भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव की नेपाल PM बालेन शाह से काठमांडू में मुलाकात, द्विपक्षीय साझेदारी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को काठमांडू में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की। यह बैठक इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि करीब चार महीने पहले पद संभालने के बाद यह पहला अवसर था जब प्रधानमंत्री शाह ने किसी विदेशी राजनयिक के साथ आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों पक्षों के बीच भारत-नेपाल संबंधों को और मज़बूत बनाने पर केंद्रित सार्थक चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुई चर्चा
बातचीत में द्विपक्षीय मित्रता, साझा हितों, विकास सहयोग और दोनों देशों के बीच जारी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। राजदूत श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं पहुँचाईं और भारत की ओर से नेपाल के साथ बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राजदूत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सोमवार सुबह नेपाल के माननीय प्रधानमंत्री बालेन शाह से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं। भारत और नेपाल के बीच मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने पर सार्थक और उपयोगी बातचीत हुई।'
प्रधानमंत्री शाह का रुख
रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने साझा हितों वाले क्षेत्रों में मिलकर काम करने के महत्व को भी रेखांकित किया। गौरतलब है कि इससे पहले शाह राजदूतों के साथ अकेले मुलाकात करने के बजाय समूह में बातचीत को प्राथमिकता देते रहे थे — इस बदलाव को कूटनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीन के राजदूत से भी हुई बैठक
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय राजदूत के साथ बैठक के बाद प्रधानमंत्री शाह ने उसी दिन चीन के राजदूत झांग माओमिंग के साथ भी अलग से एक-से-एक चर्चा की। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल दोनों बड़े पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भारत यात्रा का निमंत्रण अभी लंबित
पद संभालने के बाद भारत की ओर से प्रधानमंत्री शाह को यात्रा का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन 10 अगस्त 2026 तक उनका भारत दौरा नहीं हो पाया है। आमतौर पर नेपाल के नए प्रधानमंत्री पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद भारत या चीन की यात्रा करते रहे हैं, जिससे यह देरी कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय मानी जा रही है। आने वाले महीनों में इस यात्रा के संभावित कार्यक्रम पर दोनों देशों की नज़र बनी हुई है।