2029 तक युवा भारतीय वेतनभोगी उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के बाजार को 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाएंगे: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ने की संभावना।
- युवा पेशेवरों की बिक्री में 37 प्रतिशत भागीदारी।
- महिलाओं की अपग्रेडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका।
- स्मार्ट उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
- खरीद अनुभव और सेवा पर जोर।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का बाजार 11 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ते हुए 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इस वृद्धि में युवा पेशेवर खासकर वेतनभोगी वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह जानकारी शुक्रवार को जारी जीआई ग्रुप होल्डिंग की रिपोर्ट में उजागर की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा पेशेवर तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) की बिक्री का 37 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, और लगभग 45 प्रतिशत खरीद फाइनेंस (कर्ज या ईएमआई) के जरिए होती है।
लगभग 74 प्रतिशत जेन जेड उपभोक्ता ईएमआई या 'बाय नाउ, पे लेटर' जैसे विकल्पों का उपयोग करते हैं। 68 प्रतिशत खरीदारों के लिए उत्पाद की विशेषताएं खरीद का सबसे बड़ा कारण हैं। इसके बाद 61 प्रतिशत के लिए रिव्यू, 59 प्रतिशत के लिए कीमत और 55 प्रतिशत के लिए वारंटी महत्वपूर्ण होती है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लगभग 73 प्रतिशत खरीदार अभी भी 'पैसे के सही मूल्य' वाले उत्पादों का चयन करते हैं, लेकिन 70 प्रतिशत लोग बेहतर प्रदर्शन मिलने पर मिड-टियर या प्रीमियम उत्पादों में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
महिलाएं भी अपग्रेडिंग की इस मांग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 61 प्रतिशत महिलाओं ने ज्यादा महत्वाकांक्षी खरीदारी करने की इच्छा व्यक्त की। वहीं, 46 प्रतिशत उपभोक्ता हर 2-3 साल में अपने ड्यूरेबल उत्पादों को बदलते हैं, और 63 प्रतिशत लोग अपग्रेड करते समय अक्सर ब्रांड भी बदल लेते हैं।
इसलिए, खरीद का अनुभव, बिक्री के बाद सेवा और भरोसेमंद समर्थन अब बाजार में महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर रहे हैं, क्योंकि अपग्रेड करने की इच्छा लगातार बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगली बड़ी लहर 'स्मार्ट लिविंग' की होगी। 42 प्रतिशत लोगों के पास पहले से कम से कम एक स्मार्ट डिवाइस है, और 67 प्रतिशत लोग मानते हैं कि उनकी अगली खरीद स्मार्ट फीचर वाली होगी।
जीआई ग्रुप होल्डिंग की कंट्री मैनेजर सोनल अरोड़ा ने बताया कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि कर्मचारियों का प्रशिक्षण, बेहतर रिटेल अनुभव, मजबूत बिक्री के बाद सहायता और पीएलआई योजनाओं के जरिए विस्तार बेहद जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि जो कंपनियां इन बदलावों के अनुसार अपने को ढालेंगी, वे भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग की जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीली, रचनात्मक और ग्राहक-केंद्रित रणनीति बना सकेंगी।