ममता बनर्जी भाजपा की एजेंट — डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस का बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) के नेता रिजु दत्ता ने 5 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि वे कथित तौर पर एक राजनीतिक समझौते के तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हित में काम कर रही हैं। उन्होंने रुक्मिणी मलिक के नामांकन, समान नागरिक संहिता (UCC), ममता बनर्जी के 15 दिन के अल्टीमेटम और चुनाव आयोग से जुड़े कई अहम सवालों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा।
ममता और भाजपा के बीच कथित गठजोड़ के आरोप
रिजु दत्ता ने दावा किया कि डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस पहले दिन से ममता बनर्जी और भाजपा के बीच के रिश्तों पर सवाल उठाती रही है। उनके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दिया और बाद में उन्हें भाजपा का टिकट मिला — यह घटनाक्रम उनकी नज़र में किसी आंतरिक समझ का प्रमाण है।
दत्ता ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी के भतीजे से जुड़े मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की जाँच की गति और दिशा भी इस कथित राजनीतिक समझौते की ओर इशारा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन में रखकर उस गठबंधन को भीतर से कमज़ोर करने की रणनीति अपनाई।
रुक्मिणी मलिक के नामांकन पर पार्टी का रुख
रुक्मिणी मलिक के नामांकन को रिजु दत्ता ने व्यक्तिगत फैसला करार दिया और इस पर पार्टी की ओर से कोई सामूहिक स्थिति नहीं बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को पार्टी लाइन से अलग रखा जाएगा।
समान नागरिक संहिता पर सतर्क रुख
समान नागरिक संहिता (UCC) के बारे में दत्ता ने कहा कि यह भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रहा है और अब इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि UCC बिल फिलहाल विधानसभा की समिति के पास विचाराधीन है।
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक समिति की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आती, पार्टी इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी नहीं करेगी। हालाँकि, दत्ता ने यह भी जोड़ा कि यदि कानून बनने के बाद संविधान में धर्म के पालन के अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो पार्टी विधानसभा के भीतर और ज़रूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर भी विरोध करेगी।
ममता के 15 दिन के अल्टीमेटम पर तीखा जवाब
ममता बनर्जी ने कथित तौर पर पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को 15 दिन के भीतर वापस लौटने का संदेश दिया है। इस पर रिजु दत्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी को अभी राजनीति की नहीं, बल्कि इलाज की ज़रूरत है।
दत्ता ने इस बयान को अंतर्विरोधी बताया — एक तरफ पार्टी छोड़ने वालों को 'बेईमान, गद्दार और चोर' कहा जाता है और दूसरी तरफ उन्हें वापसी का न्योता दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस का कोई भी सदस्य ममता बनर्जी के पास नहीं जाएगा और न ही उनका फोन उठाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पिछले 15 वर्षों के शासनकाल में भ्रष्टाचार और आम लोगों तथा सरकारी कर्मचारियों के साथ कथित अत्याचार के आरोप भी लगाए।
चुनाव आयोग पर टिप्पणी से परहेज़
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर दत्ता ने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक दल का इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है और पार्टी इस विषय पर कोई राजनीतिक अभिमत नहीं देगी — अदालत जो निर्णय लेगी, उसका पालन होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में दलबदल और गठबंधन की समीकरणों को लेकर हलचल जारी है। आने वाले हफ्तों में UCC समिति की रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई इस राजनीतिक परिदृश्य को और स्पष्ट करेगी।