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नेपाल बाढ़: 9 दिन सुरंग में फंसे संजय साह जिंदा निकाले, पत्नी लक्ष्मी की आँखों में खुशी के आँसू

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नेपाल बाढ़: 9 दिन सुरंग में फंसे संजय साह जिंदा निकाले, पत्नी लक्ष्मी की आँखों में खुशी के आँसू

सारांश

9 दिन की अंधेरी सुरंग के बाद जिंदगी ने रोशनी देखी — नेपाल सेना ने अपर त्रिशूली 3-ए परियोजना से संजय साह और कबीर महर्जन को जीवित निकाला। लेकिन राहत की यह खबर उस बड़े दर्द के बीच आई है जिसमें 1,259 लोग जान गँवा चुके हैं और 945 कर्मचारी अब भी लापता हैं।

मुख्य बातें

संजय साह (30 वर्ष, फोरमैन) और कबीर महर्जन (45 वर्ष, सुपरवाइजर) को शुक्रवार, 4 सितंबर की सुबह 9 दिन बाद सुरंग से जीवित निकाला गया।
बचाव अभियान नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की संयुक्त टीम ने चलाया।
NDRRMA के अनुसार नेपाल बाढ़ में अब तक 1,259 मौतें और 5,053 लोग लापता ।
बाढ़-प्रभावित 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 945 कर्मचारियों से संपर्क नहीं।
लक्ष्मी कुमारी साह ने बताया कि सुबह 8:30 बजे पति के बचाए जाने की खबर मिली, वे काठमांडू जा रही हैं।

नेपाल के बाढ़-प्रभावित अपर त्रिशूली 3-ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से शुक्रवार, 4 सितंबर की सुबह दो कर्मचारियों को जीवित बाहर निकाला गया — जो 9 दिनों की अंधेरी कैद के बाद एक चमत्कारी राहत है। नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की संयुक्त बचाव टीम ने संजय साह (30 वर्ष) और कबीर महर्जन (45 वर्ष) को सुरक्षित निकाला, जिससे उनके परिजनों और बचाव दलों में उम्मीद की नई लहर दौड़ गई।

परिवार में खुशी की लहर

संजय साह की पत्नी लक्ष्मी कुमारी साह ने कहा, 'मेरे पति के सुरक्षित बच जाने की खबर से मैं बहुत खुश हूँ। इससे पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। मैं घर पर थी जब शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे उनके बचाए जाने की खबर मिली। इस खबर ने हमारे परिवार को अपार खुशी दी है।' लक्ष्मी ने बताया कि पिछले 9 दिन उनके और पूरे परिवार के लिए बेहद दुख और चिंता में बीते। वह अब काठमांडू जाकर अपने पति से मिलेंगी।

कौन हैं बचाए गए दोनों कर्मचारी

संजय साह इस परियोजना में फोरमैन के पद पर कार्यरत थे और नेपाल के दक्षिणी जिले सप्तरी के निवासी हैं। उनके साथ बचाए गए कबीर महर्जन परियोजना के हाइड्रोपावर ऑटोमेशन विभाग में सुपरवाइजर के रूप में काम करते थे। दोनों पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से सुरंग के अंदर फंसे हुए थे।

बाढ़ की भयावहता: 1,259 मौतें, 5,053 लापता

नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के आँकड़ों के अनुसार, गुरुवार शाम तक इस आपदा में 1,259 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 5,053 लोग अभी भी लापता हैं। निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों के संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने बताया कि बाढ़-प्रभावित 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे करीब 945 लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है।

सेना का संदेश और उम्मीद की किरण

नेपाली सेना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा था, 'अंधेरे के बाद जिंदगी ने फिर रोशनी देखी है। त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग के अंदर से दो लोगों को जिंदा निकाला गया है। बचाव अभियान जारी है।' इन दोनों के सुरक्षित निकाले जाने से यह उम्मीद बलवती हुई है कि अन्य बाढ़-प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को भी जीवित बचाया जा सकता है।

आगे की राह

बचाव दल अभी भी अन्य परियोजनाओं में फंसे सैकड़ों कर्मचारियों की तलाश में जुटे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल मानसून की सबसे विनाशकारी बाढ़ों में से एक से जूझ रहा है और राहत-बचाव अभियान तेज़ गति से जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस विशाल मानवीय संकट की एक छोटी-सी झलक है जो नेपाल में अभी भी बरकरार है — 945 कर्मचारी अभी भी लापता हैं और 11 परियोजनाएँ प्रभावित हैं। गौरतलब है कि नेपाल की जलविद्युत परियोजनाएँ अक्सर दूरदराज़ और भूस्खलन-संवेदनशील इलाकों में बनती हैं, फिर भी मानसूनी आपदाओं के लिए आपातकालीन प्रोटोकॉल पर्याप्त नहीं दिखते। 1,259 मौतें और हज़ारों लापता यह सवाल उठाती हैं कि क्या इन परियोजनाओं में काम करने वाले मज़दूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा ढाँचा मौजूद है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल की सुरंग से कौन-कौन से कर्मचारी जीवित निकाले गए?
अपर त्रिशूली 3-ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से फोरमैन संजय साह (30 वर्ष, सप्तरी निवासी) और हाइड्रोपावर ऑटोमेशन विभाग के सुपरवाइजर कबीर महर्जन (45 वर्ष) को 9 दिन बाद जीवित बाहर निकाला गया। दोनों को नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की संयुक्त टीम ने शुक्रवार सुबह बचाया।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितनी मौतें हुई हैं और कितने लोग लापता हैं?
NDRRMA के आँकड़ों के अनुसार गुरुवार शाम तक नेपाल बाढ़ में 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,053 लोग अभी भी लापता हैं। इसके अलावा 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 945 कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पाया है।
संजय साह की पत्नी ने बचाव की खबर पर क्या कहा?
लक्ष्मी कुमारी साह ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे उन्हें पति के बचाए जाने की खबर मिली, जिससे पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने कहा कि पिछले 9 दिन बेहद दुख और चिंता में बीते और वे अब काठमांडू जाकर पति से मिलेंगी।
अपर त्रिशूली 3-ए जलविद्युत परियोजना पर बाढ़ का क्या असर हुआ?
पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ ने इस परियोजना को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे कई कर्मचारी सुरंग के अंदर फंस गए। यह नेपाल की उन 11 जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है जो इस बाढ़ से प्रभावित हुई हैं।
क्या अन्य सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को भी बचाया जा सकेगा?
संजय साह और कबीर महर्जन के जीवित निकाले जाने से बचाव दलों में उम्मीद बढ़ी है कि अन्य परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को भी सुरक्षित निकाला जा सकता है। नेपाल सेना के अनुसार बचाव अभियान जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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