24 जुलाई 2026
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टीएमसी में 20 सांसदों की बगावत: जदयू बोला — ममता और अभिषेक बनर्जी के लिए मुश्किल दौर शुरू

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टीएमसी में 20 सांसदों की बगावत: जदयू बोला — ममता और अभिषेक बनर्जी के लिए मुश्किल दौर शुरू

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद टीएमसी में 20 सांसदों की बगावत ने पार्टी को भीतर से हिला दिया है। जदयू ने इसे अभिषेक बनर्जी के तानाशाहीपूर्ण रवैये का नतीजा बताया और साफ कहा — ममता बनर्जी का नेतृत्व अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।

मुख्य बातें

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने 9 जून 2026 को कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए आने वाला समय कठिन होगा।
कथित तौर पर 20 बागी टीएमसी सांसद एनडीए सरकार को समर्थन देने की दिशा में हैं।
काकोली घोष सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अविश्वास जताया है।
टीएमसी के एक गुट ने कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।
विधायक दल की औपचारिक विघटन की घोषणा हो चुकी है; नेता प्रतिपक्ष का पद टीएमसी-विरोधी खेमे को मिला।
जदयू ने 'इंडिया' गठबंधन को 'सिर्फ फोटो खिंचवाने का मंच' करार दिया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 20 सांसदों की बगावत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने 9 जून 2026 को पटना में कहा कि आने वाला समय ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए कठिन साबित होगा। उनके अनुसार, अभिषेक बनर्जी के कथित तानाशाहीपूर्ण रवैये ने पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को खत्म कर दिया, जिसकी परिणति इस बड़े विद्रोह के रूप में सामने आई है।

मुख्य घटनाक्रम

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'टीएमसी लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में सत्ता में रही। जैसे ही जनता ने सत्ता से बेदखल किया, पार्टी के अंदर की गुटबाजी सार्वजनिक रूप से बाहर आ चुकी है।' उन्होंने कहा कि पहले विधानमंडल दल का विभाजन हुआ और अब बड़ी संख्या में सांसदों का विद्रोह सामने आया है। कथित तौर पर ये 20 बागी सांसद एनडीए सरकार को समर्थन देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

वरिष्ठ नेताओं का असंतोष

जदयू प्रवक्ता ने कहा कि काकोली घोष सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अविश्वास जताया है। रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी का एक अलग गुट केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मिला है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में ममता बनर्जी की मौजूदगी के बावजूद इन सांसदों ने उनसे मिलना उचित नहीं समझा। इसके साथ ही विधायक दल की औपचारिक विघटन की घोषणा भी हो चुकी है और नेता प्रतिपक्ष का पद भी टीएमसी विरोधी खेमे को मिला है।

टीएमसी के भविष्य पर सवाल

राजीव रंजन प्रसाद ने साफ शब्दों में कहा, 'टीएमसी आने वाले समय में ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम नहीं करेगी। गिने-चुने सांसद और विधायक ही उनकी अगुवाई में आगे जाने का मन बना रहे हैं। हो सकता है कि भविष्य में वे भी साथ छोड़ दें।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

इंडिया गठबंधन पर निशाना

जदयू प्रवक्ता ने 'इंडिया' ब्लॉक पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, 'यह गठबंधन सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए है। न विचार मिलते हैं, न मुद्दों पर सहमति है और न ही नेतृत्व तय है।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने शानदार सफलताएँ हासिल की हैं, और इंडिया गठबंधन को एनडीए के विकल्प के रूप में देखना 'हास्यास्पद' होगा।

आगे क्या

टीएमसी में यह बगावत पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, बागी सांसदों का एनडीए के करीब जाना और विधायक दल का विघटन टीएमसी के संगठनात्मक ढाँचे के लिए गंभीर चुनौती है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि ममता बनर्जी इस संकट से पार्टी को उबार पाती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इसे उसी परिप्रेक्ष्य में पढ़ा जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी — जो दशकों से बंगाल की राजनीति की धुरी रही हैं — इस संकट को अपने पुनर्गठन का अवसर बना पाएँगी, या यह विभाजन स्थायी साबित होगा। 'इंडिया' गठबंधन के लिए यह संकट और भी गहरा संदेश है: जब सबसे बड़े घटक दल खुद बिखर रहे हों, तो विपक्षी एकता की बात बेमानी लगती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी में 20 सांसदों की बगावत क्या है?
कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से विद्रोह कर एनडीए सरकार को समर्थन देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह बगावत पश्चिम बंगाल में टीएमसी के सत्ता से बाहर होने के बाद सामने आई है।
जदयू ने टीएमसी बगावत पर क्या कहा?
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के तानाशाहीपूर्ण रवैये ने पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र का गला घोंट दिया था, इसलिए यह बगावत अपरिहार्य थी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी आगे काम नहीं कर पाएगी।
क्या ममता बनर्जी का नेतृत्व खतरे में है?
जदयू के अनुसार गिने-चुने सांसद और विधायक ही अब ममता बनर्जी की अगुवाई में आगे जाने का मन बना रहे हैं। काकोली घोष सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके नेतृत्व पर अविश्वास जताया है।
इंडिया गठबंधन पर जदयू का क्या रुख है?
जदयू प्रवक्ता ने 'इंडिया' गठबंधन को 'सिर्फ फोटो खिंचवाने का मंच' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन में न विचारों की एकता है, न मुद्दों पर सहमति और न ही नेतृत्व तय है।
टीएमसी के विधायक दल का क्या हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार विधायक दल की औपचारिक विघटन की घोषणा हो चुकी है और नेता प्रतिपक्ष का पद टीएमसी-विरोधी खेमे को मिला है। यह पार्टी के संगठनात्मक संकट का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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