भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक ₹3.25 लाख करोड़ पार कर सकता है: BCG-CII रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) बाज़ार वर्ष 2030 तक ₹3 लाख करोड़ से ₹3.25 लाख करोड़ के स्तर पर पहुँच सकता है। 24 सितंबर 2026 को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती आय, पुराने उत्पादों की जगह नए उत्पाद खरीदने की प्रवृत्ति, आसान वित्तपोषण और उपभोक्ताओं की बदलती खरीदारी आदतें इस वृद्धि की प्रमुख चालक होंगी।
बाज़ार की विकास दर और संभावनाएँ
रिपोर्ट के अनुसार देश का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाज़ार 2030 तक 8 से 10 प्रतिशत की वार्षिक दर से विस्तार पा सकता है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप घरेलू स्तर पर सामग्री और विनिर्माण गतिविधियों में ₹40,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक की अतिरिक्त वैल्यू एडिशन का अवसर पैदा हो सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ है। गौरतलब है कि बड़े घरेलू उपकरणों की पहुँच भारत में एशिया के कई अन्य देशों की तुलना में 20 से 90 प्रतिशत अंक तक कम है, जो आने वाले वर्षों में माँग में उल्लेखनीय वृद्धि की बड़ी गुंजाइश दर्शाता है।
स्थानीयकरण की चुनौतियाँ
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीयकरण की वर्तमान गति बनी रही, तो इस संभावित अवसर का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए ही पूरा किया जाता रहेगा। विभिन्न श्रेणियों में बिल ऑफ मैटेरियल (BOM) का स्थानीयकरण अभी 25 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच है — टीवी और एयर कंडीशनर में यह स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी श्रेणियों में अधिक।
प्रौद्योगिकी तक पहुँच, बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत प्रतिस्पर्धा ऐसी प्रमुख बाधाएँ हैं, जो कई अहम घटकों के घरेलू निर्माण को सीमित कर रही हैं। इनमें एयर कंडीशनर के कंप्रेसर, टीवी डिस्प्ले पैनल, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन घटकों के लिए भारत अभी भी वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
BCG के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीनियर पार्टनर अभीक सिंघी ने कहा, 'अगले चरण का फोकस केवल असेंबली या अंतिम उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारत को कंपोनेंट्स, तकनीक, उत्पाद डिज़ाइन और विनिर्माण क्षमताओं को गहराई तक विकसित करना होगा।'
सिंघी ने यह भी रेखांकित किया कि देश के विशाल घरेलू बाज़ार को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
आगे का रास्ता
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि भारत को स्थानीयकरण की व्यावसायिक व्यवहार्यता को प्राथमिकता देनी होगी और उत्पादन का पैमाना तैयार करने के साथ-साथ लागत प्रतिस्पर्धा मज़बूत करनी होगी। कंपनियों को केवल घरेलू बाज़ार के लिए निर्माण करने से आगे बढ़कर 'दुनिया के लिए डिज़ाइन और निर्माण' की दिशा में काम करना चाहिए। इस दृष्टिकोण के बिना बाज़ार का विस्तार देश के बजाय आयात-निर्यातकों के पक्ष में झुकता रहेगा।