27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़ में मृतक संख्या 270 पहुँची, 800 से अधिक से संपर्क टूटा; 300 भारतीय तीर्थयात्री लापता

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नेपाल बाढ़ में मृतक संख्या 270 पहुँची, 800 से अधिक से संपर्क टूटा; 300 भारतीय तीर्थयात्री लापता

सारांश

भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में 270 जानें लीं, 800 से संपर्क टूटा। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले करीब 300 भारतीय तीर्थयात्री लापता हैं। कई पनबिजली परियोजनाओं के सैकड़ों कर्मचारी भी गायब — नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा, नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।

मुख्य बातें

नेपाल पुलिस के अनुसार 27 अगस्त 2026 तक बाढ़ में 270 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
सर्वाधिक 108 शव चितवन से, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 62 , धाडिंग से 27 और रसुवा से 17 शव मिले।
बुनियादी ढाँचे के ध्वस्त होने के कारण 800 से अधिक लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने करीब 300 भारतीय नागरिकों के लापता होने की पुष्टि की, जिनमें अधिकतर कैलाश मानसरोवर यात्री हैं।
कुल मिलाकर 500 से अधिक विदेशी नागरिक लापता; एंड्रिट्ज हाइड्रो के 76 सहित कई पनबिजली परियोजनाओं के कर्मचारी भी गायब।
चीन के तिब्बती क्षेत्र से उफनी भोटेकोशी नदी ने रिहायशी इलाकों, कस्टम कार्यालयों और बिजली ढाँचे को नष्ट किया।

नेपाल पुलिस ने 27 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 270 लोगों की मौत हो चुकी है और नदी के बहाव वाले कई जिलों में शव बरामदगी का सिलसिला जारी है। चीन के तिब्बती क्षेत्र से उफनी भोटेकोशी नदी सीमा पार कर नेपाल में तबाही का मंजर लेकर आई, जिसने रिहायशी बस्तियों, पनबिजली परियोजनाओं और बुनियादी ढाँचे को बुरी तरह नष्ट कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, सर्वाधिक 108 शव दक्षिणी मैदानी जिले चितवन से बरामद हुए। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 62, धाडिंग से 27 और रसुवा से 17 शव मिले। नेपाल सरकार ने बताया कि संचार और बुनियादी ढाँचे के ध्वस्त होने के कारण 800 से अधिक लोगों से अभी तक संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी लापता

निजी क्षेत्र के बिजली डेवलपर्स के संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (IPPAN) ने कहा कि कई पनबिजली परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी लापता हैं। निर्माणाधीन 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना में एंड्रिट्ज हाइड्रो के 76 कर्मचारी लापता हैं, जिनमें लगभग आधे नेपाली और आधे विदेशी नागरिक हैं। परियोजना डेवलपर नेपाल वॉटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी के 11 कर्मचारी और 8 दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता सूची में हैं।

111 मेगावाट की रसुवागढ़ी पनबिजली परियोजना के 51 कर्मचारी, 5 मेगावाट की मैलुंग खोला परियोजना के 8 कर्मचारी और 120 मेगावाट की रसुवा भोटेकोशी परियोजना में सिविल कॉन्ट्रैक्टर सिनोहाइड्रो के 2 कर्मचारी भी लापता हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल अपनी जलविद्युत क्षमता को अंतरराष्ट्रीय निवेश के ज़रिये तेज़ी से विकसित कर रहा था।

300 भारतीय तीर्थयात्री लापता

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने काठमांडू में एक सम्मेलन के दौरान पुष्टि की कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब 300 भारतीय नागरिकों का पता नहीं चल पा रहा है। इनमें से अधिकतर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं, जो आपदाग्रस्त रसुवा क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।

खनाल ने कहा, "कुछ ही घंटों में एक के बाद एक कई शहर तबाह हो गए। हजारों परिवारों के घर उजड़ गए और वे अभी लापता हैं। हम अभी भी इस आपदा से हुए कुल नुकसान का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि कुल मिलाकर 500 से अधिक विदेशी नागरिकों से संपर्क टूटा हुआ है।

सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत दल तैनात किए हैं। विदेश मंत्री खनाल ने बताया कि सरकार लापता विदेशी नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित देशों के दूतावासों से लगातार संपर्क में है। गौरतलब है कि भोटेकोशी नदी पर स्थित बुनियादी ढाँचे और कस्टम कार्यालयों के क्षतिग्रस्त होने से सीमा पार संचालन भी बाधित हुआ है।

क्या होगा आगे

बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि दूरदराज़ के इलाकों से अभी भी शव बरामद हो रहे हैं। भारत सरकार के लिए 300 भारतीय तीर्थयात्रियों का पता लगाना प्राथमिकता बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तिब्बत से आने वाली नदियों पर बेहतर निगरानी तंत्र और पूर्व-चेतावनी प्रणाली की ज़रूरत है, जो इस क्षेत्र में बार-बार आने वाली ऐसी आपदाओं को देखते हुए और भी अहम हो जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तिब्बती नदियों पर साझा निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति का परिणाम भी है — भोटेकोशी जैसी सीमापार नदियों पर पूर्व-चेतावनी प्रणाली की माँग वर्षों से उठती रही है, पर ठोस द्विपक्षीय ढाँचा अभी तक नहीं बना। 300 भारतीय तीर्थयात्रियों का लापता होना नई दिल्ली के लिए कूटनीतिक दबाव का बिंदु बन सकता है, खासकर जब कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग की सुरक्षा पहले भी सवालों के घेरे में रही है। साथ ही, विदेशी निवेश से बन रही पनबिजली परियोजनाओं में सैकड़ों कर्मचारियों का लापता होना नेपाल की ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं और आपदा-प्रबंधन तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
नेपाल पुलिस ने 27 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि बाढ़ में अब तक 270 लोगों की मौत हो चुकी है। सर्वाधिक 108 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं और शव बरामदगी का सिलसिला जारी है।
नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय नागरिक लापता हैं?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की है कि करीब 300 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें से अधिकतर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री हैं जो आपदाग्रस्त रसुवा क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।
नेपाल में इतनी भयंकर बाढ़ कैसे आई?
चीन के तिब्बती क्षेत्र से उफनी भोटेकोशी नदी सीमा पार कर नेपाल में घुसी और रिहायशी इलाकों, पनबिजली परियोजनाओं तथा बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर दिया। इस बाढ़ के कारण 800 से अधिक लोगों से संपर्क टूट गया है।
नेपाल की पनबिजली परियोजनाओं में कितने कर्मचारी लापता हैं?
कई परियोजनाओं के मिलाकर सैकड़ों कर्मचारी लापता हैं। अपर त्रिशूली-1 परियोजना के एंड्रिट्ज हाइड्रो के 76, रसुवागढ़ी परियोजना के 51, मैलुंग खोला परियोजना के 8 और रसुवा भोटेकोशी परियोजना के सिनोहाइड्रो के 2 कर्मचारी लापता हैं।
नेपाल सरकार लापता विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए क्या कर रही है?
नेपाल सरकार संबंधित देशों के दूतावासों से लगातार संपर्क कर लापता विदेशी नागरिकों की जानकारी जुटा रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत दल तैनात हैं तथा कुल 500 से अधिक लापता विदेशी नागरिकों का पता लगाने की कोशिश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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