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भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ के पार, आवास माँग 30 लाख यूनिट तक पहुँचने का अनुमान

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भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ के पार, आवास माँग 30 लाख यूनिट तक पहुँचने का अनुमान

सारांश

भारत का सीनियर लिविंग सेक्टर महज़ एक सामाजिक ज़रूरत नहीं — यह अब एक ट्रिलियन-रुपए का निवेश अवसर है। कोलियर्स की रिपोर्ट बताती है कि 25,000 यूनिट की मौजूदा आपूर्ति के मुकाबले 20-22 लाख यूनिट की माँग है — और यह खाई 2030 तक ₹1 लाख करोड़ का बाज़ार बनाने की नींव है।

मुख्य बातें

कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक का होगा।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास की माँग 30 लाख यूनिट तक पहुँचने का अनुमान; संगठित आपूर्ति अभी केवल 25,000 यूनिट ।
संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री 2030 तक 1 लाख यूनिट होने की संभावना — मौजूदा स्तर से चार गुना।
बाज़ार की पहुँच 1.3% से बढ़कर अगले 3-4 वर्षों में 4% होने का अनुमान।
भारत की 60+ आयु की आबादी 2050 तक 21% होगी; वैश्विक बुजुर्ग आबादी में भारत का हिस्सा 16% रहेगा।

कोलियर्स इंडिया की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक का हो सकता है और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास की माँग 30 लाख यूनिट तक पहुँचने की संभावना है। 18 अगस्त 2026 को जारी यह रिपोर्ट भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में एक नए उभरते परिसंपत्ति वर्ग की ओर संकेत करती है।

बाज़ार का मौजूदा आकार और विकास पथ

रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, यह क्षेत्र वर्तमान में करीब ₹30,000 करोड़ (300 अरब रुपए) का है, जो 2024 के स्तर से लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। कोलियर्स के अनुमान के अनुसार बाज़ार का आकार 2024 में ₹18,000 करोड़, 2026 में ₹30,000 करोड़, 2028 में ₹70,000 करोड़ और 2030 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा।

संगठित क्षेत्र में वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध आवास की संख्या मौजूदा करीब 25,000 यूनिट से बढ़कर 2030 तक लगभग 1 लाख यूनिट हो सकती है। बाज़ार की पहुँच मौजूदा 1.3 प्रतिशत से बढ़कर अगले तीन से चार वर्षों में करीब 4 प्रतिशत होने का अनुमान है।

माँग और आपूर्ति का बड़ा अंतर

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में सीनियर लिविंग की माँग करीब 20 से 22 लाख यूनिट आँकी गई है, जबकि संगठित बाज़ार में उपलब्ध आवास की संख्या केवल 25,000 यूनिट है। यह विशाल अंतर इस क्षेत्र में निवेश और विकास की असीम संभावनाओं को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, 'भारत का सीनियर लिविंग बाज़ार देश में सबसे आशाजनक वैकल्पिक रियल एस्टेट परिसंपत्ति वर्गों में से एक बनकर उभरा है। इसे उम्र-केंद्रित आवास की बढ़ती माँग और डेवलपर्स, हेल्थकेयर ऑपरेटरों और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से समर्थन मिल रहा है।'

जनसांख्यिकीय बदलाव: विकास की मुख्य वजह

भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी का हिस्सा वर्तमान के 11 प्रतिशत से बढ़कर 2050 तक करीब 21 प्रतिशत होने की उम्मीद है। 2050 तक दुनिया की करीब 2.1 अरब बुजुर्ग आबादी में भारत का हिस्सा लगभग 16 प्रतिशत हो सकता है, जिससे भारत वैश्विक वरिष्ठ नागरिक आवास बाज़ार के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब बढ़ती जीवन प्रत्याशा, एकल परिवारों का चलन, आय के बढ़ते स्तर, बेहतर सेवानिवृत्ति योजना और स्वास्थ्य एवं कल्याण पर बढ़ते ध्यान ने उम्र के अनुरूप आवासीय समाधानों की माँग को नई ऊँचाई दी है।

विशेषज्ञ की राय

कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक बादल याग्निक ने कहा, 'तेज़ी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और पेशेवर रूप से प्रबंधित वरिष्ठ नागरिक आवास एवं देखभाल समाधानों की बढ़ती माँग के साथ यह बाज़ार दीर्घकालिक विकास के महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है।' उन्होंने आगे कहा कि संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री अगले 3 से 4 वर्षों में चार गुना होने की उम्मीद है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह क्षेत्र अभी भी काफी हद तक असंगठित है और संगठित खंड में आपूर्ति माँग के मुकाबले बेहद कम है। आने वाले वर्षों में डेवलपर्स, हेल्थकेयर ऑपरेटरों और संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इस अंतर को पाटने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती माँग और आपूर्ति के बीच की खाई को पाटना है — 20-22 लाख यूनिट की माँग के मुकाबले महज़ 25,000 यूनिट की संगठित आपूर्ति एक संरचनात्मक विफलता की ओर इशारा करती है। भारत में वरिष्ठ नागरिक आवास नीति अभी भी बिखरी हुई है और केंद्र व राज्य स्तर पर कोई एकीकृत नियामक ढाँचा नहीं है। बाज़ार की वृद्धि तभी टिकाऊ होगी जब सरकार किफायती सीनियर लिविंग विकल्पों को प्रोत्साहन दे — अन्यथा यह क्षेत्र केवल संपन्न वर्ग तक सीमित रहेगा और बहुसंख्यक बुजुर्ग आबादी हाशिए पर रहेगी।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक कितना बड़ा होगा?
कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक का हो जाएगा। यह 2024 के ₹18,000 करोड़ के स्तर से कई गुना अधिक है।
भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास की माँग कितनी है?
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में सीनियर लिविंग की माँग 20 से 22 लाख यूनिट है, जबकि संगठित बाज़ार में उपलब्ध आवास केवल 25,000 यूनिट है। 2030 तक कुल माँग 30 लाख यूनिट तक पहुँचने का अनुमान है।
सीनियर लिविंग मार्केट में इतनी तेज़ वृद्धि क्यों हो रही है?
बढ़ती जीवन प्रत्याशा, एकल परिवारों का बढ़ता चलन, आय के ऊँचे स्तर और स्वास्थ्य पर बढ़ता ध्यान इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं। भारत की 60+ आयु की आबादी 2050 तक 21% होने का अनुमान है, जो अभी 11% है।
संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री 2030 तक कितनी होगी?
कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री 2030 तक लगभग 1 लाख यूनिट हो जाएगी, जो मौजूदा 25,000 यूनिट से चार गुना अधिक है।
वैश्विक बुजुर्ग आबादी में भारत की क्या भूमिका होगी?
2050 तक दुनिया की करीब 2.1 अरब बुजुर्ग आबादी (60 वर्ष और उससे अधिक) में भारत का हिस्सा लगभग 16 प्रतिशत होगा। इससे भारत वरिष्ठ नागरिक आवास के लिए दुनिया के प्रमुख विकास बाज़ारों में शामिल हो जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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