखा। अदालत ने सभी पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और 15 सितंबर को फास्ट ट्रैक सुनवाई तय की।
जेपीएससी परीक्षा के आधार पर नियुक्त अभ्यर्थियों का क्या होगा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रद्द परीक्षाओं के आधार पर पहले से नियुक्त अभ्यर्थी फिलहाल विधिसम्मत तरीके से अपना कार्य जारी रखेंगे और उन्हें पद से नहीं हटाया जाएगा। यह अंतरिम व्यवस्था अगली सुनवाई तक लागू रहेगी।
जेपीएससी परीक्षा मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। अदालत ने फास्ट ट्रैक सुनवाई का निर्देश दिया है, जिसमें राज्य सरकार सहित सभी पक्षों के जवाब और हलफनामों पर विचार होगा।
इंटरवीनर पक्ष ने अदालत में क्या माँग की?
मेरिटोरियस अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने इंटरवीनर आवेदन दायर किया और माँग की कि जाँच एजेंसियों द्वारा अब तक सामने आए सभी दस्तावेज़ और साक्ष्य राज्य सरकार अपने हलफनामे के साथ अदालत में पेश करे। राज्य सरकार ने इस माँग का विरोध किया।
जेपीएससी परीक्षाएँ किस आधार पर रद्द की गई थीं?
जेपीएससी की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएँ भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर रद्द की गई थीं। अदालत में अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि इन आरोपों से जुड़े जाँच एजेंसियों के दस्तावेज़ और साक्ष्य अदालत के सामने क्यों नहीं लाए जा रहे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 10 घंटे पहले
  4. कल
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले