टीएमसी की अंदरूनी कलह: रिजू दत्ता का बड़ा आरोप — ममता ने 2011 के बाद बंगाल में कांग्रेस को खत्म किया
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक विद्रोह एक बार फिर खुलकर सामने आया है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के संगठन डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने 20 सितंबर 2026 को कोलकाता में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सीधे और तीखे आरोप लगाए। दत्ता ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को सुनियोजित तरीके से नष्ट किया है।
ममता पर विश्वासघात का आरोप
रिजू दत्ता ने आरोप लगाते हुए कहा, 'अगर इतिहास में कांग्रेस के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किसी ने किया है तो वो ममता बनर्जी हैं।' उन्होंने कहा कि ममता ने पहले राजीव गांधी के आशीर्वाद से चुनाव लड़ा, फिर सक्रिय रूप से कांग्रेस को तोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई। दत्ता के अनुसार, 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता ने कांग्रेस नेताओं को या तो जेल भेजा या तृणमूल में शामिल होने के लिए मजबूर किया।
अभिषेक बनर्जी और सुमित रॉय पर निशाना
दत्ता ने यह भी दावा किया कि सुमित रॉय पिछले 15 वर्षों में बंगाल में हुए भ्रष्टाचार का 'पिटारा' है। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले मिदनापुर कोर्ट में सीआईडी ने अपने फॉरवर्डिंग लेटर में यह खुलासा किया कि सुमित रॉय ने स्वीकार किया है कि वह अभिषेक बनर्जी के निर्देशों पर काम करता था। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब टीएमसी पहले से ही कई विवादों से घिरी हुई है।
चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट प्रकरण
रिजू दत्ता ने चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न फ्रीज़ किए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और पार्टी को अपना पक्ष रखने के दो अवसर दिए, और दोनों बार ममता के कानूनी सलाहकार कल्याण बनर्जी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। दत्ता ने सवाल किया कि इसके बावजूद अब सुप्रीम कोर्ट जाने का क्या अर्थ है।
नौशाद सिद्दीकी पर टिप्पणी
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता ने इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आईएसएफ एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी बंगाल के विपक्षी खेमे में मौजूद आपसी तनाव को उजागर करती है।
आगे क्या होगा
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और मूल टीएमसी के बीच बढ़ती दरार पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकती है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंदरूनी कलह से विपक्षी गठबंधन को नई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।