नेपाल बाढ़: भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे-लांगटांग सुरंगों में शुरू किया बचाव अभियान, 897 लोग अब भी लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की टनल रेस्क्यू टीम ने 31 अगस्त को चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान तेज़ कर दिया है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (IPPAN) के अनुसार, बाढ़ प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 897 लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।
बचाव अभियान का विवरण
भारतीय दूतावास, काठमांडू ने सोमवार को बताया कि भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने हेलीकॉप्टर से चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों का प्रारंभिक हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद पंप और एक्सकेवेटर (खुदाई मशीनें) मौके पर पहुंचाकर बचाव कार्य आरंभ किया गया। दूतावास ने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम आगे भी नेपाली सेना के साथ करीबी समन्वय में खोज और बचाव अभियान जारी रखेगी।
नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री के सचिवालय ने पुष्टि की कि भारतीय टीम ने आवश्यकता के अनुसार आगे भी अभियान चलाने की योजना बनाई है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल सरकार ने स्वयं भारत और चीन दोनों से सुरंग विशेषज्ञों को बुलाया है।
चिलिमे परियोजना में बाधा
IPPAN के अनुसार, रविवार को रसुवा में स्थित 22 मेगावाट क्षमता वाली चिलिमे जलविद्युत परियोजना में चल रहा बचाव अभियान उस समय अस्थायी रूप से रोकना पड़ा जब एक और बाढ़ आई और बांध क्षेत्र में पिछली बाढ़ से बची हुई संरचनाओं को भी बहा ले गई। यह स्थिति बचाव दल के लिए गंभीर चुनौती बन गई।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने रविवार देर रात एक फेसबुक पोस्ट में कहा, "रसुवा की लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना में नेपाल सेना ने खोज और बचाव गश्त अभियान चलाया। भारतीय टीम ने भी नेपाल सेना के साथ मिलकर इलाके का निरीक्षण किया है और पंप तथा एक्सकेवेटर वहां पहुंचाने के बाद अतिरिक्त बचाव कार्य शुरू कर दिया है।"
बचाए गए नागरिक
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे 7 भारतीय और 15 चीनी नागरिकों को रविवार को सुरक्षित बचा लिया गया। गौरतलब है कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन दोनों देशों के सुरंग विशेषज्ञ काठमांडू पहुंचे हैं और बचाव कार्य में सक्रिय हैं।
व्यापक प्रभाव और आगे की स्थिति
IPPAN के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट जिलों की 11 जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत 897 लोग अभी भी लापता हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। यह संख्या इस आपदा की गंभीरता को रेखांकित करती है। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने निजी क्षेत्र की कई जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय, चीनी और नेपाली श्रमिक कार्यरत थे। बचाव अभियान तब तक जारी रहने की उम्मीद है जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता।