20 सितंबर 2026
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टीएमसी की अंदरूनी कलह: रिजू दत्ता का बड़ा आरोप — ममता ने 2011 के बाद बंगाल में कांग्रेस को खत्म किया

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टीएमसी की अंदरूनी कलह: रिजू दत्ता का बड़ा आरोप — ममता ने 2011 के बाद बंगाल में कांग्रेस को खत्म किया

सारांश

तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई अब सड़क पर आ गई है। डेमोक्रेटिक टीएमसी के रिजू दत्ता ने ममता पर कांग्रेस को जानबूझकर खत्म करने और अभिषेक बनर्जी पर सीआईडी जाँच में नाम आने का आरोप लगाया है — बंगाल की राजनीति में यह दरार और गहरी होती दिख रही है।

मुख्य बातें

रिजू दत्ता (डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस) ने 20 सितंबर 2026 को ममता बनर्जी पर कांग्रेस के साथ 'इतिहास का सबसे बड़ा विश्वासघात' करने का आरोप लगाया।
दत्ता का दावा — ममता ने 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद बंगाल में कांग्रेस नेताओं को जेल भेजा या पार्टी में शामिल होने पर मजबूर किया।
मिदनापुर कोर्ट में सीआईडी के फॉरवर्डिंग लेटर में कथित तौर पर सुमित रॉय ने स्वीकार किया कि वह अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर काम करता था।
चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी का चुनाव चिह्न फ्रीज़ किए जाने के बाद ममता सुप्रीम कोर्ट गई हैं; दत्ता ने इस कदम पर सवाल उठाए।
ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी पर भी दत्ता ने निशाना साधा, आईएसएफ को गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी बताया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक विद्रोह एक बार फिर खुलकर सामने आया है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के संगठन डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने 20 सितंबर 2026 को कोलकाता में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सीधे और तीखे आरोप लगाए। दत्ता ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को सुनियोजित तरीके से नष्ट किया है।

ममता पर विश्वासघात का आरोप

रिजू दत्ता ने आरोप लगाते हुए कहा, 'अगर इतिहास में कांग्रेस के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किसी ने किया है तो वो ममता बनर्जी हैं।' उन्होंने कहा कि ममता ने पहले राजीव गांधी के आशीर्वाद से चुनाव लड़ा, फिर सक्रिय रूप से कांग्रेस को तोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई। दत्ता के अनुसार, 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता ने कांग्रेस नेताओं को या तो जेल भेजा या तृणमूल में शामिल होने के लिए मजबूर किया।

अभिषेक बनर्जी और सुमित रॉय पर निशाना

दत्ता ने यह भी दावा किया कि सुमित रॉय पिछले 15 वर्षों में बंगाल में हुए भ्रष्टाचार का 'पिटारा' है। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले मिदनापुर कोर्ट में सीआईडी ने अपने फॉरवर्डिंग लेटर में यह खुलासा किया कि सुमित रॉय ने स्वीकार किया है कि वह अभिषेक बनर्जी के निर्देशों पर काम करता था। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब टीएमसी पहले से ही कई विवादों से घिरी हुई है।

चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट प्रकरण

रिजू दत्ता ने चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न फ्रीज़ किए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और पार्टी को अपना पक्ष रखने के दो अवसर दिए, और दोनों बार ममता के कानूनी सलाहकार कल्याण बनर्जी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। दत्ता ने सवाल किया कि इसके बावजूद अब सुप्रीम कोर्ट जाने का क्या अर्थ है।

नौशाद सिद्दीकी पर टिप्पणी

डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता ने इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आईएसएफ एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी बंगाल के विपक्षी खेमे में मौजूद आपसी तनाव को उजागर करती है।

आगे क्या होगा

डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और मूल टीएमसी के बीच बढ़ती दरार पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकती है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंदरूनी कलह से विपक्षी गठबंधन को नई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार सुमित रॉय और सीआईडी का संदर्भ जोड़ा जाना इन्हें महज़ राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठाता है। असली सवाल यह है कि क्या ऋतब्रत बनर्जी गुट की यह धमक बंगाल के विपक्षी समीकरण को बदल सकती है, या यह कलह केवल चुनाव-पूर्व सौदेबाजी का हिस्सा है। चुनाव चिह्न फ्रीज़ और सुप्रीम कोर्ट याचिका के संदर्भ में यह विवाद टीएमसी के संस्थागत वैधता-संकट को और उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि इस 'अंदरूनी लड़ाई' से सबसे ज़्यादा फायदा भाजपा को हो सकता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिजू दत्ता कौन हैं और उन्होंने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
रिजू दत्ता डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (ऋतब्रत बनर्जी गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद बंगाल में कांग्रेस को सुनियोजित तरीके से नष्ट किया और नेताओं को जेल भेजा या टीएमसी में मिलाया।
अभिषेक बनर्जी और सुमित रॉय का मामला क्या है?
रिजू दत्ता के अनुसार, मिदनापुर कोर्ट में सीआईडी के फॉरवर्डिंग लेटर में दर्ज है कि सुमित रॉय ने खुलासा किया कि वह अभिषेक बनर्जी के निर्देशों पर काम करता था। दत्ता ने सुमित रॉय को पिछले 15 वर्षों के बंगाल के भ्रष्टाचार का 'पिटारा' बताया।
टीएमसी का चुनाव चिह्न फ्रीज़ क्यों हुआ और अब मामला कहाँ है?
चुनाव आयोग ने टीएमसी को अपना पक्ष रखने के दो अवसर दिए, जिनमें कानूनी सलाहकार कल्याण बनर्जी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। आयोग के चुनाव चिह्न फ्रीज़ करने के फैसले के बाद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट गई हैं।
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और मूल टीएमसी में क्या फर्क है?
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी से अलग हुआ एक गुट है जो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की नीतियों का विरोध करता है। यह संगठन मूल टीएमसी के नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप लगाता रहा है।
इस कलह का बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
टीएमसी की अंदरूनी दरार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन की एकता को कमज़ोर कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस कलह का सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है, जो पहले से बंगाल में अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में है।
राष्ट्र प्रेस
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