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टीएमसी में टूट की आहट: ममता बनर्जी के सामने पार्टी बचाने की बड़ी चुनौती, जदयू नेताओं का तीखा वार

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टीएमसी में टूट की आहट: ममता बनर्जी के सामने पार्टी बचाने की बड़ी चुनौती, जदयू नेताओं का तीखा वार

सारांश

अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी का कोलकाता में विरोध प्रदर्शन — लेकिन असली संकट बाहर नहीं, भीतर है। जदयू नेताओं ने कहा: विधायकों की बैठक से गायबी, पार्षदों का पलायन और शांतनु सेन जैसे नेताओं का विद्रोह — यह टीएमसी के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।

मुख्य बातें

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि टीएमसी जनता का विश्वास खोने का जवाब नहीं दे पा रही है।
विधायक दल की बैठक में टीएमसी विधायकों की कम उपस्थिति को जदयू ने ममता के घटते समर्थन का प्रमाण बताया।
चुनाव नतीजों के बाद बड़ी संख्या में पार्षदों ने टीएमसी छोड़ी; शांतनु सेन समेत कई बड़े नेता ममता के खिलाफ।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा — सत्ता बदलने के बाद जनप्रतिनिधियों में 'बाहर निकलने की छटपटाहट' है।
ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद कोलकाता में सड़क पर उतरकर BJP के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता में किए गए विरोध प्रदर्शन पर जनता दल (यूनाइटेड) — जदयू — के नेताओं ने 2 जून को तीखी प्रतिक्रिया दी है। जदयू नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती अंतर्कलह और विधायकों के घटते समर्थन के बीच पार्टी को एकजुट रखना ममता के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन गई है।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार का हमला

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, 'टीएमसी को प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन आत्म-अवलोकन करने का दायित्व भी है। अभिषेक बनर्जी पर हमला दुखद है, मगर कानूनी लड़ाई से बेहतर आप जनता की लड़ाई मानते हैं — इसका आपको अधिकार है।' उन्होंने आगे कहा कि 'जनता ने आपसे ममता करना क्यों छोड़ दिया, इसका जवाब टीएमसी नहीं दे पा रही है।'

टीएमसी के भीतर दरार पर नीरज कुमार ने कहा, 'अगर इस पार्टी में दरार है और इस क्रम में यह जवाब दिया जाना कि 'जिसको जाना है जाए' — यह अहंकार को दर्शाता है। अहंकार से राजनीति में कभी एकजुटता नहीं होती, बल्कि विखंडन होता है, और इसका उदाहरण टीएमसी है।'

राजीव रंजन प्रसाद की चेतावनी

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा, 'विधायक दल की बैठक में विधायकों की बहुत ही कम उपस्थिति से स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में विधायकों का विश्वास ममता बनर्जी के साथ नहीं है।'

प्रसाद ने यह भी बताया कि चुनावी नतीजों के बाद बड़ी संख्या में पार्षदों ने टीएमसी का दामन छोड़ा है और शांतनु सेन सहित कई बड़े नेताओं ने ममता बनर्जी के खिलाफ स्टैंड लिया है। उनके अनुसार, 'ये टीएमसी में एक बड़ी टूट का कारण हो सकता है।'

पार्टी में डर बनाम विद्रोह

राजीव रंजन प्रसाद ने यह भी कहा कि 'भय की वजह से अनेक जनप्रतिनिधि ममता बनर्जी के साथ थे, लेकिन जब सरकार बदली है तो उन जनप्रतिनिधियों के अंदर बाहर निकलने की छटपटाहट है।' यह बयान इस ओर संकेत करता है कि सत्ता-परिवर्तन के बाद टीएमसी की पकड़ कमज़ोर पड़ रही है।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हालिया हमले के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया। वे इस हमले के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में टीएमसी के संगठनात्मक ढाँचे पर और दबाव बढ़ सकता है, और ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा अब शुरू हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह सतह के नीचे की असली दरार को उजागर करता है। विधायकों की बैठक से गायबी और पार्षदों का पलायन महज़ संख्या नहीं, बल्कि संगठनात्मक क्षरण के संकेत हैं। यह ऐसे दल के लिए चेतावनी है जो दशकों से 'एक नेता, एक पार्टी' की छवि पर टिका रहा। जब सत्ता का संरक्षण हटता है, तो अनुशासन नहीं — भय था — यह अब खुलकर सामने आ रहा है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने कोलकाता में विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हालिया हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने कोलकाता में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। वे इस हमले के लिए BJP को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।
जदयू ने टीएमसी पर क्या आरोप लगाए?
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि टीएमसी जनता का विश्वास खोने का जवाब नहीं दे पा रही और पार्टी में 'जिसको जाना है जाए' जैसे बयान अहंकार दर्शाते हैं। जदयू के अनुसार, यही अहंकार पार्टी के विखंडन की जड़ है।
टीएमसी में अंतर्कलह के क्या संकेत हैं?
जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, विधायक दल की बैठक में विधायकों की कम उपस्थिति, चुनाव के बाद बड़ी संख्या में पार्षदों का पार्टी छोड़ना और शांतनु सेन जैसे नेताओं का ममता बनर्जी के खिलाफ स्टैंड लेना — ये सभी टीएमसी में बड़ी टूट के संकेत हैं।
शांतनु सेन कौन हैं और वे टीएमसी के लिए मुश्किल क्यों बन सकते हैं?
शांतनु सेन टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता हैं, जिन्होंने कथित तौर पर ममता बनर्जी के खिलाफ स्टैंड लिया है। जदयू के अनुसार, उनके जैसे बड़े नाम पार्टी में और अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।
क्या टीएमसी में बड़ी टूट हो सकती है?
जदयू नेताओं का कहना है कि सत्ता-परिवर्तन के बाद कई जनप्रतिनिधि जो डर की वजह से टीएमसी में थे, अब बाहर निकलने की कोशिश में हैं। यह स्थिति टीएमसी में एक बड़ी टूट का कारण बन सकती है, हालाँकि इसकी पुष्टि अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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