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भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक ₹3.25 लाख करोड़ पार कर सकता है: BCG-CII रिपोर्ट

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भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक ₹3.25 लाख करोड़ पार कर सकता है: BCG-CII रिपोर्ट

सारांश

BCG और CII की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह बड़ा मौका आयात भरेगा या देश का अपना विनिर्माण?

मुख्य बातें

BCG और CII की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक ₹3 लाख करोड़ से ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।
बाज़ार की वार्षिक वृद्धि दर 8 से 10 प्रतिशत रहने का अनुमान; घरेलू वैल्यू एडिशन में ₹40,000–50,000 करोड़ के अतिरिक्त अवसर।
BOM स्थानीयकरण अभी केवल 25–70% के बीच; AC कंप्रेसर, TV डिस्प्ले पैनल और वॉशिंग मशीन मोटर अभी भी आयात-निर्भर।
भारत में बड़े घरेलू उपकरणों की पहुँच एशिया के अन्य देशों से 20 से 90 प्रतिशत अंक कम — माँग वृद्धि की बड़ी संभावना।
BCG के अभीक सिंघी ने केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट और डिज़ाइन स्तर पर भी गहरे विनिर्माण की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) बाज़ार वर्ष 2030 तक ₹3 लाख करोड़ से ₹3.25 लाख करोड़ के स्तर पर पहुँच सकता है। 24 सितंबर 2026 को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती आय, पुराने उत्पादों की जगह नए उत्पाद खरीदने की प्रवृत्ति, आसान वित्तपोषण और उपभोक्ताओं की बदलती खरीदारी आदतें इस वृद्धि की प्रमुख चालक होंगी।

बाज़ार की विकास दर और संभावनाएँ

रिपोर्ट के अनुसार देश का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक 8 से 10 प्रतिशत की वार्षिक दर से विस्तार पा सकता है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप घरेलू स्तर पर सामग्री और विनिर्माण गतिविधियों में ₹40,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक की अतिरिक्त वैल्यू एडिशन का अवसर पैदा हो सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ है। गौरतलब है कि बड़े घरेलू उपकरणों की पहुँच भारत में एशिया के कई अन्य देशों की तुलना में 20 से 90 प्रतिशत अंक तक कम है, जो आने वाले वर्षों में माँग में उल्लेखनीय वृद्धि की बड़ी गुंजाइश दर्शाता है।

स्थानीयकरण की चुनौतियाँ

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीयकरण की वर्तमान गति बनी रही, तो इस संभावित अवसर का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए ही पूरा किया जाता रहेगा। विभिन्न श्रेणियों में बिल ऑफ मैटेरियल (BOM) का स्थानीयकरण अभी 25 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच है — टीवी और एयर कंडीशनर में यह स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी श्रेणियों में अधिक।

प्रौद्योगिकी तक पहुँच, बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत प्रतिस्पर्धा ऐसी प्रमुख बाधाएँ हैं, जो कई अहम घटकों के घरेलू निर्माण को सीमित कर रही हैं। इनमें एयर कंडीशनर के कंप्रेसर, टीवी डिस्प्ले पैनल, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन घटकों के लिए भारत अभी भी वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

BCG के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीनियर पार्टनर अभीक सिंघी ने कहा, 'अगले चरण का फोकस केवल असेंबली या अंतिम उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारत को कंपोनेंट्स, तकनीक, उत्पाद डिज़ाइन और विनिर्माण क्षमताओं को गहराई तक विकसित करना होगा।'

सिंघी ने यह भी रेखांकित किया कि देश के विशाल घरेलू बाज़ार को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

आगे का रास्ता

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि भारत को स्थानीयकरण की व्यावसायिक व्यवहार्यता को प्राथमिकता देनी होगी और उत्पादन का पैमाना तैयार करने के साथ-साथ लागत प्रतिस्पर्धा मज़बूत करनी होगी। कंपनियों को केवल घरेलू बाज़ार के लिए निर्माण करने से आगे बढ़कर 'दुनिया के लिए डिज़ाइन और निर्माण' की दिशा में काम करना चाहिए। इस दृष्टिकोण के बिना बाज़ार का विस्तार देश के बजाय आयात-निर्यातकों के पक्ष में झुकता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रिपोर्ट की असली चेतावनी यहीं दबी हुई है — स्थानीयकरण की मौजूदा रफ़्तार पर यह बाज़ार बड़े पैमाने पर आयातकों को फायदा पहुँचाएगा, न कि भारतीय विनिर्माताओं को। AC कंप्रेसर और TV पैनल जैसे उच्च-मूल्य घटकों में चीन की पकड़ अभी भी मजबूत है, और PLI जैसे प्रोत्साहनों के बावजूद घटक स्तर पर गहरी सफलता नहीं मिली है। जब तक भारत असेंबली से आगे बढ़कर कंपोनेंट डिज़ाइन और तकनीकी स्वामित्व की दिशा में ठोस निवेश नहीं करता, तब तक बाज़ार की यह वृद्धि देश के व्यापार घाटे को भी उसी अनुपात में बढ़ाती रहेगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BCG-CII रिपोर्ट में भारत के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार के बारे में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट के अनुसार भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक ₹3 लाख करोड़ से ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है, जो 8 से 10 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ेगा। बढ़ती आय, आसान वित्तपोषण और बदलती उपभोक्ता आदतें इस वृद्धि की मुख्य वजहें बताई गई हैं।
भारत में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के स्थानीयकरण में क्या बाधाएँ हैं?
रिपोर्ट के अनुसार प्रौद्योगिकी तक पहुँच, उत्पादन पैमाने की कमी और लागत प्रतिस्पर्धा स्थानीयकरण की प्रमुख बाधाएँ हैं। AC कंप्रेसर, TV डिस्प्ले पैनल, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर जैसे घटकों के लिए भारत अभी भी वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है।
भारत में घरेलू उपकरणों की पहुँच अन्य एशियाई देशों से कितनी कम है?
रिपोर्ट के अनुसार बड़े घरेलू उपकरणों की पहुँच भारत में एशिया के कई अन्य देशों की तुलना में 20 से 90 प्रतिशत अंक तक कम है। इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में इन उत्पादों की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि की प्रबल संभावना बनी हुई है।
BCG के विशेषज्ञ अभीक सिंघी ने भारतीय उद्योग को क्या सलाह दी?
BCG के मैनेजिंग डायरेक्टर अभीक सिंघी ने कहा कि भारत को केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कंपोनेंट्स, तकनीक, उत्पाद डिज़ाइन और विनिर्माण क्षमताओं को गहराई तक विकसित करना होगा। उन्होंने देश के विशाल घरेलू बाज़ार को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की नींव बनाने की बात कही।
इस बाज़ार वृद्धि से घरेलू विनिर्माण को कितना फायदा होगा?
रिपोर्ट के अनुसार इस वृद्धि से घरेलू स्तर पर ₹40,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक की अतिरिक्त वैल्यू एडिशन का अवसर बन सकता है। हालाँकि, रिपोर्ट ने यह भी चेताया है कि यदि स्थानीयकरण की गति नहीं बढ़ी तो इस अवसर का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा होता रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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