नेपाल आपदा: PM मोदी ने PM बालेंद्र शाह को दिलाया मदद का भरोसा, सांसद विदूषी राणा ने जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को फोन कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। नेपाल की सांसद और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की नेता विदूषी राणा ने इस संवेदनशील पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। 27 अगस्त को काठमांडू से सामने आई इस प्रतिक्रिया ने भारत-नेपाल के गहरे द्विपक्षीय संबंधों को एक बार फिर रेखांकित किया।
मोदी का आश्वासन और भारत की त्वरित सहायता
विदूषी राणा ने कहा, 'मैं वास्तव में पीएम मोदी की बहुत आभारी हूँ क्योंकि जैसे ही यह घटना हुई, उन्होंने दिल छू लेने वाला बयान दिया। पीड़ित परिवारों और देश के प्रति संवेदना संदेश भेजा, वो प्रशंसनीय है।' उन्होंने यह भी बताया कि भारत से राहत सामग्री पहले ही पहुँचनी शुरू हो चुकी है। राणा ने कहा, 'हमें भारत से पहले ही बहुत सारी राहत सामग्री मिल चुकी है। हर बार जब कोई आपदा आती है, तो हमें भारत से मदद मिलती है।'
आपदा की भयावहता और बचाव अभियान
राणा ने मौजूदा स्थिति को अत्यंत विनाशकारी बताया। उन्होंने कहा कि 2015 के नेपाल भूकंप के बाद यह देश की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक प्रतीत होती है। उन्होंने कहा, 'जो कुछ हुआ है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने पूरी रात लोगों और उन परिवारों के बारे में सोचते हुए बिताई, जो अपने बच्चों और प्रियजनों के लापता होने से परेशान हैं।' नेपाली सरकार ने बचाव एवं राहत अभियानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
भारत-नेपाल संबंध: इतिहास और भावना
राणा ने दोनों देशों के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा को केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय कड़ी बताया। उन्होंने कहा, 'भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का संबंध है, जहाँ दोनों देशों के लोगों के बीच वैवाहिक रिश्ते भी हैं। दोनों देशों के संबंध केवल आज के दौर में विकसित नहीं हुए हैं, बल्कि ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से दोनों देश लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं।' राणा ने यह भी कहा कि नेपाल भारत से बड़ी मात्रा में आयात करता है और यह संकट दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ करने का अवसर है।
भारतीय पक्ष की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विनय सहस्रबुद्धे ने भी नेपाल की स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आ रहे दृश्य बहुत डरावने हैं और इनसे लोगों को गहरी पीड़ा हो रही है। सहस्रबुद्धे ने फ्लैश फ्लड के कारण एक पुल के बह जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के समय भारत और नेपाल के बीच संबंध और मजबूत होते हैं क्योंकि यह रिश्ता संवेदना, दिल और भावना का है।
आगे की राह
गौरतलब है कि नेपाल में प्राकृतिक आपदाएँ लगातार बड़ी चुनौती रही हैं और हर बार भारत ने पड़ोसी के रूप में त्वरित सहायता प्रदान की है। यह संकट ऐसे समय में आया है जब दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।